मशहूर गीतकार सुरेन्द्र नाथ ‘नूतन’का निधन

 

इलाहाबाद। मशहूर गीतकार सुरेंद्र नाथ‘नूतन’का शनिवार की सुबह निधन हो गया। सन 1930 में इलाहाबाद के फूलपुर कस्बे के एक कायस्थ परिवार में जन्मे श्री नूतन ने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हासिल की और हिन्दी साहित्य सम्मेलन से ‘साहित्य रत्न’की भी उपाधि अर्जित की। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वालीबॉल कैप्टन बने और कालान्तर में प्रदेश और देश का भी प्रतिनिधित्व किया। 
 
1962 में इनका काव्य संग्रह ‘मधूलिका’प्रकाशित हुआ। अमेरिका निवास के दौरान उन्होंने खंड काव्य ‘वीरांगना झलकारी’लिखा, वर्ष 2000 में काव्य संग्रह ‘तैरते दीप’,2003 में खंड काव्य ‘वीर मंगल पांडेय’2005 में मुक्तक संग्रह ‘मोगरे के फूल’,2007 में गीत संग्रह ‘पंख खोलते गीत’और 2010 में उनका समग्र साहित्य ‘चलती है पीछे-पीछे परछाईं मेरी’प्रकाशित हुआ। साहित्यि पत्रिका ‘गुफ्तगू’का अक्तूबर-दिसंबर-2011 अंक श्री सुरेन्द्र नाथ ‘नूतन’विशेशांक रूप में प्रकाशित हुआ है। खंड काव्य ‘वीर मंगल पांडेय’इंदौर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी कई वर्षों तक शामिल रहा। 
 
श्री नूतन कवि सम्मेलनों में भी कवि लोकप्रिय रहे, उन्हें लालकिले से भी काव्य पाठ करने का गौरव हासिल था। लगभग बीस दिन पहले ही उनकी पत्नी श्रीमती कुसुम श्रीवास्तव का भी निधन हुआ है, श्रीमती कुसुम भी एक कवयित्री थीं। श्री नूतन के दो पुत्र और एक पुत्री है, एक पुत्र अमेरिका और दूसरा दिल्ली में रहता है। ‘गुफ्तगू’ के मुख्य संरक्षक इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, संपादक नाज़िया ग़ाज़ी, जय कृश्ण राय तुशार, वीनस केसरी, डा. सूर्या बाली, यश मालवीय, सुधांशु उपाध्याय, तलब जौनपुरी, एहतराम इस्लाम, अजय कुमार पांडेय साहित तमाम साहित्यकारों और समाजसेवियों इनके निधन पर गहरा दुख जाहिर किया है।

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