न्यू मीडिया के सामने आ जाने से मेनस्ट्रीम मीडिया के महारथियों की खोज-खबर भी मिलती रहती है. इन दिनों दो वेबसाइटें काफी चर्चा में हैं. एक वेबसाइट अभिसार शर्मा को टारगेट किए हुए है तो दूसरी वेबसाइट दीपक चौरसिया को. मुंबईवाला डाट काम नामक वेबसाइट ने अभिसार शर्मा और उनकी आईआरएस अधिकारी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं तेलगुमिर्ची डाट काम ने दीपक चौरसिया को गिरफ्तार न किए जाने का मुद्दा उठाया है. दोनों वेबसाइटों पर खबरें अंग्रेजी में हैं.
अभिसार शर्मा के खिलाफ मुंबईवाला डाट काम पर जो खबर है वह सत्ता-सिस्टम से लड़ रहे आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव के समर्थकों-शुभचिंतकों द्वारा प्रायोजित लगती है तो तेलगुमिर्ची डाट काम पर जो खबर है वह आसाराम समर्थकों द्वारा दीपक चौरसिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा प्रतीत होता है.
अभिसार शर्मा और एनडीटीवी से संबंधित मुंबईवाला डाट काम की खबर को फेसबुक-ट्विटर पर खूब शेयर किया जा रहा है. पत्रकार अमरेंद्र किशोर इस लिंक को शेयर करते हुए लिखते हैं- ''Now again a new SAANPNATH''. दुष्यंत राय ने इस खबर को यह लिखकर शेयर किया है… ''सच का सामना . . . . . . . सच के साथ … NDTV''. वहीं समरेंद्र सिंह ने इस खबर को शेयर करते हुए लिखा है- ''काश! ये सच नहीं हो!''. इनके अलावा सौमित सिन्ह, जयंत घोषाल आदि ने भी इस खबर को शेयर किया है.
नीचे दोनों वेबसाइटों पर प्रकाशित खबरों का संक्षिप्त स्क्रीनशाट और लिंक दिया जा रहा है. भड़ास को दोनों ही खबरों का लिंक मेल के जरिए मिला है, जिसे कुछ लोगों ने भड़ास के संज्ञान के लिए भेजा है. भड़ास दोनों एकपक्षीय खबरों में पार्टी बने बिना सिर्फ इस लिहाज से यहां इनके बारे में जिक्र कर रहा है, प्रकाशन कर रहा है ताकि लोगों को इन मीडिया महारथियों के बारे में चल रहे, छप रहे सच-झूठ के बारे में पता चल सके.
ये हैं खबरों के लिंक व संबंधित स्क्रीनशॉट…
http://mumbaiwalla.com/prannoy-sponsor-rs-1-crore-holiday-small-time-ndtv-anchor/
http://www.telugumirchi.com/en/other-news/arrestchorasia.html
इस बारे में अभिसार शर्मा और दीपक चौरसिया, दोनों के करीबियों से भड़ास ने बात की. अभिसार के करीबियों का कहना है कि मुंबई वाला डाट काम में प्रकाशित खबर झूठ पर आधारित है. अभिसार शर्मा बीबीसी में स्ट्रिंगर नहीं बल्कि प्रोड्यूसर हुआ करते थे. लंदन का हालीडे का जो मामला है वह कंपनी ने सिर्फ अभिसार को ही नहीं बल्कि उस के कई इंप्लाइज को दिया था, पर्क के रूप में. एक करोड़ का आंकड़ा कहां से आया… ये सब आरोप एसके श्रीवास्तव ने लगाए हैं… पर आरोप के समर्थन में कुछ तो प्रूफ हो ना…. अभिसार शर्मा बीबीसी लंदन के स्टाफ थे… झूठ ये भी है कि अभिसार ने एनडीटीवी अक्टूबर 2003 में ज्वाइन किया. अभिसार ने जनवरी 2003 में एनडीटीवी के हिस्से बने. अभिसार के ज्वाइन करने के बाद उनकी आईआरएस अधिकारी पत्नी ने कभी एनडीटीवी को एसेस नहीं किया. जो भी दुष्प्रचार अभियान अभिसार और उनकी आईआरएस अधिकारी पत्नी के खिलाफ चलाया जा रहा है, उसके पीछे एसके श्रीवास्तव है, जिसे अदालत दो बार इन्हीं घटिया हरकतों के कारण जेल की सजा सुना चुकी है. सारी बातों का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में किया जा चुका है. पर एसके श्रीवास्तव झूठ का सहारा लेकर अभिसार और उनकी पत्नी पर अटैक कर रहा है. इन लोगों के पास इस बात के कोई सुबूत नहीं है कि एक करोड़ रुपये खर्च किए गए. ये सिर्फ मनगढ़ंत, अनर्गल, मानहानि कारक और दुष्प्रचार है. एक और बात है. सेक्सुअल हैरसमेंट पर कमेटी की फाइंडिंग्स को खुद सरकार ने रद्द कर दिया है और नई कमेटी बनाई है, जो अब जांच कर रही है. क्या एसके श्रीवास्तव ने इसका जिक्र कहीं किया है? बाकी, पूरे मसले पर कोर्ट के फैसले को ध्यान से देखना और पढ़ना चाहिए. इस लिंक के जरिए सच्चाई को जाना जा सकता है. इसमें आपको समझ में आ जाएगा कि इसने कैसी भाषा का इस्तेमाल किया है.
http://lobis.nic.in/dhc/VIB/judgement/10-01-2014/VIB10012014CCA12013.pdf
उधर, दीपक चौरसिया के करीबियों का कहना है कि घटिया आदमी आसाराम और उसके बेटे नारायण के खिलाफ इंडिया न्यूज चैनल पर लगातार खबरें दिखाने के कारण आसाराम और नारायण साईं के लोग करोड़ों खर्च कर दीपक चौरसिया के खिलाफ कुत्सित अभियान चलवा रहे हैं. इस अभियान के तहत दीपक को जातिसूचक तरीके से अपमानित किया जा रहा है और अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं. ऐसे कुत्सित अभियानों से इंडिया न्यूज और दीपक चौरसिया आसाराम के खिलाफ अभियान बंद नहीं करने वाले हैं क्योंकि ऐसे फ्राड बाबाओं को सबक सिखाए जाने के बाद ही किसी अन्य बाबा की घृणित कर्म करने की हिम्मत नहीं पड़ेगी.






