मियाँ आप संपादक हैं कि शुतुरमुर्ग? आपकी जुबान अब तक न खुली छंटनी पर!

Samar Anarya : मियाँ आप संपादक हैं कि शुतुरमुर्ग? बोले तो आपकी जुबान अब तक न खुली है नेटवर्क 18 से एक झटके में 320 पत्रकारों की छुट्टी पर. मीडिया के अंडरवर्ल्ड पर चांदमारी आप ही करते थे न? माने उसी कारपोरेट मीडिया का .. छोड़िये, संपादक हो जाने के पहले. अभी आपको इतने पत्रकारों की नौकरी चला जाना एजेंडा ही नहीं लगता? सो साहब- खुशफहमियों के दिन भूल जाएँ आप. आप और आपके हनुमान कुमारों की सर्टिफिकेट बांटने वाली दुकान कब की बंद हो चुकी.

और हाँ, हमने जो लिखा नहीं लिखा, वह सब एक जगह इकठ्ठा है. शेयरियाये तो आप भी बहुत बार हैं. उसी में सब सवाल का जवाब है आपके 'संपादक' महोदय. बाकी आप अपने वाले का अभी तक नहीं दिए- अहसान जाफरी, खालिद मुजाहिद, इशरत जहाँ से लेकर तमाम बेगुनाह मुसलमानों की सरकारी हत्या और कैद के दौर में आपका सिद्धांत 'कम्युनलिज्म और सेकुलरिज्म की बहस अशराफ हिंदुओं और सवर्ण मुसलमानों का डिस्कोर्स है ' किसके साथ जाता है और क्यों जाता है सरोकारी साहब? फिर उस जाने का रास्ता मुलायम सिंह के आडवाणी की तारीफ के तुरंत बाद ही क्यों खुलता है? अब तिलमिलाइए मत साहिब.. जवाब हो तो दीजिये नहीं तो हमें तो पता चल ही रहा है.

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Samar Anarya : 320 पत्रकारों की एक साथ बर्खास्तगी पर संपादकों की चुप्पी पर गौर करियेगा। इसमें सब संपादक शामिल हैं। प्रतिबद्ध भी, आबद्ध भी, संबद्ध भी। कोई क्रांतिकारी, सामाजिक न्यायवादी, लोकतांत्रिक या किसी और क़िस्म का संपादक बोलता मिल जाय तो बताइयेगा। अब आप लेते रहिये उन्हीं से संघर्षदीक्षा.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय समर के फेसबुक वॉल से.

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