मल्टीमीडिया एवं प्रिंटिंग में किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी है व्यवहारिक ज्ञान

भोपाल । प्रिंटिंग इंडस्ट्री में आ रहे नित नए परिवर्तनों को देखते हुए इस क्षेत्र में किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी व्यवहारिक ज्ञान है। भारत में प्रिंटिंग तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है जहां रोजगार की संभावनाएं अधिक है। यह बात राष्ट्रीय शिक्षक ट्रेनिंग सेंटर के प्रशिक्षक डॉ. डी. नायर ने कही। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में शिक्षण के क्षेत्र में कार्य कर चुके डॉ. नायर माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में निःशुल्क कैरियर काउंसलिंग के अंतिम दिन छात्रों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने इस क्षेत्र में आने वाले छात्रों को प्रिंटिंग, पैकेजिंग के क्षेत्र में रोजगार के कई विकल्पों को बताया। नायर ने कहा कि प्रिंटिंग के साथ कम्यूटर तकनीक का ज्ञान रोजगार के कई अवसर प्रदान करता है और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर प्रिंटिंग कन्सलटेंट का काम भी किया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित दूसरे विशेषज्ञ क्रिस्प इंडिया संस्थान में एनिमेशन विभाग के विभागाध्यक्ष श्री कुंजेश श्रीवास्तव ने छात्रों के मल्टीमीडिया, एनीमेशन इत्यादि क्षेत्र में कैरियर की संभावनाओं को बताया। उन्होंने कहा कि मल्टीमीडिया एवं एनीमेशन के क्षेत्र में रचनात्मकता एवं व्यवहारिक ज्ञान जरूरी है। कैरियर काउंसलिंग के अंतिम दिन छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से कई सवाल भी किए।

निःशुल्क कैरियर काउंसिलिंग के पहले दिन ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन, लुधियाना के जनरल सेक्रेट्री श्री कमल चोपड़ा, गुरु जम्बेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार के एसोसिएट प्रोफेसर श्री अम्बरीश पांडे, के साथ हार्पर कॉलिन्स इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली के डी.सी.एम. श्री अमित शर्मा ने छात्र-छात्राओं को इस क्षेत्र में कैरियर की संभावनाओं से अवगत कराया।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के न्यू मीडिया एवं प्रौद्योगिकी विभाग में प्रिंटिंग, पैकेजिंग, ग्रपिक्स एव एनिमेशन विषयों पर संचालित 3 साल के बी.एस.सी और 4 साल के बी.टेक. पाठ्यक्रम में काउंसिलिंग के माध्यम से सीधे प्रवेश दिया गया। यह काउंसिलिंग 15 जुलाई को भी बची हुई कुछ खाली सीटों के लिए प्रवेश की प्रकिया चलेगी।

प्रेस विज्ञप्ति

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