मीडिया को नगद नारायण का प्रसाद दिया श्रीजयराम संस्था अध्यक्ष ने

कुरुक्षेत्र : औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत। धर्म, नैतिकता का पाठ पढ़ाने और लोभ, मोह से दूर रहने का संदेश देने वाले धर्माचार्य भी नगद नारायण को ही काम निकलाने का जरिया मान बैठे हैं। मामला नगर की एक प्रमुख धार्मिक संस्था जयराम विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी के संस्था के कुलपति ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी का है। ब्रह्मचारी ने ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित अपने आश्रम का स्थापना दिवस मनाने के साथ अपने गुरुदेव स्व. देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की मूर्ति स्थापना कार्यक्रम आयोजित किया था। इस अवसर पर एक आईएएस के अलावा नगर के गणमान्य लोग एवं मीडिया कर्मी भी आमंत्रित किए गए।
 
कार्यक्रम के दौरान धर्म, कर्म और नैतिकता की बात हुई। इसके बाद कार्यक्रम में आए कुछ मीडिया कर्मियों की जेबों में ब्रह्मचारी ने नगद नारायण (१०००-१००० के नोट) डालना शुरु कर दिया। इतना ही नहीं, आश्रम के अध्यक्ष महाराज ने इनमें से एक संवाददाता की जेब में तो पांच हजार रुपए डालकर पाकेट की चेन बंद कर दी, जिस पर संवाददाता ने गुस्सा भी प्रकट किया। ऐसा करने का कारण पूछने पर झेंप मिटाते हुए ब्रह्मचारी ने कहा कि यह पांच नोट उसके तथा चार साथियों सहित पांच मीडिया कर्मियों के हैं और इससे पहले जो अन्य संवाददाता आए थे। यह उन्हें भी दिए जा चुके हैं और इस राशि को  प्रसाद समझ कर रख लो। 
 
आश्रम के अध्यक्ष की इस हरकत पर गुस्साए संवाददाता ने ये पांचों नोट ना केवल वापस किए बल्कि इन नोटों के ऊपर 100 रूपये रख कर 5100 रूपये कर दिए। संवाददाता ने इसके जवाब में कहा कि उन्हें नगद नारायण वाले वाले प्रसाद की नहीं बल्कि आशीर्वाद की जरुरत है। गौरतलब है कि इससे पहले भी आश्रम के संचालक ऐसा कर चुके हैं, जिसके कारण उन्हें कुछ पत्रकारों के गुस्से का शिकार होना पड़ा था। अब नगर के पत्रकारों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि आखिर महाराज श्री किस मकसद से उन्हें यह नोट बांट रहे हैं। इस घटना पर हरियाणा पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव आरपी शर्मा, जिलाध्यक्ष राजीव अरोड़ा, कुरुक्षेत्र प्रेस क्लब के संरक्षक राजेश शांडिल्य, पंकज अरोड़ा, राजेश चौहान, राकेश रोहिला तथा अन्य पत्रकारों ने इस घटना पर विरोध जाहिर किया है। शर्मा ने कहा कि वे शीघ्र ही इस मामले को लेकर बैठक करके कोई ठोस निर्णय लेंगे, ताकि भविष्य में कोई इस प्रकार की हरकत न कर सके। उन्होंने कहा कि एक ओर देश में कथित संत महात्माओं से जनता का विश्वास उठ रहा है और मीडिया पर भी आंच  पहुंच रही है, ऐेसे हालात को दुरुस्त बनाने के लिए ठोस मुहिम की आवश्यकता है। उन्होंने नगद राशि वापस करने वाले मीडिया कर्मियों की भी सराहना की। 
 
कुरुक्षेत्र से पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट

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