‘मिसाइल भंजक’ पाणिनी आनंद और ‘स्तन उघारू’ अमीना से क्या लें सबक?

Yashwant Singh : भारत के पत्रकार पाणिनी आनंद ने प्रेस क्लब आफ इंडिया में रखी ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिकृति को यह कहते हुए गिराकर ध्वस्त कर दिया कि यह जनता का नाश करने वाली मिसाइल है… उधर, ट्यूनिशिया में अमीना ने महिलाओं की आजादी के लिए खुद को टापलेस कर शरीर पर उर्दू अंग्रेजी में क्रांतिकारी स्लोगन लिखा और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया..

पाणिनी आनंद मिसाइल तोड़कर घर जाते वक्त बाइक एक्सीडेंट में अपना हाथ-पैर तुड़ा बैठे. अस्पताल में भर्ती हैं. उनके खिलाफ भगत सेना वाले दक्षिणपंथी संगठन ने मिसाइल की प्रतिकृति तोड़ने की रिपोर्ट दर्ज करा दी है. अमीना को पागलखाने भेज दिया गया है और उसके पक्ष व विपक्ष में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं…

दोनों ही मामले में दोनों लोग एक्स्ट्रीम यानि अति पर गए और चर्चा के केंद्र में आए… दोनों ही मामलों के मजबूत पक्ष व विपक्ष हैं… मैं सरोकार और चिंतन के हिसाब से तो दोनों साथियों पाणिनी और अमीना के पक्ष में हूं.. लेकिन तरीके के बारे में लगता है कि इससे चर्चा-कुचर्चा तुरंत व ढेर सारी पाई जा सकती है लेकिन जो मकसद है, वह नहीं पाया जा सकता… कई बार धीमी गति की आंच व आग ज्यादा गंभीर व देर तक असर करती है और कई बार तुरंत लगा दी गई आग अचानक भभक कर बुझ जाती है… सत्ता और पुरातन समाज ऐसे ही मौकों की तलाश में होता है जब आप छोटी सी गल्ती करें और आपकी गल्ती को यूं पेश किया जाए कि सारे क्रांतिकारी या वामपंथी या तरक्कीपसंद ऐसे ही होते हैं..

तोपों और मिसाइलों की प्रतिकृति नष्ट कर के जन को नहीं बचाया जा सकता साथी… ये करतब किसी एक शाम दारू के नशे में एक्सट्रीम एडवेंचर का तो फील दे सकता है लेकिन इससे आप उस उद्देश्य की तरफ कदम नहीं बढ़ा सकते जिस तरफ जाना आपका मकसद है. वीरेन डंगवाल ने इलाहाबाद के कंपनी बाग में तैनात तोप को नष्ट नहीं किया बल्कि उस पर एक कविता लिख दिया और उस कविता ने जाने कितने दिलों में तोपों व युद्धों के प्रति नफरत का भाव पैदा किया, साथ ही जन के प्रति आस्था और समर्पण का संदेश दिया. खुद नंगी होकर क्रांति का संदेश देने की जगह तस्लीमा नसरीन ने वैचारिक तरीके से लड़कर पूरी दुनिया के कठमुल्लों व सामंती सोच वाले पुरुषों को चुनौती दी है. वह दुनिया में महिला संघर्ष व महिला क्रांति की सशक्त प्रतीक हैं.. तो भाइयों और बहनों, अपने गुस्से और क्रांति को मुकाम दो, बुरा नाम मत दो… जय हो..

Vivek Singh : bilkul sahi bhaiya.. गुस्से और क्रांति को मुकाम दो, बुरा नाम मत दो..

Ankit Muttrija : आप की बात से पूरी तरह सहमत हूं सर.

आदेश शुक्ला : ब्रह्मोस मिसाइल देश की रक्षा के लिए है और अगर पाणिनि देश को नहीं मानते तो बिना पासपोर्ट चीन जाकर दिखाएँ ।यथार्थ भी कोई चीज है वह भी भारत जैसे देश के लिए जो इतने साल गुलाम रहा और खतरे में भी है पडोसी मुल्कों के

Madan Tiwary : दोनो ने सही किया । प्रेस क्लब मे मिसाईल की प्रतिकर्‍ति रखवाई किस जमूरे ने थी ? क्या वह हथियारो का म्यूजियम है ? अमीना ने जो किया वह एकदम सही है। धिरे धिरे बदलाव वाले तरीके का असर हमने देखा है , आजादी की जगह पे सता का परिवर्तन हुआ। अमीना ने आग हीं जलाई है , अब किसी को इसकी आंच ज्यादा लग जाये तो उसे दुर रहने मे हीं भलाई है।

Shravan Kumar Shukla : अगर आप पाणिनि के पक्ष में हैं तो मैं विल्कुल विपक्ष में! उन्हें कहिए की हे कामरेड. पहले रूस और चीन के घातक हथियारों नष्ट करो..! यहाँ अपना मुंह न मारें! मैं उनकी आलोचना शब्दों की हद तक करता हूँ..! थू है ऐसी कायराना हरकत पर.! दम है तो कुश वास्तविक करो. देश की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ का लाइसेंस किसने दिया है उन्हें? अपनी मैडम के साथ जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी उनकी वही राय होगी? अरुंधती के इस साथी को मेरी तरफ से प्रतीतात्मक जूते और घूंसे.. जय हिन्द.. कामरेड नहीं!

Madan Tiwary : @Shravan kumar shukla आपने भी इसके साथ कुछ गलत किया है क्या ? आपको क्यों मिर्ची लगी भाई ?

Yashwant Singh : Madan Tiwary जी के इस प्वाइंट से सहमत हूं कि मिसाइल की प्रतिकृति वार म्यूजियम में रखो, प्रेस क्लब में काहें. प्रेस क्लब में तो दुनिया की सबसे बड़ी कलम की स्थापना करा देनी चाहिए, मीडिया के प्रतीक के तौर पर. और, हम लोगों के लिए मिसाइल तोप से कम नहीं है कलम, बस इस्तेमाल करना आना चाहिए … फिर भी, मैं इस पक्ष में नहीं हूं कि रात में दारू के नशे में लात मार कर तोड़ दो… इसे तोड़ने के लिए बाकायदा घोषित तौर पर अभियान चलाना चाहिए और इसके लिए जन समर्थन व जन भागीदारी का रास्ता अपनाना चाहिए… छुटपुट अराजक प्रयोगों से क्रांतियां को तात्कालिक लाभ भले मिल जाए, पर दूरगामी परिणाम नुकसानदायक होता है…

आदेश शुक्ला : दारु के नशे में तोडा यह तो एक और खुलासा कर दिया आपने

Madan Tiwary : Yashwant Singh आपकी बात सही है कि नशे मे आकर के न तोडे , उसको तोडने को संघर्ष से जोडे , यह मैसेज जाना चाहिये कि आखिर क्यो तोडा जाये इस तरह की प्रतिकर्‍तियो को । लेकिन अमीना ने कोई क्रांति की बात तो की नही है मात्र अपना विरोध दर्ज कराया है , उसके तरीके पर आपति करने वाले हम कौन होते है ? उसने अपने वाल पे पोस्ट किया था कोई सडक पर तो घुम नही रही थी । अगर सडक पर भी घुमती तो गलत नही था, आस्था की नग्नता परेशान नही करती लेकिन विरोध की नग्नता को बर्दाश्त नही कर पाते लोग वाह क्या सोच है ।

Shravan Kumar Shukla : मैंने अमीना से नहीं बल्कि पाणिनि से अपना विरोध दर्ज कराया है.. अगर किसी को व्यक्तिगत हमले करने ही है तो मैं तैयार हूँ! बेहतर होगा, कोई किसी पर व्यक्तिगत हमले न करे !

Yashwant Singh : आदेश शुक्ला जी, प्रेस क्लब लोग रात में पूजा-अर्चना के लिए नहीं जाते, दारू पीने ही जाते हैं… यह सिंपल सी बात है. और, मजेदार यह है कि दारू के अड्डे पर मिसाइल गड़ी पड़ी है… क्या कंट्रास्ट है…

आदेश शुक्ला : अब पाणिनि को चाहिए जब ब्रह्मोस का परीक्षन हो तो उसे पकड़ ले । ….हा हा यह तो बात सही है की दारु पीने जाते हैं लेकिन उसके बाद ऐसे क़दम उठाएंगे ? वैसे आप भी सहमत नहीं हैं उनके इस क़दम से

Madan Tiwary : Yashwant Singh सर जी गनीमत है कि सचमुच की तोप नही थी , वरना क्या होता ??? हाहाहाहा । वैसे भी दारु पीकर थोडा बहुत बहका न जाये तो लगता है साला दारु नकली है।

Satish Vikram Singh : Yashwant Singh sir, bahut accha likha apne.

Uttam Pandey : कई बार धीमी गति की आंच व आग ज्यादा गंभीर व देर तक असर करती है और कई बार तुरंत लगा दी गई आग अचानक भभक कर बुझ जाती है.isme koi do rai nhi..nice…we should follow veeren nd tasleema if we want to change 4 a long time

Praveen Raj Singh : Jo insan pacha na sakay usay peeni nahin chahiye. Khas taur say chunavi mahaul mein muft mein milnay wali.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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