Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

मंत्रियों का बचाव सरकार के लिए पड़ रहा है ‘महंगा’

तमाम राजनीतिक जुगाड़ के बाद भी संसद में सरकार को जरा भी राहत नहीं मिल पा रही है। ‘कोलगेट’ मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने नया शपथ पत्र दाखिल कर दिया है। इसमें खुलासा हो गया है कि कानून मंत्री अश्विनी कुमार और पीएमओ के अधिकारियों ने स्टेटस रिपोर्ट में कई बदलाव कराए थे। यह भी स्वीकार कर लिया गया है कि इस रिपोर्ट के ड्राफ्ट को अटार्नी जनरल और एडिशनल सोलिस्टर जनरल ने भी देखी थी। इन लोगों ने भी मसौदे में कुछ बदलाव करने के सुझाव दिए थे।

तमाम राजनीतिक जुगाड़ के बाद भी संसद में सरकार को जरा भी राहत नहीं मिल पा रही है। ‘कोलगेट’ मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने नया शपथ पत्र दाखिल कर दिया है। इसमें खुलासा हो गया है कि कानून मंत्री अश्विनी कुमार और पीएमओ के अधिकारियों ने स्टेटस रिपोर्ट में कई बदलाव कराए थे। यह भी स्वीकार कर लिया गया है कि इस रिपोर्ट के ड्राफ्ट को अटार्नी जनरल और एडिशनल सोलिस्टर जनरल ने भी देखी थी। इन लोगों ने भी मसौदे में कुछ बदलाव करने के सुझाव दिए थे।

इस हलफनामे के दाखिल होने के बाद विपक्ष ने और आक्रामक रुख अपना लिया है। पहले मुख्य तौर पर भाजपा नेतृत्व ही कानून मंत्री और रेल मंत्री के इस्तीफे मांग रहा था। लेकिन, अब वामदलों ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। यहां तक कि सरकार का खास समर्थन करने वाले दल, सपा ने रेलमंत्री के बचाव पर अपनी सख्त नाराजगी जाहिर की है। मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर संसद के दोनों सदनों में कल भी काम नहीं हो पाया। विपक्ष की बढ़ी एकजुटता ने सरकार के रणनीतिकारों की तमाम कोशिशों को बेकार करना शुरू कर दिया है।

सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने कोयला घोटाले जांच मामले में अपना नया शपथ पत्र सुप्रीम कोर्ट में कल दाखिल किया। इस शपथ पत्र में सीबीआई ने दो टूक ढंग से यह बात स्वीकार कर ली है कि सरकार ने इस रिपोर्ट के मसौदे में कई बदलाव करवा दिए थे। हालांकि, यह सफाई जरूर दी गई है कि इन बदलावों से किसी आरोपी को फायदा मिलने की गुंजाइश नहीं है। यह भी दावा किया गया है कि किसी आरोपी का नाम हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई। यह भी जाहिर हुआ है कि पीएमओ के एक आलाधिकारी के सुझाव पर कुछ बदलाव किए गए थे। इनमें खास तौर पर कोयला खदानों के आवंटन नियमों में छूट का प्रावधान न होने का जिक्र था। इस जिक्र को पीएमओ के अधिकारी के कहने पर हटाया गया। 9 पेज के इस शपथ पत्र में सीबीआई ने विस्तार से तमाम ब्यौरा दिया है।

सीबीआई निदेशक ने रिपोर्ट को सरकार से साझा करने के लिए अदालत से माफी भी मांग ली है। कानून मंत्री अश्विनी कुमार कहते हैं कि सीबीआई के शपथ पत्र से साफ है कि उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया। किसी आरोपी को बचाने का सुझाव नहीं दिया। ऐसे में, विपक्ष को अपने अड़ियल रुख से बाज आना चाहिए। जबकि, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का मानना है कि कानून मंत्री सहित पूरी यूपीए सरकार बेशर्मी पर उतारू हो गई है। कोशिश की जा रही है कि लोगों का ध्यान कोयला घोटाला और रेल मंत्रालय के रिश्वतकांड से भटक जाए। इसीलिए सरकार तमाम राजनीतिक नाटक करने पर उतारू हो गई है। लेकिन, एनडीए ने तय कर लिया है कि जब तक कानून मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे नहीं होते, तब तक संसद में सरकार को कोई विधेयक पास नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि इसके लिए सांसदों को सदन के अंदर भी धरने पर बैठना पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि बजट सत्र का दूसरा चरण 22 अप्रैल से शुरू हुआ था। लेकिन, कोयला कांड के स्टेटस रिपोर्ट विवाद को लेकर संसद का कार्य लगातार बाधित चल रहा है। सरकार की अपील के बाद विपक्ष ने केवल बजट विधेयकों को पास कराने की अनुमति दी थी। सरकार का वार्षिक आम बजट और रेल बजट बगैर चर्चा के पिछले सप्ताह पास भी हो चुके हैं। संसद सत्र को 10 मई तक चलना है। सरकार को इस अवधि में खाद्य सुरक्षा गारंटी और भूमि अधिग्रहण संशोधन जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराना है। भूमि अधिग्रहण के विधेयक को लेकर सर्वदलीय बैठक में आम सहमति भी बन गई थी। लेकिन, दो मंत्रियों के विवाद ने राजनीतिक ‘जाम’ की स्थिति पैदा कर दी है।

हालांकि, कल खाद्य सुरक्षा गारंटी विधेयक अफरा-तफरी के बीच लोकसभा में पेश कर दिया गया। सरकार इस पर चर्चा भी कराने पर उतारू थी। लेकिन, विपक्ष के विरोध के कारण चर्चा नहीं हो पाई। अब विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सीधे तौर पर ऐलान कर दिया है कि सरकार को कोई विधेयक पास नहीं कराने दिया जाएगा। इसके लिए विपक्ष हर लोकतांत्रिक तरीका अपनाएगा। विपक्ष के रुख को देखते हुए इस बात के कयास तेज थे कि शायद सरकार अब संसद के दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दे। लेकिन, लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार ने कह दिया है कि सदन 10 मई के पहले स्थगित नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष से सहयोग करने की एक बार फिर से अपील की है।

संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ, भाजपा के रुख को गैर-लोकतांत्रिक करार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरा देश यह तमाशा देख रहा है कि मुख्य विपक्षी दल, किस तरह से संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए संसद को ठप करा रहा है? जबकि सरकार ने कह दिया है कि स्टेटस रिपोर्ट वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 8 मई को अदालत का फैसला आना है। अच्छा यही रहेगा कि सब लोग अदालत के फैसले का इंतजार करें। सरकार पहले ही कह चुकी है कि अदालत का जो भी फैसला होगा, उसका वह आदर करेगी। इसके बाद भी विपक्ष संसद के कामकाज में बाधा डाल रहा है। इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण और क्या बात हो सकती है? भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद का सवाल है कि रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को सरकार इतनी बेशर्मी से क्यों बचा रही है? जबकि सीबीआई जांच में यह बात स्पष्ट रूप से आ गई है कि मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर घूसखोरी चल रही है। रेलवे बोर्ड में महेश कुमार का प्रमोशन भी हो चुका है। अब इन्हें महत्वपूर्ण कामकाज देने का सौदा तय हुआ था। घूस की यह डील करीब 10 करोड़ रुपए की थी। पहली किश्त के रूप में 90 लाख रुपए शुक्रवार को मंत्री के भांजे विजय सिंगला ने लिए थे। वे चंड़ीगढ़ में रकम के साथ रंगे हाथ पकड़ लिए गए हैं।

सीबीआई के पास इस बात के भी सबूत हैं कि इस ‘डील’ के दौर में मंत्री और उनके भांजे के बीच लगातार फोन पर बातचीत हो रही थी। इस घूसकांड के खुलासे के लिए जरूरी है कि सीबीआई रेलमंत्री से पूछताछ करे। रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि जब तक पवन बंसल रेलमंत्री पद पर विराजमान हैं, तब तक भला कैसे सीबीआई का कोई इंस्पेक्टर उनसे पूछताछ करने की हिमाकत कर सकता है? संसद में हम यही बात उठा रहे हैं, तो सरकार के लोग बहानेबाजी कर रहे हैं। लेकिन, हम लोग सरकार को चैन नहीं लेने देंगे।

उल्लेखनीय है कि पवन बंसल को बचाने के लिए कांग्रेस का आलाकमान पूरी ताकत से जुट गया है। पिछले दिनों दो बार कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठकें प्रधानमंत्री निवास पर हो चुकी हैं। लेकिन, इनमें कोई फैसला नहीं हो पाया। पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी यहां तक कह चुके हैं कि भाजपा नेताओं को इस्तीफा मांगने का रोग-सा हो गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री मनीष तिवारी की सफाई है कि रेलमंत्री के मामले में विपक्ष का अफलातून होना किसी तरह से जायज नहीं है। आखिर जब सीबीआई की जांच चल रही है, तो इसका कुछ इंतजार करना चाहिए। बात-बात पर इस्तीफे मांगने की राजनीति ठीक नहीं है।

सरकार के लिए राहत की बात इतनी ही है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने रेलमंत्री के मामले में नरम रुख अपना लिया है। उनका कहना है कि जब सीबीआई जांच चल रही है, तो किसी को रेलमंत्री से इस्तीफे के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए। बसपा, सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है। लोकसभा का जो मौजूदा अंक गणित है, उसमें सपा और बसपा के समर्थन के भरोसे ही मनमोहन सरकार चल रही है। लेकिन, बंसल प्रकरण में सपा के ताजा रुख ने सरकार की बेचैनी बढ़ा दी है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने कह दिया है कि घूसकांड में जितने तथ्य आ गए हैं, उनसे ही तस्वीर काफी साफ हो गई है। उनकी पार्टी भी चाहती है कि रेलमंत्री बगैर देरी के इस्तीफा दे दें। कांग्रेस जिस तरह से रेलमंत्री का बचाव कर रही है यह किसी तरह से उचित नहीं है। बंसल के मामले में सपा नेतृत्व विपक्ष के रुख को जायज करार कर रहा है।

सीपीएम की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने भी बंसल के मामले में सरकार के रुख को घोर अनैतिक करार किया है। उनका मानना है कि जिस तरह से रेलवे बोर्ड के एक सदस्य की नियुक्ति के मामले में मोटी रकम की डील हुई है, ऐसे में बंसल को निर्दोष नहीं माना जा सकता। नैतिकता का तो यही तकाजा था कि रेलमंत्री से तुरंत इस्तीफा ले लिया जाता। उन्हें हैरानी है कि इस मामले में सरकार के लोग बेशर्मी पर उतारू लगते हैं। वाममोर्चा को लगता है कि कानून मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे जरूर होने चाहिए। ऐसे में, विपक्ष इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाता है, तो इसमें खराब क्या है? पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने सरकार पर एक तीखा कटाक्ष कर डाला है। उन्होंने कह दिया, ‘पहले अली बाबा और 40 चोर की बात सुनी थी, लेकिन यहां तो मौनी बाबा और उनके 90 चोर हाजिर हैं।’ यशवंत सिन्हा के इस जुमले से कांग्रेस का नेतृत्व खासा तिलमिला गया है। केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने अनौपचारिक तौर पर यही कहा कि भाजपा नेताओं की नीयत खराब है, शायद इसीलिए उनकी भाषा शैली भी ‘बीमारू’ होती जा रही है।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...