मीडिया से देश को खतरा!

ये बात जो लोग मीडिया में हैं उन्हें अटपटा सा लगे, या वो मानने को तैयार न हो, पर सच्चाई यहीं हैं कि आज मीडिया से देश को खतरा उत्पन्न हो गया हैं, ऐसे में जरुरी हैं कि सरकार मीडिया पर लगाम लगाये, उन्हें नियंत्रित करे अथवा कुछ ऐसे उपाय ढूंढे ताकि देश व समाज को मीडिया की खतरों से बचाया जाये। मीडिया से देश व समाज को कैसे खतरा उत्पन्न हो गया हैं। उसका एक नहीं अनेक उदाहरण हैं। जिस पर मीडिया के लोगों को ही खुद आत्ममंथन करने की जरुरत हैं।

ज्वलंत उदाहरण — आज ज्यादातर राष्ट्रीय चैनल, अपनी महत्वाकांक्षा को पाने के लिए, एकमात्र लक्ष्य रुपये कमाने के लिए आधे घंटे का या रुपये पर जितना मन चाहे, उतने घंटे का स्लॉट बेच दे रहे हैं और इन स्लॉटों में क्या होता हैं। आप खुद देखिये। एक ठग आता हैं। अपने को बाबा कहता हैं। और ठग विद्या द्वारा पूरे देश में अपना जादू चलाकर, खुद को प्रतिष्ठित कर लेता हैं। यानी कल तक जिस व्यक्ति को कोई नहीं जानता हैं, वो व्यक्ति पल भर में ही, पूरे देश में इस प्रकार अपनी धर्मसत्ता स्थापित कर लेता हैं कि इन राष्ट्रीय चैनलों को मुंहमांगी रकम देकर, वो बाबा अपनी जयजयकार करवाता हैं। फिलहाल देश में दो बाबाओं ने ऐसी कमाल दिखायी हैं कि एक बाबा तो बनिये की दुकान से लेकर, चैनल और दवाओं की दुकान तक खोल दी हैं, जबकि दूसरा बाबा अपना थर्ड आई खोलकर, पल भर में अनारक्षित रेलवे टिकट को कन्फर्म तक करा देता हैं, यहीं नहीं खानेवाले बिस्कुट का कारोबार करने वाले व्यक्ति को वो सोने का बिस्कुट का कारोबार तक करनेवाला बनाने का दावा कर देता हैं, यहीं नहीं इस बाबा ने तो हद कर दी हैं… हर प्रश्न का उटपुटांग जवाब देकर, स्वयं को प्रतिष्ठित कर देता हैं।

ऐसे में इन बाबाओं को देख, गोस्वामी तुलसीदास की वो पंक्ति याद आ जाती हैं, वो पंक्ति जो श्रीरामचरितमानस में लिखा हैं — पंडित वो ही सो गाल बजावा। यानी कलयुग में जो जितना गाल बजायेगा, वो उतना बड़ा ज्ञानी कहलायेगा। एक नहीं कई चैनल हैं — जो इस प्रकार के गोरखधंधे में शामिल हैं, पर सरकार इन पर कार्रवाई नहीं करती। कमाल हैं इन बाबाओं ने इन चैनलों की टीआरपी भी बढ़ा दी हैं, यानी एक पंथ दो काज। पहला की बाबा से रुपये भी मिल गये और टीआरपी भी मिल गयी। जबकि ये चैनल, रजिस्ट्रेशन कराने के समय़ सिर्फ न्यूज चलाने की बात करते हैं, पर न्यूज के नाम पर ये क्या कर रहे हैं, सभी को पता हैं। आज देश के विभिन्न गांवों और शहरों में देश के महान संत — कबीर, नानक, रविदास, नामदेव, तुकाराम, तुलसीदास, मीराबाई, नरसीमेहता, सुरदास, रसखान आदि के चित्र नहीं बिकते या इन्हें जाननेवाले लोगों की संख्या नगण्य हैं, पर टीवी वाले ठग बाबा के फोटो खुलेआम बिक रहे हैं, उन्हें लोग जानते हैं। हमारे देश में जितने भी संत हुए, उन्होंने देश को सिर्फ दिया, क्योंकि संत केवल देता हैं, वो देश से लेता नहीं। ठीक उसी प्रकार जैसे गंगा बहती रहती हैं, वो हमेशा उपकार करती हैं, चाहे लोग उसमें मैला बहाये अथवा उससे खुद को तृप्त करने का कार्य करें। ऐसे होते हैं संत। पर आज के संत को देखिये, बाबाओं को देखिये।

ये बाबा टेंट – मर्चेंट के कारोबारियों से शादी में लगनेवाले एक कुर्सी पर बैठता हैं, तीन तसिया का जो खेल होता हैं, ठीक उसी प्रकार दस-बीस लोगों को जुगाड़ करता हैं। जो बाबा के ट्रिक के अनुसार सवाल करता हैं और बाबा भी उसी प्रकार ट्रिक के अनुसार जवाब देता हैं और इसी ट्रिक के जाल में, टीवी देख रहा, आम आदमी फंस जाता हैं, और अपनी जिंदगी के, मेहनत के सारे पैसे, इन ठगों पर लुटा देता हैं, वह भी जयजयकार कर। मैं जहां रहता हूं, वहां एक महिला रहती हैं, वो अपने माता-पिता को कभी सम्मान नहीं देती और न ही पति को सम्मान करती हैं, पर जरा देखिये इन्हें, जैसे ही सुबह होता हैं, ये टीवी खोलकर, उक्त ठग को देखने के लिए, सुनने के लिए दोनों हाथ जोड़कर बैठ जाती हैं। ये तो आजकल टीवी वाले इस ठग की प्रचार प्रसार भी कर रही हैं। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि टीवी वाले थर्डआई वाले बाबा ने कहा है कि घर में शिवलिंग नहीं रखना चाहिए, जिसे सुनकर सभी टीवी देखनेवाले लोगों ने अपने घर के शिवलिंग मंदिर में रख दिये।

मैंने अपनी पत्नी से पूछा – तुम्हारा क्या विचार हैं। उनका कहना था कि जब एकलव्य, द्रोणाचार्य की प्रतिमा बनाकर, स्वंय को प्रतिष्ठित करा लेता हैं, तो भला मैं, इस एकलव्य की गुणग्राही बातों को त्याग, एक ठग की बात पर क्यूं जाउं। मेरा हृदय प्रसन्न हो गया। चलो कोई तो हैं, जो इन ठगों से खुद को अलग कर रहा हैं, पर ऐसे लोगों की संख्या कितनी हैं। सवाल तो ये हैं….। यहीं नहीं एक दक्षिण के चैनल से बाबा आते हैं, शनि के नाम पर खूब डराते हैं। पहले वे दिल्ली के राष्ट्रीय चैनलों पर आकर आम जनता को खूब डरा चुके हैं, पर हमारे घर के बच्चे, इनसे नहीं डरते। जैसे ही चैनल पर आते हैं। हमारे बच्चे, हमें बुलायेंगे, बाबा आ गये, देखिये- सुनिये और हंसते हंसते लोट पोट हो जाइये। सचमुच में, ये बाबा के हाव-भाव, फिल्मों में काम करनेवाले हास्य कलाकार, जगदीप, असरानी, धूमल व राजेन्द्रनाथ जैसे लगते हैं, और बात भी वहीं। यानी पूरे देश में आजकल टीवी चैनलों का एक ही कार्यक्रम बन गया हैं। देश व समाज भाड़ में जाये, पैसे कैसे कमाये जाये। ये ध्यान में रखकर स्लॉट बेचो, और अपने देश में धर्म कुछ ज्यादा ही बिकता हैं, और गर हिंन्दू हैं तो कहना ही नहीं, क्योंकि अन्य धर्मों में बाबाओं की उतनी पूछ नहीं, पर हिन्दुओं में बाबाओं की फौज हैं, किसी को पकड़ लो, पैसे ले लो, पूरे देश में बिकवाने का जिम्मा ले लो और शुरु हो जाओ।

अभी तो थर्ड आई वाले बाबा खूब दिखाई पड़ रहे हैं, कल फोर्थ आई और फाइव तथा सिक्स आई वाले बाबा भी दिखाई पड़ जाये। तो इसे अतिश्योक्ति न समझेंगे। यहीं नहीं, आजतक हमें ये समझ में नहीं आया कि ये बाबाओं की फौज, शादी करा देती हैं, रेलवे टिकट कन्फर्म करा देती हैं, रोजगार दिला देती हैं, पर एक साधारण आदमी को प्रधानमंत्री क्यों नही बना देती। पूरे देश में जो गरीबी हैं, उसे फूंकमार कर दूर क्यों नहीं कर देती, देश में अशिक्षा जो फैली हैं, उसे फूंकमारकर दूर क्यों नहीं कर देती, या देश में जो भ्रष्टाचार पनपा हैं, उसे दूर क्यों नहीं करती और जब सारे समस्याओं का हल इन बाबाओं के पास हैं और टीवी वाले जो दिखाते हैं, वे टीवी वाले और बाबा इस समस्यारुपी शब्द को ही फूंकमार सदा क लिए क्यों नहीं मिटा देती। और जब ये ऐसा नहीं कर सकते तो समझ लीजिये कि पूरी दाल काली हैं।

इसका मतलब हैं कि मीडिया, देश के लिए खतरा बन चुकी हैं और इन खतरों से देश की युवाओं को, दो दो हाथ करने के लिए तैयार रहनी चाहिए। आज से कोई बीस साल पहले, कोई जर्नलिज्म की डिग्री लेने के लिए हाय तौबा नहीं मचती थी, पर आज देश के युवा मीडिया में जाने को कुछ ज्यादा ही आतुर हैं। टीवी के ग्लैमर ने इन्हें मीडिया की ओर ज्यादा झुकाया हैं और जहां ग्लैमर होता हैं, वहां गंदगी होती ही हैं, क्योंकि ये देश व समाज की रक्षा के लिए आये ही नहीं, ये तो आये हैं- ग्लैमर के लिए। तो ग्लैमर आयेगा कहां से। पैसों से। और पैसे आयेंगे कहां से। इन्हीं ठगों से, जिन्हें हम आजकल टीवी वाले बाबा के नाम से जानते हैं। अब तो हम ईश्वर से यहीं प्रार्थना करेंगे, कि हे ईश्वर, अपने देश व समाज को, आसन्न मीडिया के खतरों से बचाओं, नहीं तो देश बनने से रहा। चीन और पाकिस्तान को क्या जरुरत हैं – भारत पर हमले की। भारत को खोखला करने के लिए यहां की मीडिया और ठग बाबाओं की गाढ़ी दोस्ती काफी हैं, इस देश को धूल में मिलाने के लिए, देश के मानमर्दन के लिए।

लेखक कृष्‍ण बिहारी मिश्र झारखंड में पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

 

 
 

 

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