मंत्री जी, ईएमएमसी में जमकर लूट मचाए हुए हैं वरिष्‍ठ अधिकारी

सेवा में,  
मनीष तिवारी
मनानीय मंत्री महोदय,
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार

विषय  – इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग आईपी इस्टेट न्यू डेल्ही के सम्बन्ध में शिकायत एवं प्रार्थना।

महोदय,

निवेदन यह है कि लगभग दो माह पूर्व ईएमएमसी के सभी कर्मचारियों ने मिलकर एक शिकायत आप को पत्र एवं ई मेल के माध्यम से की थी, जिससे इन लोगों पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन हम लोगों को और अधिक परेशान किया जाने लगा है। पूर्ण शिकायत विस्तार से ये हैं –

१. हमारे द्वारा की गई शिकायत की जानकारी मिलने पर प्रशासन ने पहले तो सभी स्टाफ से एक पेपर पर जबरन हस्‍ताक्षर करवाए और लिखवाया कि ये शिकायत हम लोगों ने नहीं की है, जो कि किसी ने भी अपनी मर्जी से नहीं किये है।

२. शिकायत के बाद बेसिल से एक अधिकारी जिनका नाम नहीं पता भी आये, जिन्होंने आकर सब के सामने ये बात कही कि इस तरह की शिकायतों से कुछ नहीं होता, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता तुम यूं ही परेशान क्यों होते हो?

३. यहाँ के प्रशासन ने सभी स्टाफ की ओर से एक पत्र तैयार किया है और ये सब कुछ शरारती लोगों की चाल बता कर बात को टालने की कोशिश की है, जबकि सचाई यह है कि यहाँ फण्ड में भारी गोल माल हो रहा है। सब कुछ डायरेक्टर महोदय की छत्रछाया में चल रहा है।

४. इस पत्र  में ईएसआईसी बनवाने और पीएफ सुविधा देने की भी बात कही गई है, जबकि सचाई ये है कि इसके लिए पैसे पिछले लगभग नौ से दस माह से काटे जा रहे थे, लेकिन ये सुविधा तब दी गई जब इस सम्बन्ध में आरटीआई डालकर पूछा गया कि पैसे काटने के बाद भी ये सुविधा क्यों नहीं दी जा रही है, तब कहीं जाकर ये सुविधा दी गई।

५. दुसरे ये जो गाडियां यहाँ चलवाई जा रही हैं, ये यहीं के अधिकारी भारत भूषण के द्वारा चलवाई जा रही हैं, जो मोटे बिल पास करवाकर अपनी जेबें भर रहे हैं और इस सब के बाद निदेशक महोदय का आंखें बंद करे रखना सोच का विषये है।

६.  ईएमएमसी के अन्दर एक कैंटीन खुलवाई गई थी जो कि यहाँ के अधिकारी भारत भूषण के ही रिश्तेदार या पड़ोसी के द्वारा खोली गई थी, जो कि काफी महंगा पड़ता था इसलिए लोग उसमें खाना पसंद नहीं करते थे क्योंकि सैलरी भी काफी कम है, लेकिन यहाँ का प्रशासन इस बात का दवाब डालता था कि इस कैंटीन का इस्तेमाल करो।

७. इएमएमसी से जुड़े मुद्दों के ऊपर हमने एक आरटीआई आवेदन भी किया था, जिसमें यहाँ के फण्ड और पैसे के उपयोग से लेकर, ट्रांसपोर्ट के सम्बन्ध में, और नए हॉल को बनाने में आने वाले खर्च के संबंध को लेकर प्रश्‍न किये थे, लेकिन प्रथम आपील के बाद भी जवाब नहीं दिया गया। यदि किसी तरह का कोई घपला नहीं है तो सीधे तौर पर जवाब क्यों नहीं दे दिया गया, जिसकी आपील अब हमने सीआईसी को की है।

हमारा पुन आपसे नम्र निवेदन है कि हमारा मकसद किसी भी परेशान करना नहीं है, केवल सच्‍चाई बताना भर है और दोनों हाथों से ईएमएमसी को लूट रहे लोगों को इस बात का डर है कि कहीं उनकी पोल ना खुल जाये। आप इन शिकायतों की स्वयं निष्पक्ष जाँच करवा लें सच्‍चाई खुद ब खुद सामने आ जाएगी। ये लोग डिपार्टमेंट को लूटे जा रहे हैं और यहाँ का स्टाफ इतनी कम सैलरी में भारी दवाब में जीने को मजबूर है।

पुन आपकी ओर आशा भरी नज़रों से देखते हुआ ये पत्र भेज रहे हैं। आप हमारी तकलीफ समझेंगे। नाम नहीं लिखने के लिए माफ़ी चाहेंगे क्योंकि नाम लिखते ही जिसका भी नाम होगा उसे बाहर निकाल दिया जायेगा।

सभी कर्मचारी
इएमएमसी
आईपी एस्टेट न्यू डेल्ही – २

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