माफ कीजिए, मुझे शंकराचार्य पर तरस आ रहा है…

Daya Sagar : प्रश्न ये नहीं है कि एक पत्रकार को एक संत से मोदी पर सवाल पूछना चाहिए था या नहीं? असल प्रश्न ये है कि एक वयोवृद्ध शंकराचार्य अपने क्रोध पर काबू क्यों नहीं रख पाया। माफ कीजिए मुझे शंकराचार्य पर तरस आ रहा है? उन्हें अभी और साधना और तपस्या की जरूरत है। (अमर उजाला अखबार में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर के फेसबुक वॉल से.)

Virendra Yadav : जब गोरखपुर में योगी के सानिद्ध्य में मोदी छप्पन इंच का सीना दिखा रहे थे उसी समय जबलपुर में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द मोदी के सवाल पर इतना कुपित हुए कि जिज्ञासु पत्रकार को अपने गाल सहलाने पड़े .धर्मगुरु का यह कोप लालकिले के दावेदार के लिए अच्छी खबर भले न हो लेकिन इसे हिन्दू धर्म की बहुलता के पक्ष में एक सशक्त बयान के तरह भी पढ़ा जा सकता है . …..छप्पन इंच ,गाल पर चाटा, मीडिया से बचते केजरीवाल ..दृश्य जितना दिलचस्प है उतना ही चिंताजनक ! (लखनऊ के जाने माने आलोचक और साहित्यकार वीरेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से)

Vimal Kumar Mishra : पत्रकार पर तीरंदाजी दिखाकर क्या साबित करते हैं ? ये गाली देनेवाले, धक्के मारनेवाले और थप्पड़ मारने वाले क्या किसी बेईमान अमीर को थप्पड़ लगा सकते हैं कि तेरी दौलत पाप की है, क्या किसी भ्रष्ट नेता को धक्के दे सकते हैं कि तूने देश बेच दिया भाग जा यहाँ से । फिर आप किसी मीडिया वाले पर हाथ कैसे उठा देते हो ? हाथों में कलम अथवा माइक थामे व्यक्ति से किसको खतरा हो सकता है ? ये जरूरी भी तो नहीं कि वो सवाल भी आपकी मर्जी का करे । (आगरा के टीवी जर्नलिस्ट विमल कुमार मिश्र के फेसबुक वॉल से.)

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