मानसिक उत्पीड़न का शिकार एक यशस्वी गीतकार

Aalok Shrivastav : देश के यशस्वी गीतकार भाई यश मालवीय के प्रकरण में ताज़ा ख़बर यह है कि उन्हें भारी डिमोशन देने के बाद भी प्रशासन का पेट नहीं भरा. निलम्बन वापस होने के बाद से यश मालवीय को एक भी पैसे तनख़्वाह के नहीं दिए गए हैं. उनका उपचार प्रमाण-पत्र व कम्युटेड लीव का आवदेन भी समय से कार्यालय पहुंचा दिया गया था. प्रशासन ख़ुद मेडिकल बोर्ड लगा कर यश मालवीय की जांच करा चुका है. बावजूद इसके उनकी मानसिक प्रताड़ना पर कोई अंकुश नहीं लग रहा है.

वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. लाल बहादुर वर्मा का कहना है कि – ''अगर प्रशासन के हिसाब से यश मालवीय को अपराधी मान भी लिया जाए कि उन्होंने ज़ुबान खोलने का ज़ुल्म किया तो अब उसके बाद कौन-सा नया अपराध कर दिया कि उनका वेतन ही रोक लिया गया है.''

एक व्यक्ति के अपराध की कितनी सजाएं हो सकती हैं, इस संदर्भ में क़ानून की किताब पलटने पर पता चलता है कि कम्युटेड लीव पर रह रहे कर्मचारी का वेतन जारी करना, या न करना दोनों ही सक्षम अधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है. ऐसे हालात में फिर यह सवाल उठता है कि यह कैसा विवेक है जो कर्मचारी के मानसिक उत्पीड़न की ही पीठिका रच रहा है. हालांकि अस्वस्थ होने के बावजूद यश का हौसला पस्त नहीं हुआ है वे आज भी रच रहे हैं –

कवि निलम्बित नहीं होता
आसमां तो आसमां है
कभी सीमित नहीं होता
कवि निलम्बित नहीं होता

नौकरी बस करे मन की
मत समझना उसे सनकी
गूंज उसके कंठ में है
आम-जन वाले भजन की
कवि निलम्बित नहीं होता
राग है ऐसा कभी भी
ध्रुत-विलम्बित नहीं होता

सिर्फ़ मनसब-दारियां क्या
रोज़ की दुश्वारियां क्या
एक अफ़सर है ख़ुदा ही
ढ़ेर-सी लाचारियां क्या
कवि निलम्बित नहीं होता
एक दरिया आग का है
अश्रुपुरीत नहीं होता

साथियों की सोच में है
मत कहो संकोच में है
ज़िंदगी के हाथ वाली
पांव वाली मोच में है
कवि निलम्बित नहीं होता
रूह का गहरा पुजारी
व्यक्तिशासित नहीं होता
कवि निलम्बित नहीं होता.

गज़लकार और शायर आलोक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.


इसे भी पढ़ सकते हैं- वरिष्ठ कवि यश मालवीय का उत्पीड़न बंद किया जाए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *