मानसूनी बयार में विनोद दुआ को कौन सा जख्म उभर आया है

Abhishek Srivastava : जब हवा तेज़ चलती है तो टोपी सिर्फ गणपतराव की नहीं हिलती, उसके गुर्गों के अंतर्विरोध भी तीखे हो जाते हैं। ''जनवाणी'' के दौर के कुछ पुराने रिटायर हो चुके लोग बताते हैं कि कैसे उस ज़माने में दूरदर्शन के टपाए टेपों से इन लोगों ने अपना साम्राज्‍य खड़ा किया था। उस दौर के करीब दर्जन भर काबिल टीवी चेहरों को इस दुई (प्रणय राय और विनोद दुआ) ने ऐसा दरकिनार किया कि उनमें से एक एंकर तो आज तक सदमे से नहीं उबर पाए हैं।

वे दिल्‍ली में एक मामूली सा स्‍टूडियो च‍लाते हैं और मेट्रो रेल में उद्घोषणाएं कर के दिन भर टुल्‍ल रहते हैं। कोई पिछले बीस साल से अनुवाद कर के पेट भर रहा है तो कोई कॉलेजों में पढ़ा कर। उसके उलट बरसों से ''देश के लिए खाते-खाते'' अचानक मानसूनी बयार में जाने कौन सा ज़ख्‍म उभर आया है इनका। दर्द देखिए, दर्द की टाइमिंग देखिए…! बात करते हैं करियर की…!

पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.


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