अखबारों के मालिकान मजीठिया वेज बोर्ड पर फैसले पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए हैं. इस मामले को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर माननीय मुख्य न्यायमूर्ति पी. सथशिवम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ 9 अप्रैल यानि बुधवार को अपराह्न 1: 50 बजे सुनवाई करेगी. इस पर मीडया से जुड़े सभी लोगों की नजरें होंगी. इस पीठ के दो अन्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और शिवा कीर्ति सिंह हैं.
याचिका दाखिल करने वालों में आनंद बाजार पत्रिका निकालने वाले समूह एबीपी प्रा.लि., इंडियन एक्सप्रेस लिमिटेड, इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, राजस्थान पत्रिका प्रा. लिमिटेड, उषोदया पब्लिकेशंस, और द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा.लि. के नाम शामिल हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए सहमति देता है तो फिर अखबारों, पत्रिकाओं और समाचार एजेंसियों में कार्यरत पत्रकारों और गैर-पत्रकारों को अपने बढ़े वेतन एवं एरियर के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है.
उधर, भड़ास के पास भेजे गए एक पत्र के मुताबिक प्रभात खबर के पत्रकारों को मजीठिया का लाभ नहीं मिलने की आशंका है. रांची कार्यालय में एक पत्रकार ने अपने बेहद वरिष्ठ से जब इस बारे में पूछा गया तो उसे बताया गया कोई मुगालता मत पालो, मैनेजमेंट ने काट ढूंढ ली है. हालांकि मैनेजमेंट ने क्या काट ढूंढी है, यह नहीं बताया गया. यह खबर भी आ रही है कि कुछ दिनों पहले ही प्रभात खबर ने इस बाबत हिंदुस्तान और जागरण प्रबंधन से भी बात की है. पहले कहा जा रहा था कि अगर इन दो संस्थानों में अगर मजीठिया दिया गया तो प्रभात खबर में भी दिया जायेगा. लेकिन अब कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान और जागरण कुछ भी करे प्रभात खबर इसे लागू नहीं करेगा.





