महुआ न्‍यूज में खेला गया इंक्रीमेंट का खेल!

महुआ न्‍यूज के कर्मचारियों को इंक्रीमेंट के नाम की गोली दी गई है. संस्‍थान के कर्मचारियों के साथ महुआ न्‍यूज प्रबंधन ने इंक्रीमेंट नाम का खेल खेला है. इस खेल ने महुआ के बंधुआ कर्मचारियों की ऐसी की तैसी कर रखी है. आइए आपको भी बताते हैं कि इंक्रीमेंट का यह खेल संस्‍थान में कैसे खेला जाता है. 

जनवरी-2013 में सबको मेल आता हैं.. इस मई में सबका इन्क्रीमेंट हो रहा है.. अप्रैल में सैलरी बढ़ जाएगी. और सारे कर्मचारियों का धन्यवाद देते हुए यह भी लिखा जाता है कि उन्होंने महुआ न्यूज़ के बुरे समय में साथ नहीं छोड़ा.. और अब महुआ न्यूज़ ने बुरा वक्त पीछे छोड़ दिया है. यह शायद इसलिए किया गया कि ग्रुप एडिटर राणा यशवंत महुआ छोड़कर जा रहे थे और कंपनी को शक था कि उनके जाने के बाद कंपनी के कुछ कर्मचारी संस्‍थान छोड़ सकते हैं.

इस मेल के बाद महुआ के पुराने लोगों में उम्‍मीद जगी कि देर से ही सही पर कंपनी कुछ तो उनके बारे में सोच रही है. उनके काम का पुरस्‍कार तो देने जा रही है. फिर अप्रैल आते-आते अफवाहें उड़ने लगी कि इंक्रीमेंट नहीं हो रहा है, लेकिन फिर भी कर्मचारियों को आस थी कि ऐसा नहीं हो सकता है. कंपनी के प्रबंधन ने कहा है तो झूठ थोड़े ही होगा. आखिरकार अप्रैल के बाद मई आ गया. सैलरी बढ़नी तो दूर कुछ कर्मचारियों की सैलरी तक अभी नहीं आई है.

अब कर्मचारी क्‍या करे, नौकरी छोड़ता है तो घर का किराया कहां से दे, बच्‍चे के लिए दूध कहां से लाए. घर के लिए सब्‍जी और राशन किससे मांगे. बस जैसे तैसे मजबूरी में कर्मचारी महुआ न्‍यूज में नौकरी कर रहे हैं. और रोज अपने आप को और भगवान को कोस रहे हैं. और हां, महुआ न्‍यूज एक ऐसा चैनल है जहां जवाबदेही बस कर्मचारी की होती है. वो भी छोटे कर्मचारियों की. बड़े अधिकारियों को बस ज्ञान बांटना आता है. वो कहते हैं कि खुश रहना है तो अपने से नीचे लोगों को देखो, हम नहीं बदलेंगे.

एक और खबर है कि जब सैलरी नहीं आती तो मेडिटेशन वालों को बुलाया जाता है, वो बताते हैं कि जब सैलरी न आए तो कैसे अपने को शांत रखें, शांत रखने के लिए कौन सा एक्‍यूप्रेशर प्‍वाइंट दबाएं.. है ना मजेदार बात. बस बंधुआ मजदूर का चेहरा बदल गया है. आज का मजदूर एसी में बैठता है. है न चटपटी खबर. इसे कहते हैं इंक्रीमेंट का खेल.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित!

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