माया के दुलारे कांग्रेस को प्यारे

‘‘उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम के पूर्व एमडीसीपी सिंह ने उ.प्र. में हजारों करोड़ रुपये का गोलमाल किया। सूबे में सरकार बदलते ही निर्माण निगम के खिलाफ आधा दर्जन एफ.आई.आर. दर्ज करवा दी गयी और लखनऊ के एस.एस.पी. ने रीजनल पासपोर्ट आफीसर को उनका पासपोर्ट जब्त करने का आदेश कर दिया। सपा सरकार उनके विरूद्ध सीबीआई जांच की सोच ही रही थी कि उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने उन्हें अवस्थापना आयोग के सलाहकार के पद पर तैनात करके राज्समंत्री का दर्जा दिलवा दिया। उनके मीडिया मैनेजमेंट का कमाल ही था कि कहीं किसी चैनल या अखबार में एक भी खबर नहीं छपी। मगर वीकएंड टाइम्स ने अपने सात जुलाई के अंक के प्रथम पृष्ठ पर इस पूरे मामले की खबर छापकर सनसनी फैला दी। इस अखबार में छपी खबर के बाद तमाम चैनलों पर भी यह खबर आनी शुरू हो गयी। यह रही वीकएंड टाइम्स की सनसनीखेज रिर्पोट।’’

सी.पी. सिंह की नियुक्ति को लेकर मचा बवाल

दागियों को गले लगाने में कांग्रेस भाजपा से पीछे नहीं रहना चाहती। मायावती सरकार में हजारों करोड़ रुपये के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को यूपी भाजपा ने गले लगाया तो भला उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार कहां पीछे रहने वाली थी। यूपी निर्माण निगम के अरबपति विवादास्पद पूर्व प्रबन्ध निदेशक सीपी सिंह को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अवस्थापना विकास सलाहकार के पद पर तैनात करके उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। पुलिस से बचने के लिए ऐसे किसी भी पद पर तैनात होने को सीपी सिंह के गुर्गे सौ करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार थे। बताया जाता है कि राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के करीब आयी मायावती ने भी अपने इस दुलारे अफसर को उत्तराखंड में ताजपोशी के लिए खासी कोशिश की थी। यह कोशिश कामयाब भी हो गयी। यह बात दीगर है कि मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा अब इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में लग गयी है।

बीते पांच सालों में यूपी में दो नाम सबसे ज्यादा चमकदार थे। इसमें से एक नाम टी राम का था जबकि दूसरा नाम सीपी सिंह का था। टी राम लोक निर्माण विभाग के मुखिया थे। निर्माण कार्यों में लोक निर्माण विभाग सबसे बड़ा माना जाता है। मायावती के सत्ता संभालने से पहले निर्माण निगम एक छोटा सा विभाग था। बसपा सरकार में आने के बाद निर्माण निगम के प्रबन्ध निदेशक पद पर सीपी सिंह की तैनाती हुई। तैनाती होते ही सीपी सिंह ने अपने ऐसे हुनर दिखाना शुरू कर दिये कि मुख्यमंत्री मायावती उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गयीं। निर्माण निगम में हजारों करोड़ रुपये के कामों का अंबार लग गया। निर्माण निगम के मामूली कर्मचारी भी रातों-रात करोड़पति बन गये। सीपी सिंह की हैसियत का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय मायावती के घर जाने की हिम्मत बसपा के धुरंधरों की भी नहीं थी उसी समय सीपी सिंह बेधड़क मुख्यमंत्री निवास जाया करते थे।

सीपी सिंह का रूतबा इतना बढ़ गया था कि कई विधायक और बडे़ माफिया भी सार्वजनिक रूप से इस अदने से इंजीनियर का पैर छुआ करते थे। सीपी सिंह जिसके सिर पर हाथ रख देते थे वह रातों रात करोड़पति बन जाता था। बताया जाता है कि सीपी सिंह की हैसियत बीते पांच सालों में पांच हजार करोड़ से अधिक की हो गयी थी। निजी सुरक्षा गार्डों की टीम उनके साथ चला करती थी। यूं तो वैसे भी उनके विरुद्घ बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी, मगर कोई ऐसा करने की जुर्रत करता भी तो उसे शांत करने के कई नुस्खे सीपी सिंह के पास थे। इसमें पैसे के प्रलोभन से लेकर धमकाना तक सब शामिल था। यही कारण रहा कि सीपी सिंह का शासन निर्बाध रूप से चलता रहा। इस बीच सीपी सिंह का सेवाकाल भी समाप्त हो गया मगर इन्हें लगातार सेवा विस्तार दिया जाता रहा। इस दौर में लखनऊ ही नहीं पूरे प्रदेश के सभी बडे़ कामों का ठेका निर्माण निगम के पास रहता था और स्वाभाविक रूप से यह काम करने का जिम्मा उसी ठेकेदार का रहता था जिस पर सीपी सिंह मेहरबान होते थे।

सड़कों पर फटेहाल घूमने वाले लोग रातों-रात करोड़पति हो गये। लखनऊ के बहुचर्चित अंबेडकर पार्क का निर्माण हो या फिर कांशीराम स्मारक का। प्रदेश में अस्पताल बनने हों या जेल। माया का दुलारा यह अफसर ही तय करता था कि काम कौन और किस क्वालिटी का करेगा। जाहिर है जब लागत से सौ गुना अधिक दर पर इस्टीमेट बनेगा तो पैसा भी उसी गति से आयेगा। लखनऊ के अम्बेडकर पार्क और कांशीराम पार्क का निर्माण निगम की इसी धांधली का गवाह है कि जहां सात लाख का हाथी अड़तालीस लाख में खरीदा गया। यहां लाइटें ब्राजील से मंगवायी गयी। हकीकत यह थी कि इन लाइटों पर नाम सिर्फ ब्राजील का था बाकी सारा निर्माण भारत में ही हुआ था। मायावती के दोनों दुलारे जानते थे कि अगर सत्ता परिवर्तन हो गया तो उनकी मुसीबत हो जायेगी। लिहाजा दोनों अपना-अपना सुरक्षित ठिकाना ढूंढने में लगे थे। टी राम ने तो राजनीति की राह पकड़ी और बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंच गये। मगर सीपी सिंह को अपनी दौलत का बहुत गुरूर था। उन्हें लगता था कि पैसे के दम पर सब मैनेज किया जा सकता है।

मगर सूबे में अखिलेश सरकार के बनने के बाद निर्माण निगम के दिन खराब होने शुरू हुए। पुलिस ने निर्माण निगम में धांधली की आधी दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस को शक था कि निर्माण विभाग में धांधली की आधी दर्जन से अधिक एफआईआर की जांच में खुद के फंसने के डर से सीपी सिंह विदेश भाग सकते हैं। लखनऊ पुलिस ने रीजनल पासपोर्ट ऑफीसर को पत्र लिखकर सीपी सिंह का पासपोर्ट जब्त करने को कहा। समाजवादी पार्टी के नेता चाहते थे कि इस मामले की सीबीआई जांच करवा दी जाए जिससे सीपी सिंह के साथ-साथ बसपा को भी घेरा जा सके। सीपी सिंह जानते थे कि अगर इस मामले की सीबीआई जांच हो गई तो उन्हें जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता। लिहाजा उनके गुर्गे इस बात के लिए लग गये कि चाहे कितना भी पैसा खर्च हो जाये मगर सीपी सिंह को कांग्रेस का संरक्षण मिल जाये। सूत्रों का कहना है कि यूपी के एक बडे़ नेता को पचास करोड़ की रकम इस बाबत उपलब्ध भी करा दी गयी और शेष आधी रकम को मनचाही तैनाती या कांग्रेस में उचित स्थान पर मिलने के बाद देने का वायदा कर दिया गया।

यह कवायद रंग भी लायी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस दागी अफसर को उत्तराखंड में तैनात करने में तनिक भी देर नहीं लगाया। सीपी सिंह को अवस्थापना विकास सलाहकार के पद पर तैनात करके उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी दे दिया गया। सरकार जानती थी कि जो शख्स उत्तर प्रदेश में हजारों करोड़ कमा सकता है वो उत्तराखंड में भी कमाई के भरपूर साधन उपलब्ध करा सकता हैं। मगर सरकार को सपने में भी अनुमान नहीं था कि एक दागी अधिकारी की तैनाती तूफान खड़ा कर देगी। मुख्यमंत्री के खिलाफ सितारगंज से चुनाव लड़ रहे प्रकाश पंत ने कहा कि जिस तरह से भ्रष्टाचार के नये-नये हथकंडे अपनाकर विजय बहुगुणा ने अपनी सरकार बचायी है उसी तरह भ्रष्ट अधिकारियों को उत्तराखंड में तैनात करके वह भ्रष्टाचार के नये-नये रास्ते खोज रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विशन सिंह चौफाल ने कहा कि उत्तराखंड की सरकार भ्रष्टाचार की ही बुनियाद पर खड़ी है। अवस्थापना सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद पर इतने भ्रष्ट अधिकारी की तैनाती शर्मनाक है। हम इसके विरोध में सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेंगे। ऐसे किसी भी भ्रष्ट सलहाकार का हम हर स्तर पर विरोध करेंगे।

उधर, कांग्रेस में भी इस मुद्दे को लेकर कम खींचतान नहीं मची है। कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा विजय बहुगुणा का लगातार विरोध करता रहा है। यह धड़ा इस मुद्दे पर विजय बहुगुणा के खिलाफ पेशबंदी करने में जुट गया है। हालांकि यह लोग सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य से इस संबंध में पूछने पर उनके निवास से बताया गया कि वह कुछ समय बाद इस विषय पर बता देंगे। इसके बाद भी जवाब न मिलने पर जब उनके मोबाइल पर फोन किया गया तो उन्होंने एसएमएस करके कहा कि वह अभी व्यस्त हैं। थोड़ी देर में कॉल करेंगे मगर फिर उन्होंने फोन रिसीव करना ही बंद कर दिया। अलबत्ता उत्तराखंड की वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने इस पर मुखर होते हुए कहा कि किसी भी भ्रष्टाचारी व्यक्ति को उत्तराखंड में एक पल भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। अगर सीपी सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो गये तो उन्हें तत्काल हटा दिया जायेगा। मगर नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट इतने लंबे समय तक इंतजार करने के मूड में नहीं हैं।

श्री भट्ट का कहना है कि ऐसे व्यक्ति जिसके क्रियाकलापों पर उत्तर प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज हो। जिसका पासपोर्ट जब्त करने के लिए पुलिस ने पासपोर्ट अफसर को लिखा हो ऐसे भ्रष्ट छवि के व्यक्ति को देवभूमि उत्तराखंड में आश्रय देना

संजय शर्मा
पूरे राज्य के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सितारगंज चुनाव के बाद वह पौढ़ी कमिश्नरी और नैनीताल कमिश्नरी में धरना देंगे और जब तक इस पद से सीपी सिंह को हटाया नहीं जाता तब तक भाजपा व्यापक आंदोलन करेगी। इधर, उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे को लेकर कम गहमागहमी नहीं है। सीपी सिंह के गुर्गों ने लखनऊ पुलिस को मैनेज करने के लिए दिन-रात एक कर दिया है। राजनीतिक खेमों में भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गयी है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को संदिग्ध छवि के लोगों से बचना चाहिए और उन्हें सत्ता से दूर रखना चाहिए। अब पता नहीं यह बात विजय बहुगुणा को समझ आयेगी या नहीं!

लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. हिंदी वीकली न्यूजपेपर वीकएंड टाइम्स के संपादक हैं. यह लेख उनके अखबार में प्रकाशित हो चुका है.

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