मीडिया के साथी इस वैदिक विद्वान के ब्रह्मांड उत्पत्ति से संबंधित बातों-दावों पर गौर करें

Yashwant Singh : एक भारतीय वैदिक विद्वान ने ब्लैक होल्स को लेकर स्टीफन हाकिंग के बदले विचार पर उन्हें पत्र लिखा है… यह पत्र मेरे पास भी आया है.. इसे पढ़कर मैं हैरत में पड़ गया.. अपने देश में इन विषयों पर लोग काम कर रहे हैं और दावे से कई बातें कह रहे हैं लेकिन उस पर बहस के लिए, कवरेज के लिए, शोध के लिए किसी के पास वक्त नहीं… लोग राजनीति राग गाने में लगे हैं या फिर अपने निजी दुख-सुख में…

भड़ास पर आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक जी का स्टीफन हाकिंग को लिखा पत्र प्रकाशित कर दिया है… मैंने अग्निव्रत जी से अनुरोध किया है कि वे दिल्ली में आकर प्रेस कांफ्रेंस करें… ये अदभुत मामला है… संभव है, हम आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक की कई बातों से सहमत न हों लेकिन ये एक बहस शुरू करने का मौका तो दे ही रहे हैं… अग्निव्रत ने जो लिखा है, उसका एक पैरा पढ़ें:

‘‘यह माना जाता है कि ब्लैक होल के निकट टाइम रुक जाता है। इस कारण यह मानना होगा कि ब्लैक होल के बाहरी भाग और उसके अन्दर कोई क्रिया नहीं होगी, क्योंकि बिना समय के कोई क्रिया वा हलचल नहीं हो सकती, परन्तु यह माना जाता है कि ब्लैक होल में गुरुत्वाकर्षण बल अत्यधिक होता है, इससे गुरुत्वीय तरंगें तो उत्पन्न होंगी ही। तब ब्लैक होल पर क्रिया व हलचल सिद्ध हो ही गयी। ब्लैक होल पर रेडियेषन विद्यमान होते ही हैं, भले ही वे बाहर उत्सर्जित नहीं हो सके। स्टीफन हॉकिंग स्वयं रेडियेशन का उत्सर्जन मानते हैं, जिन्हें हॉकिंग रेडियेशन नाम दिया जाता है। तब क्रिया व गति स्वयं ही सिद्ध हो जाती है। तब, कैसे कहा जाता है कि ब्लैक होल पर समय और गति रुक जाती है।’’

पूरा पत्र ये है:

हिंदी में पत्र

http://old1.bhadas4media.com/vividh/18013-2014-02-22-19-52-20.html

अंग्रेजी में पत्र

http://old1.bhadas4media.com/vividh/18011-a-letter-to-stephen-hawking.html


ड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. इस स्टेटस पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार हैं:

Mukund Hari ऐसे अनुसंधानकर्ताओं और चिंतकों को देश के सामने लाना चाहिए।

Poojāditya Nāth हमारे पूरे पब्लिक डिस्कोर्स से अनुसंधान और विज्ञान ग़ायब हैं…
 
Arvind Chotia बिल्कुल सही कहा यशवंतजी। खबरों के लिए किसी के पास टाइम नहीं है। गोसिप ही बिकती है आजकल टीवी पर।

Gaurav Mishra Yashwant Singh@ aur jyada jankari kahan se le sakta hu swami ji ke is vichar ke bare me. please samay nikal ker is comment ka reply kr de. aur swami ji ke is subject per vicharo ko aage lane ke liye kosis honi chaye
 
Yashwant Singh गौरव जी. स्वामी जी को मैंने मेल भेजा है कि वो दिल्ली आएं. उनकी प्रेस काफ्रेंस कराई जाए.
 
Gaurav Mishra यशवंत जी, कोई लेख पहले भी प्रकाशित हुआ है स्वामी जी का, अगर हाँ तो लिंक दे सर. Social media और Web media से ही ऐसे चीज़ आगे ला सकते है हम लोग, सभी को कोशिस करनी चाहिए!!
 
अभिनव आलोक ऐसे अनुसंधानकर्ताओं को अपना पेपर किसी जर्नल को भेजना चाहिए। वैज्ञानिक अनुसंधानों से जुड़ा हुआ हूँ और समझता हूँ कि यहाँ माहौल कमो -बेस पारदर्शी है। अगर आपकी बात में दम है , उसको साबित करने के लिए जरूरी सबूत और तर्क हैं तो उसको जरूर नोटिस किया जाता है। आप उन्हें उनके शोध पत्रों को किसी वैज्ञानिक जर्नल में भेजने की सलाह दें। मीडिया में हवा खड़ा करने से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला।

Yogesh Garg देखना Ajeet Sharma जरा क्या मामला है , लेटर मैं पढ़ चुका हूँ ये भी मुझे वो सचिन शर्मा के पुष्पक विमान जैसा मामला लगता है ।
 
Shivani Kulshrestha यर्जुवेद के ,ॐ हिरण्यगर्भ समव्रतताग्रे भूतसस्य, जो ये श्लोक है ये भूगोल की वर्तमान थ्योरी को चेँज करता है। इसमेँ भी बहुत से राज छिपे है।

Yashwant Singh योगेश भाई. पत्र में जिस एक भारतीय खगोलशास्त्री और उनके विचार का उल्लेख किया गया है, एक जिस भारतीय किताब का उल्लेख किया गया है वो सब देखकर एनालाइज किया जाना चाहिए कि क्या भारतीय विद्वानों ने स्टीफन हाकिंग की पुरानी थ्योरी को पहले ही खारिज कर अपनी बात रख दी थी जिसे स्टीफन हाकिंग अब खारिज कर रहे हैं…

Yogesh Garg यशवंत जी मैं भौतिकी से स्नातक हूँ और जिसे टैग किया है वो मैटर फिजिक्स में पी एच डी है , हम पहले इसे समझ ले फिर कुछ कह पाएंगे

Yashwant Singh योगेश जी. यही मैं भी कहना चाह रहा हूं कि पूरे प्रकरण को समझना, एनालाइज किया जाना चाहिए.. .नतीजे निकालने की जल्दबाजी के पक्ष में मैं भी बिलकुल नहीं हूं… कई बार लोग अपने धार्मिक आग्रहों दुराग्रहों और अतीतजीविता के कारण वर्तमान खोजों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं.. इसका मैं सख्त विरोधी हूं… और, ज्यादातर यही देखा गया है कि धर्मों ने साइंस को हमेशा अपने से कमतर माना या कमतर साबित करने की कोशिश की… इस पोंगापंथ का भी मैं विरोधी हूं….

अभिनव आलोक यह मामला धर्म का है ही नहीं , यह पूरा वैज्ञानिक मसला है। । इस पर वैज्ञानिक ढंग से ही बात संभव है। । विज्ञानं में मेरे ख्याल से अभी तक धर्म के साथ संवाद स्थापित करने की कोई परम्परा नहीं है। . यहाँ सबकुछ विशुद्ध सबूतों -अवलोकनों पर आधारित होता है। । विरोधी विचार भी होते हैं यहाँ मगर दोनों के पास कुछ न कुछ सबूत -तर्क होतें हैं। ।

Yogesh Garg इस लेख में इन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है जो एक भौतिकी से ग्रेजुएशन करने वाला सामान्य छात्र न जानता हो या जो प्रश्न इन्होंने पूछे हैं वो जानने की जिज्ञासा न उठी हो… जिनेवा के सर्न में बोसान कण की खोज के बाद कुछ धार्मिक जीवों ने उसका ठेका लेने का प्रयास भी किया है.. असल में उस कण का नाम भी God damn particle था.. इसकी खोज ही इसलिए की गई की ईश्वर की सृष्टि की रचना को खंडन कर उसे भौतिकी के नियम पर समझाया जा सके.. पर मीडिया के अतिवादियों को बेचने को मसाला मिला तो ये गॉड पार्टिकल हो गया.. इन्होंने किसी धार्मिक साहित्यिक/ पुरातात्विक संदर्भ का हवाला नहीं दिया है जो इनकी धारणा को स्पष्ट करता हो.. इस लेख में ये भविष्य काल पर ही बात करते हैं जैसे कि….

"मैं मूल कण को स्पष्ट करूंगा "

"मैं इस विषय पर फाइनमैन से बहुत आगे जाकर लेख लिख सकूंगा।"

"अनादि मूल पदार्थ से लेकर तारों के निर्माण के विषय में भी विस्तार से लिख सकूंगा।"

bla bla bla …

ये ऐसा है जैसे पंडित जी का हनुमान चालीसा से अनपढ़ गाँव में फेरे पड़वा देना ।

Yogesh Garg @yashwant भाई इसे पढ़िये और आनंद लीजिये ,

"एक बार विदेश से कोई बोटनिस्ट ( वनस्पति वैज्ञानिक ) आया। उनका एक जगह भाषण होना था। मुझे बताया गया कि यह 'फासिल ' का विशेषज्ञ है , यानि चट्टानों के बीच दबे हुए पौधे या जंतु के पाषाणरूप हो जाने का। मैंने उसका भाषण सुना और मेरे भीतर हलचल होने लगी। वह पश्चिम के वैज्ञानिको के नाम ही लेता रहा और विदेशो के 'फासिल' दिखाता रहा। उसके बाद मैं बोलने को खड़ा हो गया। मैंने कहा – आज हमने एक महान 'बाटनी ' का भाषण सुना। (बाद में मुझे बताया गया कि वह बॉटनिस्ट कहलाता है ) मैं आपसे पूछता हूँ कि क्या प्राचीन भारत में 'बाटनी ' नहीं ? अवश्य थे। हम भूलते जा रहे है। भगवन राम एक महान 'बाटनी ' थे। और अहिल्या एक फासिल थी। महान बाटनी रामचंद्र ने अहिल्या फासिल का पता लगाया। वे आज के इन बाटीनियो से ज्यादा योग्य थे। ये लोग तो फॉसिल का सिर्फ पता लगाते है और उसकी जांच करते है। महान बॉटनी राम ने अहिल्या को फिर से स्त्री बना दिया। ऐसे ऐसे चमत्कारी बॉटनी हमारे यहाँ हो गए है। हम विश्व गुरु हैं। हमें कोई कुछ नहीं सिखा सकता।

इस पर भी खूब तालियाँ पिटीं और विदेशी विशेषज्ञ भी मान गए कि हमें कोई कुछ नहीं सिखा सकता
–आदरणीय परसाई जी

Yashwant Singh योगेश भाई, सहमत हूं.

Yogesh Garg एक और …
ज्ञान विज्ञान किसके पास है?
– सिर्फ़ आर्यों के पास
उसके बाहर कहीं ज्ञान विज्ञान तो नही है?
– कहीं नही।
इन हजार सालों मे मनुष्य जाति ने कोइ उपलब्धि की। ?
– कोइ नही। सारी उपलब्धि हमारे यहां हो चुकी थी।
क्या अब हमें कुछ सीखने की जरूरत है?
– कतई नही, हमारे पूर्वज थे विश्व के गुरु थे।
संसार मे सबसे महान कौन ?
हम, हम, हम, हम, हम
—–
-परसाई जी की जय हो

अभिनव आलोक वैसे यह संभव है कि आभास कुमार मित्र के वैज्ञानिक शोधों को तब उतना महत्त्व न मिला हो और अब हाकिंग्स द्वारा वैसी ही बात की गयी हो। मगर इसका वेदों इत्यादि से कोई भी सम्बन्ध स्थापित करना बुद्धिमानी नहीं है

Yogesh Garg http://www.vaidicscience.com/books/eitraybrahmanvigyan.pdf इनकी एतरेय ब्राह्मण पुस्तक पढ़कर आप सिर धुन लेंगे । कोशिश करके देखिये …यही वजह है की इनका विदेश से कोई वैज्ञानिक जवाब नहीं देता … मुझे तो ये आत्ममुग्ध टाइप के लोग लगते है जिनहे किसी किस्म की सनक सवार है । बुलाये इन्हे दिल्ली और कीजिये प्रेस कान्फ्रेंस देखते है कैसे ये ' ब्लेक हाल को इस पुस्तक से समझा सकते है , ए के मित्रा जी तो बार्क में वैज्ञानिक रहे है पर ये महाशय तो उनके कंधे पर अपनी किताब रखकर खुद को हांक रखे है।

Kapil DEv AttRi sir inki bato me kuch nhi dikh rha……………….. Ye prsn physics pdhne wale hr students ke man me aate h……… ye koi aisi baat nhi ki pahli baar inhone hi socha hoga aisa……………….. To thik rhega agr ye े प्रेस कान्फ्रेंs na bulaye to@ Yashwant singh

Ashok K Ram इस पत्र में सवाल बहुत कुछ स्पष्ट नही हो रहा है। पर एक बात सत्य है कि वैदिक परम्पराओं के लोग थोड़ा बहुत विज्ञानं को जानकर उसपर चैलेंज करते हैं, जब उनको अतिरिक्त ज्ञान होता है तो फिर मुह फाड़ने लगते। प्रताप नारायण मिश्र का उप बोर्ड में 'बात" एक लेख है। उसमें गंगा में नहाने से पहले पानी को माथे पर लगाने का वैज्ञानिक कारण बताते हैं। कहते हैं पहले पैर से छूने ने नीचे की गर्मी ऊपर दिमाग में चढ़ जाती है । अब उन्हें therodynamics के नियम उनको कौन समझाए कि ऊष्मा गर्म से ठण्ड की ओर चलती है। यानि सिर की गर्मी पैरों से होकर गंगा जल में जाएगी।

Ajit Harshe "ईश्वर बिना नियम सृष्टि की उत्पत्ति व संचालन नहीं कर सकता।" …और उसके बाद उन्हीं नियमों पर चलने के लिए मजबूर होता है… अर्थात सृष्टि की उत्पत्ति करने के बाद ईश्वर मर जाता है, अपनी शक्ति खो देता है…

Ashok Singh Rawat ara murkho so called intellectuals prampita ko janna hee gyan hain………. aur jis science ki bait aajkal vigyanik kar raha hain us sa kahee guna aga ka vigyan ved ma hai ….. jarurat is bait ki hain usko smajhna hain fir logo ka jan kalyan ma karya kar na hain……………

Atul Singh Ludicrous!

Alka Bhartiya kuch fund adi bhi mil sakta hain lekin fund den wale EU hain is liye mushkil ho sakti hai vais shdho ke liye fund dte hain voh. TATA faundation me bhi ty kare apna paper submit kare

Pradeep Sharma इण्डिया मेँ सोचने पर पाबन्दी थोडे है नाश हो इस मीडिया का जिसने हमारी सोचने की शक्ति पर कब्जा कर लिया है.और दे श मेँ लोग निठ्ठले बनकर सिर्फ मोदी के बारे मे सोच रहे है

Rakesh Mishra Pravasi Yashwant bhai aap bade jigyasu hain. Aur jigyasa bhi brahmrup hai. Janhit me Baba ki booty mar ke apke sath baithna hi padega. Aadi se anant ki charchaon ke madhya me jivan, prakriti aur brahmand ki vimaon ko tay karne ya mapne wali avdharnao aur unke sthapakon aur unki mool preranaon ko samajhna avashyak hai. Udaharan ke taur par darwin ke `survival of the fittest` ke propaganda par duniya me bahut sa bhram failaya gaya. Aj uska khandan ho chuka hai lekin humare beech uska koi jikra nahi hai. Thik usi prakar gulami ke british lootraj me churayi gayi prachin bhartiy sanhitaon ki shodh se bahut se bahut si advance technologies banayi gayi jinse aaj hindustan ki econoics me buy, beg, borrow ki parampara jari hai… Aur 'khata na bahi, jo kahi wo sahi' ki parampara pe chal rahi bhartiy patrakarita uski charan ya das tak ban baithi hai. Bharat sarkar ke lagbhag 200 shodh sansthano ki reporting kis akhbar me nazar ati hai…?

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