मिस्टर मनीष तिवारी, नेताओं के लिए भी कामन एंट्रेंस टेस्ट होना चाहिए!

Prabhat Shunglu : पत्रकार ही क्यों। संभावित नेताओं के लिए भी CAT ( यानि कॉमन एंट्रेन्स टेस्ट ) होना चाहिये मनीष तिवारी जी। चुनाव से पहले। इस टेस्ट में जेल मैन्यूअल के बारे में जानकारी, सबसे फेवरिट भ्रष्टाचारी पर 200 शब्दों का एक लघु निबंध, इनके भयंकरम भ्रष्ट होने की संभावना को टटोलने के लिए रीज़निंग के सवाल, तिहाड़ जेल के हेरिटेज और उसके वास्तुशिल्प की जानकारी और वीआईपी बैरेक्स पर विशेष के टिप्पणी, (ये कम्पलसरी प्रश्न होने चाहिये) दंगे करवाने के गुर (ये ऑप्शनल हो, क्योंकि दंगे करवाना या न करवाना आगे इन होनहार विद्यार्थियों के हाथों में ही होगा) महिलाओं और दलितों को लेकर इनके सामंती विचारों पर भी कम्पलसरी प्रश्न होने चाहिये। ये महज़ एक मॉड्यूल है। अखबारों में इश्तेहार देकर आप जागरूक नागरिकों से इसी तर्ज़ पर और सुझाव मंगा सकते हैं। कानून बनाने में आसानी होगी मनीष जी।

P.S. चुनाव आयोग से सुझाव मत मांगियेगा। वो इसमें आपकी कतई मदद नहीं करेगा। उल्टा ऐसे मॉड्यूल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगा देगा। और आप तो जानते ही हैं सुप्रीम कोर्ट किस तरह इन दिनों नेताओं के पीछे हाथ धोकर पड़ा है। आप को लोकतंत्र और सुशासन का पाठ पढ़ाता है। जो उसका काम कतई नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू के फेसबुक वॉल से.


मूल खबर…

पत्रकारों के लिए लाइसेंस का सुझाव दिया मनीष तिवारी ने

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