मजीठिया मंच अब फेसबुक व ट्विटर पर भी

मजीठिया मंच ने फेसबुक और ट्विटर पर अपना एकाउंट शुरू कर दिया है। बड़ी संख्‍या में लोग मंच से जुड़ रहे हैं। मंच ने उत्‍पीड़न के शिकार कर्मचारियों से अपील की है कि वे मायूस न हों। मजीठिया मंच उनका भी साथ देगा। बता दें कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार एरियर के लिए दैनिक जागरण के पूर्व कर्मचारियों और संस्‍थान में तू डाल-डाल मैं पात-पात का खेल जारी है।

कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना रहे हैं, तो जागरण प्रबंधन मामले को यह कह कर ठंडे बस्‍ते में डालना चाहता है कि जो कुछ होगा, कानपुर से निर्देश मिलने के बाद ही होगा। उधर, वर्तमान में नौकरी कर रहे लोगों का उत्‍पीड़न जारी है। कानपुर से खबर है कि वहां कुछ लोगों को डिमोट कर दिया गया है, ताकि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अधिक सैलरी देने से बचा जा सके।

नई दुनिया के सूत्रों का कहना है कि जागरण समूह विखंडित होकर छोटे-छोटे समूहों में विभाजित हो रहा है। इस प्रकार मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन देने में फायदा उठाने की चंठई की जा रही है। नोएडा से खबर है कि वहां तरह-तरह से कर्मचारियों का उत्‍पीड़न किया जा रहा है। किसी न किसी बहाने किसी का वेतन काटा जा रहा है तो किसी को आए दिन फोर्स लीव पर भेजा जा रहा है। इस बात से कर्मचारियों में असंतोष की आग धधक रही है, जो कभी भी विस्‍फोट का कारण बन सकती है। प्रबंधन है कि उसे मुनाफाखोरी की तिकड़म से ही फुरसत नहीं है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि अब 1992 का इतिहास दुहराने का समय आ गया है।

उधर, मजीठिया मंच ने पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उसने कहा है कि कर्मचारियों को कभी भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है और केंद्र सरकार भी पैनल गठित करने की अधिसूचना जारी कर कर्मचारियों के साथ खड़ी है। जिन कर्मचारियों का उत्‍पीड़न किया जा रहा है, वे भी मजीठिया मंच से जुड़ सकते हैं, ताकि भविष्‍य में उन्‍हें भी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार किया जा सके।

मजीठिया मंच अब फेसबुक और ट्विटर पर उपस्थित है। यही वजह है कि बड़ी तेजी से लोग मजीठिया मंच से जुड़ने लगे हैं। कर्मचारी वहां अपनी परेशानी शेयर कर सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श कर उन्‍हें गाइड करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। दैनिक जागरण की रणनीति का गहन अध्‍ययन करने के बाद ही मजीठिया मंच का गठन किया गया है, ताकि आंदोलन को किसी भी स्‍तर पर विफल होने से बचाया जा सके।

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