‘मद्रास कैफे’ जरूर देखें, जैसा दिमाग होगा आपका, वैसा रिसीव कर पाएंगे

Yashwant Singh : ''मद्रास कैफे'' जरूर देखें. जिसका बौद्धिक स्तर जितना होगा, उसी स्तर पर वह इस फिल्म से कोई न कोई नतीजा निकाल लेगा… मैंने इस फिल्म से पहले से निकले एक नतीजे पर मुहर लगता पाया कि मनुष्य बहुत हरामी चीज है और इन हरामियों के बीच के महाहरामी ही देश दुनिया पर अब तक राज करते आये हैं, विकास विनाश करते आए हैं और यही महाहरामी प्राणी कम हरामी या आम हरामी के भाग्य को तय करते आए हैं…

नैतिकता, सदाचार, निष्ठा, संतोष… टाइप के शब्द महाहरामी लोग आम हरामी टाइप लोगों के लिए जबरन इजाद कर देते हैं ताकि आम हरामी टाइप लोग महा हरामी टाइप बनने की प्रक्रिया में न लग जाएं… यही कारण है कि आम हरामी लोग अक्सर विचित्र किस्म के अपरिभाषित और अव्यवहारिक शब्दों को लेकर हाय हाय करते रहते हैं…. मान गए, इस आदमी ने जान बूझ कर या अनजाने में ही दुनिया की सबसे बड़ी खोज करके रख दी है.. वो है किसी एक खास प्रजाति के इतने सारे लोगों को न्यूनत लड़ाई भिड़ाई के साथ पूरी धरती पर टिकाए बनाए रखना… 🙂 जय हो…

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

Vivek Kumar : 'Madras Cafe' is a story not a story of PM assassination,its about how greed of one person can lead to disaster .This was about 4th largest army in the world and one bala, but i can see a bala in every man…

विवेक कुमार के फेसबुक वॉल से.

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