मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शलभ भदौरिया के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश

भोपाल। आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शलभ भदौरिया के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है। उनके खिलाफ डाक शुल्क में छूट पाने के लिए एक पत्रिका का रजिस्ट्रेशन नंबर इस्तेमाल करके शासन को करीब दो लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में केस दर्ज किया गया था. बीस साल पहले शलभ भदौरिया और विष्णु विद्रोही ने म.प्र. श्रमजीवी पत्रकार संघ का पंजीयन कराया था जिसमें डाक शुल्क देने से बचने के लिए उन्होंने दूसरी पत्रिका के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया था. बाद में शिकायत मिलने पर जांच की गई जिसमें ब्यूरों ने आरोपों को सही पाया था.
 
राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो ने भोपाल में 23-02-2013 को प्रकरण क्रमांक 05/06 के तहत ये मामला दर्ज हुआ था. प्रकरण को गुलाबसिंह राजपूत थाना प्रभारी राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो भोपाल ने दर्ज कराया तथा शलभ भदौरिया और विष्णु वर्मा विद्रोही को आरोपी बनाया गया. इसकी विवेचना पुलिस अधीक्षक सुधीर लाड़, ब्यूरो इकाई भोपाल ने 30-10-2007 को पूरी की. जांच में श्रमजीवी पत्रकार मासिक पत्रिका के आरएनआई प्रमाण पत्र क्र. 3276/72 को तेलगू की पाक्षिक पत्रिका राजमुन्दरी का पाया गया था.
 
इस फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर शलभ भदौरिया एवं स्व. विष्णु वर्मा विद्रोही ने पत्रिका का डाक पंजीयन कराकर जनवरी 2003 से अगस्त 2003 तक 34,755 रु. का अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त किया, बुक पोस्ट की दरों में वृद्धि के कारण ये राशि बढ़कर 1,40,625 हो गई. ब्यूरो ने प्रथम दृष्टया इसे अपराध मानते हुए भादवि की धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 के अन्तर्गत मामला दर्ज किया. जब्त किये गये दस्तावेज तथा शलभ भदौरिया और विष्णु वर्मा द्वारा दी गई सूचनाओं और गवाहों के बयानों से इसे सही पाया गया.
 
जनसम्पर्क विभाग की सख्ती दिखाते हुए समस्त समाचार पत्र को विज्ञापन नीति के अनुपालन के लिये आर.एन.आई. प्रमाण पत्र मांगे तब श्रमजीवी पत्रकार मासिक पत्र के प्रमाण पत्र की प्रति विष्णु वर्मा द्वारा दी गई. 15 मई 2005 को जांच में पाया गया कि वर्ष 1999 से 2003 तक शलभ भदौरिया श्रमजीवी पत्रकार समाचार पत्र के प्रधान संपादक के पद पर थे. शलभ भदौरिया द्वारा ही कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी भोपाल, प्रवर अधीक्षक डाक घर भोपाल में भी हस्ताक्षरित दस्तावेज प्रस्तुत किये गए. इस तरह फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया साथ धोखाधड़ी कर शासन को 1,74970 रूपये का नुकसान पहुंचाया गया. मामला सम्पूर्ण दस्तावेजों एवं जांच रिपोर्ट के साथ तत्कालीन भोपाल पुलिस अधीक्षक (ईओडब्ल्यू) के द्वारा महानिदेशक आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को वर्ष 2007 में भेजा जा चुका है जिसे माननीय न्यायायिक दण्डाधिकारी महोदय जिला भोपाल को प्रस्तुत किया गया है.

 

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