मनमोहन बोले- अंधेरे में तीर चलाते हैं मीडिया वाले

आजकल मनमोहन का बोलना भी न्यूज है. ऐसा इसलिए क्योंकि वो अक्सर बोलते ही नहीं. अब उन्होंने बोला है तो न्यूज तो बनती ही है. और, उन्होंने मीडिया पर बोला है तो पठनीय न्यूज है, भले ही इसे मीडिया वाले प्रमुखता से न छापें क्योंकि मीडिया वालों को अपनी खुद की आलोचना सहने सुनने की आदत नहीं है. सोशल मीडिया के अविवेकपूर्ण इस्तेमाल पर सावधान करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि छानबीन करना मीडिया का स्वभाव है लेकिन उसे आरोपों के जाल में नहीं फंसना चाहिए. उन्होंने कहा कि अंधेरे में तीर चलाना खोजी पत्रकारिता का विकल्प नहीं है.

राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र के उद्घाटन के मौके पर सिंह के साथ मौजूद संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मीडिया कभी कभी राजनीतिक व्यवस्था को असहज बना देता है. सिंह ने कहा कि मीडिया केवल कारोबारी गतिविधि का आईना नहीं है बल्कि यह पूरे समाज का प्रतिबिम्ब है. उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार और उदारीकरण से आये सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया की तरह मीडिया भी इन बदलावों से प्रभावित हुआ है. बदलाव के परिणामस्वरूप निस्संदेह चुनौती आती है. दो दशकों से आये सामाजिक-आर्थिक बदलावों से उत्पन्न चुनौतियों तक पहुंच बनाने, उनसे निपटने और उबरने की मीडिया उद्योग से जुडे लोगों की विशेष जिम्मेदारी है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतत: विश्वसनीयता ही मीडिया की पूंजी है और यही पाठक या दर्शक के साथ अभिन्न रूप से जुडा हुआ है. सामाजिक सदभाव और लोक व्यवस्था का सवाल इससे जुडा हुआ है. सोशल मीडिया के बारे में उन्होंने कहा, मैं सोशल मीडिया क्रान्ति के संदर्भ में इस बात पर विशेष रूप से बल देना चाहता हूं क्योंकि इस मीडिया ने आम नागरिक और पेशेवर पत्रकार के बीच का अंतर एक तरह से समाप्त कर दिया है.  उन्होंने कहा कि यदि हम पिछले वर्ष हुई उस त्रासदी से बचना चाहते हैं, जिसमें आनलाइन दुष्प्रचार के चलते अनेक निर्दोष लोगों को अपने जीवन के प्रति आशंकित होकर गृह प्रांतों को लौटना पडा था तो यह जरूरी है कि हम इस धारणा से परिपक्वता और बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से निपटें.

सिंह ने कहा कि यह वास्तविकता है कि पत्रकारिता को उसके काम से अलग नहीं किया जा सकता. किसी भी मीडिया संगठन का दायित्व सिर्फ उसके पाठकों और दर्शकों तक सीमित नहीं है, कंपनियों का दायित्व अपने निवेशकों और शेयरधारकों के प्रति भी होता है. उन्होंने कहा कि बाटम लाइन और हेडलाइन के बीच खींचतान उनके लिए जीवन की सच्चाई है किन्तु इसकी परिणति ऐसी स्थिति में नहीं होनी चाहिए कि मीडिया संगठन अपने प्राथमिक लक्ष्य को भूल जाए, जो समाज को दर्पण दिखाने का है तथा सुधार लाने में मदद करने का है. सोनिया ने कहा कि मीडिया का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होता है और इसी से जिम्मेदारी ज्यादा बढ जाती है.

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