मीडिया चौपाल में जुटे न्यू मीडिया के कई धुरंधर

भोपाल में नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन में शनिवार एवं रविवार को दो दिवसीय मीडिया चौपाल का आयोजन हुआ। इस चौपाल का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद और स्पंदन संस्था के सौजन्य से हुआ। इसमें देशभर से ब्लॉगर और नेटीजन बड़ी तादाद में जुटे। फेसबुक पर हाइपरएक्टिव लोगों की भी अच्छी खासी संख्या रही। कई लोग ऐसे भी थे जो पेशे से पत्रकार होने के साथ-साथ शौकिया तौर पर न्यू मीडिया की अलग-अलग विधाओं से जुड़े हुए थे।

मीडिया चौपाल में अलग-अलग विषयों पर कुल छह सत्रों पर चर्चाएं हुईं। चौपाल की शुरुआत उद्घाटन समारोह से हुई। सबसे पहले दीप प्रज्‍ज्‍वलन किया गया एवं इसके बाद वैज्ञानिक मनोज पटेरिया, विज्ञान और प्रोद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. प्रमोद वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक, गिरीश उपाध्याय एवं पुष्पेंद्र पाल सिंह को स्मृति चिन्‍ह भेंट कर उनका सम्मान किया गया। उद्घाटन समारोह का संचालन स्पंदन संस्था के अनिल सौमित्र ने किया।

नया मीडिया, नई चुनौतियां : चौपाल में चर्चा सत्र की शुरुआत 'नया मीडिया, नई चुनौतियां' से हुई। इस सत्र में मुख्य वक्तव्य वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक ने दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया और मीडियम में अंतर करना पड़ेगा। जब हम मीडियम की बात करते हैं तो वह एक-दूसरे से संपर्क का माध्यम भर है, लेकिन जब हम मीडिया की बात करते हैं तो जवाबदेही कहीं ज्यादा बड़ी हो जाती है। स्मार्टफोन्‍स ने इंटरनेट के विस्तार में योगदान दिया है। न्यू मीडियम अभी अपने शैशवकाल में है और अभी वो स्वयं को परिभाषित करने में लगा है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नए मीडियम को प्रामाणिक बनाने और नकारात्मक विचारों के प्रसार को रोकने की है।

इस सत्र के दौरान पत्रकार अनुराग अन्वेषी, मुक्ता पाठक, शैफाली पांडे, पंकज कुमार झा, यशवंत सिंह, वर्तिका, संजीव सिन्हा, उमेश चतुर्वेदी, आशुतोष झा, अनिल शर्मा आदि ने भी अपने विचार रखें। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि न्यूटन ने चार सौ वर्ष पूर्व सवाल उठाया था कि सेब नीचे कैसे आता है? वहीं भारतीय ऋषि कणाद ने हजारों वर्ष पूर्व प्रश्न पूछा था कि सेब ऊपर कैसे जाता है? उन्होंने भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच की समानता को दर्शाया। इस सत्र का संचालन दिल्ली से आए पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने किया।

उसके बाद चौपाल में आमजन में वैज्ञानिक दृष्टि के विकास और जन माध्यमों की भूमिका पर चर्चा की गई। इस सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज पटेरिया ने कहा कि वर्तमान में मीडिया में विज्ञान की खबरों को लेकर पर्याप्त कवरेज नहीं मिल पा रहा है। अगर हमें लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना है तो विज्ञान की खबरों को भी महत्व देना होगा। वहां मौजूद पत्रकारों ने उन समस्याओं के बारे में बताया, जो विज्ञान की खबरों को कवर करने के दौरान सामने आती हैं और उनका हल तलाशने पर जोर दिया गया। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण का जीवन पर महत्व पर जोर देते हुए कहा कि न्यू मीडिया इस क्षेत्र में व्यापक योगदान देने की क्षमता रखता है।

डिजास्टर के प्रति संवेदनशील है भारतीय उपमहाद्वीप : चौपाल के दूसरे दिन वरिष्ठ वैज्ञानिक सुबोध मोहंती ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। आपदा के समय न्यू मीडिया बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। कई बार आपदाएं दर्शाती हैं कि हमारा ग्रह पृथ्वी एक जिंदा ग्रह है। हमें कुछ आपदाओं के साथ सामंजस्य बिठाकर जीना सीखना होगा। उत्तराखंड में आई विभीषिका के दौरान न्यू मीडिया के द्वारा किए गए कार्यों पर चर्चा की गई और उन्हें भविष्य में बेहतर बनाने के प्रयासों पर जोर दिया गया।

अनिल सौमित्र ने मीडिया चौपाल की भूमिका रखी। उन्होंने कहा कि यह सब प्रयास इसलिए हो रहा है ताकि वेब मीडिया के संचारकों की क्षमता में बढ़ोतरी हो और वे सशक्त हों, साथ ही इसका लाभ मीडिया के अन्य क्षेत्र के लोगों को भी मिले। इससे समाज के विकास और सशक्‍तीकरण में भी नए मीडिया की भूमिका स्पष्ट हो सके। इस दौरान के सहभागियों ने अपने सुझाव भी साझा किए।

लेखक अखिलेश पाठक वेबदुनिया डाट काम से जुड़े पत्रकार हैं. उनका यह लिखा वेब दुनिया पर प्रकाशित हो चुका है. वहीं से साभार लेकर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *