महिला आईपीएस का थप्पड़ और सरेआम इज्जत उतारने वाली व्यवस्था

सवाल थप्पड़ का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें एक संभ्रांत महिला या पुरूष की सरेआम इज्जत उतार ली जाती है. वैसे ये काम अपराधी और असामाजिक तबका तो गाहे-ब-गाहे करता ही रहता है लेकिन कानून व्यवस्था की लगाम जिन हाथों में हो वही बहक जाए तो फिर आम जनता क्या करे? जी हां आप ठीक समझ रहे हैं, यहां बात हो रही है पटना के सिटी एसपी किम की. इस नौजवान महिला एसपी ने पटना के कंकड़बाग की एक महिला को जो थप्पड़ जड़ा उसने इन दिनों बिहार का सियासी माहौल गर्मा दिया है.

विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया है और विधान सभा में इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन हो रहा है. कोई सिटी एसपी के निलंबन की मांग कर रहा है तो कोई उन्हें बर्खास्त करने की. हां इस बीच कुछ ऐसी भी बातें हुई है जो लीक से हटकर है. सबसे अहम बात ये हुई है कि सत्ता संभालने के बाद पुलिसिया ज्यादती की किसी घटना को लेकर पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री ने सदन में माफी मांगी.

माफी की इस अपील के साथ ही लोगों के जेहन में ये सवाल उठ रहा है कि पुलिसिया ज्यादती की कई घटनाएं सूबे में हुईं जो इससे कहीं ज्यादा संगीन थीं लेकिन तब तो मुख्यमंत्री ने माफी नहीं मांगी, फिर इस बार ऐसा क्या हुआ जो वो हाथ जोड़ रहे हैं? लोगों को फारबिसगंज में पुलिस की गोली से एक बच्चे सहित चार लोगों के मारे जाने की घटना याद है. बिहार के कई जिलों में पुलिस कस्टडी में हुई मौतों की घटना भी याद है.

नालंदा में पुलिस वालों ने आम लोगों को किस तरह दौड़ा-दौड़ा कर पीटा ये भी याद है. इसके साथ ही पुलिस के और भी कई कारनामे याद है जिसने प्रशासन औऱ सरकार को कटघरे में खड़ा किया लेकिन किसी भी मामले में नीतीश कुमार ने माफी नहीं मांगी. हर बार बस यही कहा कि कानून अपना काम करेगा. ये पहली बार है कि पुलिस के जनविरोधी रवैये के आरोप पर नीतीश कुमार ने जांच की बात के साथ माफी मांगी है. बहरहाल नीतीश कुमार क्यों मांफी मांग रहे हैं इसकी जांच का जिम्मा हम आप पर छोड़ते हैं और आपको बताते हैं वो दूसरी बात जो लंबे अरसे बाद हुई है.

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की नीतीश कुमार की मांग में सुर मिलाने के बाद ये पहला मौका है जब किसी मसले पर बड़े भाई ने छोटे भाई की लाइन ली है. बिहार में विपक्ष का अकेला चेहरा लालू यादव ने भी कहा है कि किम को माफ कर देना चाहिए. लालू महिला एसपी के कम अनुभव का हवाला देते हैं. हां उनका ये कहना जरूर है कि सिटी एसपी को माफी मांगनी चाहिए.

अब सवाल है कि छोटे भाई और बड़े भाई दोनों की अपील के बाद क्या बिहार की जनता पटना की सिटी एसपी को माफ कर देगी? कायदा ये कहता है कि अगर गलती हुई है तो उसकी सजा मिलनी चाहिए फिर चाहे वो कोई भी हो (जैसा कि नीतीश कहते आए है) लेकिन मुख्यमंत्री ही माफ करने की अपील करें तो फिर क्या कायदा और क्या कानून!  वैसे हम ये सवाल अपने सुधी पाठकों पर छोड़ते हैं कि वो पुलिसिया ज्यादती को माफ करती है या नहीं.

लेखक श्याम किशोर का यह लिखा राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित हो चुका है.

आईपीएस किम और उनके चांटे के बारे में ज्यादा जानने व तस्वीरें देखने के लिए यहां क्लिक करें… http://www.bhadas4media.com/article-comment/2790-2012-02-24-17-52-58.html

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