मीडिया ट्रायल करने वाले वो दलाल पत्रकार खुर्शीद अनवर की खुदकुशी के बाद खामोश क्यों हैं?

Zafar Irshad : तथाकथित यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे और मीडिया ट्राएल से व्यथित एक इज़ज़तदार बुद्धिजीवी लेखक खुर्शीद अनवर ने आज आत्महत्या कर ली… आखिर कब तक झेलता, एक शरीफ आदमी गलत आरोप और मीडिया ट्राइल… अब मीडिया ट्राइल करने वाले वो दलाल पत्रकार खामोश क्यों हैं? जिन्होंने बिना बलात्कार का आरोप सिद्ध हुए एक लेखक को बलात्कारी बना दिया…

ऐसे हालत में एक इज़्ज़तदार आदमी के सामने आत्महत्या के अलावा क्या कोई दूसरा उपाय था, कतई नहीं…अब खुश तो बहुत होंगे वो पीत पत्रकारिता करने वाले पत्रकार..खुर्शीद साहिब को मैं निजी तौर पर तो नहीं जानता था, लेकिन उनके लेखन को पढता था..खुदा उनकी आत्मा को शान्ति दे, और उन पर गलत आरोप लगाने वालों को सजा…अभी देखिएगा कितने शरीफ लोग ऐसे गलत आरोपों के चलते आत्महत्या करेंगे, तब शायद लोगों की आँखे खुलें…

Dhruv Gupt : खुर्शीद अनवर, आप तो ऐसे न थे ! अपने खुले विचारों और अपनी बेबाक लेखन के लिए जाने जाने वाले मित्र खुर्शीद अनवर द्वारा खुद पर बलात्कार का आरोप लगने के बाद आत्महत्या कर लेना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है ! हम उन्हें एक मज़बूत आदमी के रूप में जानते थे !

बलात्कार का आरोप अगर गलत था तो उन्हें मजबूती से पुलिस, मीडिया और सामाजिक मंचों पर अपना पक्ष रखना था और अपनी बेगुनाही की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना था ! अगर वे दोषी थे तो उनके सामने प्रायश्चित के लिए जीवन पड़ा था ! हम कल उनपर आरोप लगने के बाद भी हैरान थे और आज उनकी ख़ुदकुशी के बाद भी हैरान हैं ! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे !

जफर इरशाद और ध्रुव गुप्त के फेसबुक वॉल से.

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