ममता सरकार के तुगलकी फरमान के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

कोलकाता। सरकारी पुस्तकालयों में चुनिंदा समाचार पत्र रखने का मामला राजनीतिक तौर पर तूल पकड़ लिया है, वहीं इस मामले को कलकत्ता हाई कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। गुरुवार को हाई कोर्ट में अधिवक्ता वासवी रायचौधरी ने पीआईएल (जनहित याचिका) दायर करके सरकार के फैसले को अनैतिक और द्वेषपूर्ण बताया है तथा कोर्ट से इसे खारिज करने की मांग की है। संभावना है कि कोर्ट जल्‍द ही इस याचिका पर सुनवाई कर सकती है।

रायचौधरी ने अपनी याचिका में राज्य सरकार के पुस्तकालयों में सिर्फ सरकारी पसंद के अखबार मंगाए जाने के निर्णय को संविधान विरोध तथा आम लोगों के हक के खिलाफ बताया है। उन्‍होंने कहा है कि सरकार के इस कदम से संविधान में उल्लेखित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार कमजोर होगा तथा पेड न्यूज की शिकायतें बढ़ेंगी। याचिका में यह भी बताया गया है कि सरकारी पुस्‍कालयों में जिन अखबारों को मंगाने का निर्णय सरकार ने लिया है, उनमें से कई के मालिक सत्‍ता पक्ष के करीबी हैं तथा कई राज्‍य सभा में पार्टी से सांसद भी हैं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार के जनसूचना विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में पुस्तकालयों को मात्र आठ अखबार ही खरीदने का आदेश दिया था, जिसका जमकर विरोध हुआ। विरोध को देखते हुए पांच और अखबार सरकार ने बढ़ाए हैं, लेकिन प्रसार वाले अखबारों को इससे अब भी बाहर रखा गया है। वहीं ममता बनर्जी का कहना है कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ साजिश करके उसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। विधानसभा में भी इस मामले को लेकर वाम मोर्चा तथा कांग्रेस मुखर हैं।

 

 

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