मीडिया विरोधी कमेंट पर पर्रिकर के खिलाफ गुस्सा, माफी की मांग

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की मीडिया के खिलाफ की गई टिप्पणी का मामला अब भारतीय प्रेस आयोग के पास पहुंच चुका है। कांग्रेस के प्रवक्ता सुनील कवथांकर ने बुधवार को प्रेस आयोग से की गई शिकायत में एक कार्यक्रम के दौरान रविवार को मीडिया के खिलाफ पर्रिकर की 'गैरजिम्मेदाराना और घृणित' टिप्पणी को प्रेस की आजादी पर हमला बताया है। शिकायत में कहा गया है कि अत्यंत शिक्षित मुख्यमंत्रियों में से एक पर्रिकर की संवाददाताओं की निष्ठा के खिलाफ इस प्रकार की घृणित और अपमानजनक टिप्पणी से प्रेस की आजादी के प्रति उनके लापरवाह और अविवेकी नजरिए को प्रदर्शित करता है।

इसमें कहा गया है कि इससे उनकी राजनीतिक सूझबूझ पर संदेह पैदा होता है और यह उनके जैसी कदकाठी के राजनेता के लिहाज से मेल नहीं खाता। शिकायत में कहा गया है कि गोवा में प्रेस अत्यंत सक्रिय है और राज्य में जो कुछ घटित हुआ या हो रहा है उसकी जिम्मेदारी के साथ खबर दी गई है, क्योंकि ऐसा करना समाज के हित में था। एक सार्वजनिक समारोह में पर्रिकर ने कहा था कि एक रिपोर्टर का वेतन क्या है, एक समाचार वाचक कितना उपार्जित करता है? शायद 25000 रुपये। इनमें से अधिकांश स्नातक हैं। वे महान विचारक..बुद्धिजीवी नहीं हैं। वे वही लिखते हैं जैसा वे समझते हैं। पर्रिकर ने यह भी कहा कि गोवा में पेड न्यूज के भी उदाहरण हैं जहां लोगों से पैसे लेकर लिखे। गोवा में विपक्ष के साथ ही साथ पत्रकार संघ ने भी पर्रिकर की आलोचना की और उनसे माफी मांगने के लिए कहा। पर्रिकर ने हालांकि कहा है कि उन्हें गलत संदर्भ में उद्धृत किया गया है।

गोवा में पत्रकारों और विपक्षी पार्टियों ने मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उनका कहना है कि पर्रिकर ने जो बयान दिया था वह मीडिया को नीचा दिखाने और इसे धमकाने वाला था। गोवा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (जीयूजे) ने बयान जारी कर रविवार शाम एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पत्रकारों के शिक्षा और वित्तीय स्थिति पर पर्रिकर द्वारा उठाए गए सवाल को लेकर उन्हें फटकार लगाई है।

गौरतलब है कि पर्रिकर ने सार्वजनिक समारोह में मीडिया और विपक्ष को लेकर बयान दिया था। जीयूजे के महासचिव एश्ले डो रोजैरियो ने कहा कि जीयूजे इस बयान को अपराध मानते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग करता है। ऐसा पहली बार नहीं है कि जब पर्रिकर ने गोवा में मीडिया और इसकी कार्यशैली पर अनुचित और अपमानजनक प्रहार करते हुए निराधान और अप्रमाणित बयान दिया है।

पर्रिकर ने रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि एक संवाददाता की तनख्वाह कितनी है? एक समाचार वाचक कितना कमाता है? शायद 25000 रुपये। वे ज्यादातर स्नातक होते हैं। वे महान चिंतक बुद्धिजीवी नहीं होते। वे वही लिखते हैं जो वो समझते हैं। मुख्यमंत्री ने यह दावा भी किया था कि राज्य में पेड न्यूज बढ़ रहा है और लोग पैसा लेकर लिखते हैं।

जीयूजी ने पर्रिकर से मांग की है कि वह या तो स्पष्ट रूप से सामने आएं और उन पत्रकारों और समाचार पत्रों का नाम बताएं जो उनके अनुसार पेड न्यूज में लिप्त हैं या फिर वह आरोप को साबित करने तक चुप रहें। इधर विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भी पर्रिकर पर अलोकतांत्रिक व्यवहार करने और मीडिया को भयभीत करने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की है।

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