मीडिया के पतन पर काफी चिंतित हैं राजीव शुक्ला

राजीव शुक्ला आजकल बड़े चिंतित हैं. उनकी चिंता मीडिया के पतन व इसके गिरते स्तर को लेकर है. उन्होंने अपनी चिंता, पीड़ा और नाखुशी का इजहार एक कार्यक्रम के दौरान किया. उन्होंने अपनी चिंता को शब्द देते हुए कहा कि मीडिया को लंबे समय तक पवित्र गाय नहीं माना जा सकता, क्योंकि अब पत्रकार पत्रकार के दायरे से बाहर निकल कर सीईओ, बिजनेस हेड व चैनल मालिक बन रहा है.

उन्होंने कहा कि मीडिया बाजार में खड़ा हो इस पर कोई हर्ज नहीं है, लेकिन मीडिया के माध्यम से अन्य धंधे चमकाए जा रहे हैं, बड़ा संकट तो यह है.  शुक्लाजी फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स की ओर से आयोजित क्रोनी जर्नलिज्म विषय पर आधारित सेमिनार में बोल रहे थे. शुक्लाजी भी पहले पत्रकार थे लेकिन बाद में कई तरह के रास्तों पर चलते हुए इन दिनों केंद्रीय मंत्री बन गए हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक बिल्डर अपना न्यूज चैनल क्य़ों ला रहा है क्योंकि उसे अपनी जमीन भी सरकार से पास करवानी है, नक्शा भी पास करवाना है. कई तरह के लाभ लेने हैं. और यह लाभ लेने का रास्ता उसे पत्रकार ही सुझा रहा है. यही वजह है कि एक मीडिया कंपनी है उसके पास न्यूज चैनल भी है. चीनी मिल भी है और भी कई धंधे. न्यूज चैनल घाटे में जा रहा है तो क्या हुआ, चीनी मिल और दूसरे धंधे तो फल-फूल रहे हैं. राजीव शुक्ला ने कहा कि मर्यादा और लक्ष्मण रेखा जैसे शब्दों की उम्मीद करना बेमानी है. हर पत्रकार इस दलदल में नहीं है, लेकिन जो लोग हैं उन्होंने सबका नाम फंसा रखा है.

सेमिनार में राजीव शुक्ला के अलावा मीडिया विश्लेषक दिलीप चेरियन, वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता, वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगजीन, वरिष्ठ पत्रकार टी के अरुण व वरिष्ठ पत्रकार इंदर मलहोत्रा ने भी अपने विचार रखे.
 

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