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महिला पुलिस कमिश्नर की डांस करते हुए फोटो छापने पर दिव्य भास्कर के संपादक समेत तीन गिरफ्तार

भास्कर समूह के गुजराती दैनिक अखबार दिव्य भास्कर के राजकोट संस्करण के कार्यकारी संपादक काना बंटवा, संवाददाता अनिरुद्ध निकम और फोटोग्राफर प्रकाश रवरानी की राजकोट पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि इन लोगों ने महिला पुलिस कमिश्नर की डांस करते हुए फोटो अखबार में छाप दी थी. बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव एवं भारतीय प्रेस परिषद सदस्य अरुण कुमार ने गुजरात पुलिस द्वारा इन पत्रकारों को गिरफ़्तार किए जाने की भर्त्सना की है. कुमार ने इसे पत्रकारिता की आज़ादी पर एक गंभीर आघात बताया है.

भास्कर समूह के गुजराती दैनिक अखबार दिव्य भास्कर के राजकोट संस्करण के कार्यकारी संपादक काना बंटवा, संवाददाता अनिरुद्ध निकम और फोटोग्राफर प्रकाश रवरानी की राजकोट पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि इन लोगों ने महिला पुलिस कमिश्नर की डांस करते हुए फोटो अखबार में छाप दी थी. बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव एवं भारतीय प्रेस परिषद सदस्य अरुण कुमार ने गुजरात पुलिस द्वारा इन पत्रकारों को गिरफ़्तार किए जाने की भर्त्सना की है. कुमार ने इसे पत्रकारिता की आज़ादी पर एक गंभीर आघात बताया है.

सूत्रों के मुताबिक दिव्य भास्कर के पत्रकारों ने राजकोट सिटी के पुलिस कमिश्नर गीता जोहरी की नए साल के एक ज़श्न की पार्टी की तस्वीर छाप दी थी. नए साल की पार्टी राजकोट के किसी प्राइवेट रिजोर्ट में आयोजित की गई थी. इस पार्टी में महिला पुलिस कमिश्नर ने डांस किया था. फोटोग्राफर ने तस्वीर खींच ली. इस पार्टी की कई तस्वीरों के साथ महिला पुलिस कमिश्नर के डांस की तस्वीर भी दिव्य भास्कर अख़बार के राजकोट एडिशन में प्रकाशित कर दी गई.

मोहतरमा जोहरी खुद को डांस करते हुए अपनी फोटो देख गुस्सा गईं. इस सिलसिले में उन्होंने राजकोट पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. चूंकि वे खुद राजकोट पुलिस की मुखिया हैं इसलिए पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई. इसी सिलसिले में पुलिस ने ये गिरफ्तारियां कीं. गिरफ़्तारी के बाद इन्हें सेसन कोर्ट में पेश किया गया जहां से इन्हें मुक्त करने के आदेश दिए गए लेकिन पुलिस ने फिर भी इन्हें रिहा नहीं किया. राजकोट पुलिस ने कोर्ट के आदेशों की भी कोई परवाह नहीं की. यह वस्तुतः कोर्ट की अवमानना के साथ ही साथ जनतंत्र और पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक गंभीर हमला है.

बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव एवं भारतीय प्रेस परिषद सदस्य अरुण कुमार का कहना है कि इस घटनाक्रम का हरेक जनतांत्रिक व्यक्तियों, संस्थाओं और निकायों द्वारा गंभीर रूप से विरोध किया जाना चाहिए. भारतीय प्रेस परिषद को भी इस दिशा में सोचने की जरूरत है. ऐसे मामलों में जिनमें कोर्ट तक बात पहुँच गयी है मगर वे मामले प्रेस और अभिव्यक्ति की आज़ादी से सीधे जुड़े हैं, उनमें किस प्रकार हस्तक्षेप किया जा सकता है. 

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