मध्‍य प्रदेश एवं छत्‍तीसगढ़ में चैनलों के स्ट्रिंगरों की चांदी

मध्‍यप्रदेश में इन दिनों रीजनल टेलीविजन चैनल के स्ट्रिंगर्स की चांदी है.. एक-एक स्ट्रिंगर हाथ में दो-दो तीन-तीन चैनलों की माइक आईडी पकड़े घूम रहा है.. इसका कारण यह है कि हाल ही में तीन नए चैनल्‍स ने मप्र में दस्‍तक दी है.. इनमें जी चौबीस घंटे, पर्ल और आईबीसी 24 शामिल है.

मप्र में नंबर दो की पोजीशन पर बने रहते हुए अपने प्रतिस्‍पर्धियों को कड़ी चुनौती देने वाले बंसल न्‍यूज पर इन चैनलों की खास नजर रही..यही वजह है कि इन तीनों चैनल्‍स की पुरजोर कोशिश रही है कि बंसल न्‍यूज से बेहतर लोगों को प्रलोभन देकर जोड़ा जाए.

सिर्फ बंसल ही नहीं साधना और सहारा मप्र/छग के रिपोर्टर और स्ट्रिंगर्स पर भी नए चैनलों की नजर है.. सहारा के भोपाल ब्‍यूरो में पदस्‍थ वरिष्‍ठ संवाददाता आशुतोष नाडकर को आईबीसी 24 ने उनकी मौजूदा सेलरी से 20 हजार रुपए ज्‍यादा का ऑफर करते हुए बुलाया था.. लेकिन मानना पड़ेगा आशुतोष की संस्‍थान भक्ति को कि उन्‍होंने इसके बाद भी ऑफर ठुकरा दिया.. मप्र के कुछ बड़े जिलों के सहारा के स्ट्रिंगर्स पर भी आईबीसी 24 की नजर है.

दरअसल मप्र में आईबीसी 24 नंबर वन का तगड़ा दावेदार है.. इस वजह से वह धीरे-धीरे ही सही लेकिन एक लंबी रणनीति बना कर उस पर काम कर रहा है.. इस रणनीति का एक अहम हिस्‍सा है सहारा के बड़े जिलों में तैनात रिपोर्टर और स्ट्रिंगर्स को अपने नेटवर्क का हिस्‍सा बनाना.. यह सिलसिला यही नहीं थमने वाला है.. आने वाले दो तीन महीनों में कम से कम चार और नए रीजनल चैनल मप्र/छग में आमद दर्ज कराने वाले हैं.. यानी टीवी पत्रकारों और स्ट्रिंगर्स को ढेर सारे अवसर मिलने वाले हैं.. लेकिन यह समय सोच समझ कर फैसले लेने का भी है.. चुनाव के बाद कितने चैनल मैदान में बने रहेंगे और जो बड़े चैनल हैं वह कास्‍ट कटिंग के नाम पर कितनों पर गाज गिराएंगे यह कहना मुश्किल है.. इसलिए बेहतरी इसी में है कि पत्रकार सोच समझ कर फैसलें करें.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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