मुख्‍यमंत्री के गृह जनपद में ही अवैध खनन का काला कारोबार

इटावा : यमुना नदी में खनन माफिया व पुलिस की मिलीभगत से करोड़ों रुपए कीमत की बालू (रेत) का अवैध खनन कर सरकार को लाखों रुपए राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।  पुलिस की मिलीभगत के चलते खनन माफिया इतने दबंग हो गए है कि खुलेआम वन विभाग की जमीन पर पचासों लाख रूपए कीमत की बालू का डंप किये हैं और खनन विभाग से लेकर आला अधिकारी तक आँखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। यमुना नदी में विगत कई वर्षों से अवैध खनन का काला कारोबार निरंतर जारी है जबकि यमुना नदी में खनन करने पर पूर्णतः रोक लगी  हुई है।

सूबे के मुखिया अखिलेश यादव के गृह जनपद इटावा में मायावती के शासन काल से यमुना नदी में सफ़ेद बालू के अवैध खनन का काला कारोबार निरंतर जारी है। पुलिस और खनन अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा अवैध खनन का काला कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा, जबकि सूबे में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद में तैनात पुलिस के अधिकारी आज भी मायाराज की तरह 'माया' को जमकर लूट रहे है। उन्हें इस बात का इल्म नहीं कि इटावा सूबे के मुखिया का गृह जनपद है। शहर किनारे से होकर बहने वाली यमुना नदी में बालू के खनन पर रोक लगी है, उसके बाद भी अवैध खनन माफिया करोड़ों रुपए के बालू का ट्रैक्टरों से अवैध खनन कर लाखों रुपए राजस्व का सरकार को चूना लगाने में लगे हैं। सरकारी निर्माण में बहुतायत में काम आने वाली इस सफ़ेद बालू के अवैध खनन से पुलिस और खनन माफिया सरकार को ठेंगा दिखा रहे हैं।

यमुना के बालू का प्रयोग सरकारी काम में होने के बाद भी जनपद के आला अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं। उन्‍हें यह दिखाई नहीं दे रहा है कि यह बालू कहां से आ रहा है जबकि यमुना से बालू निकालने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। विगत वर्षों में जब यमुना नदी में बालू खनन के ठेकों की नीलामी होती थी तो सरकार को लाखों रुपए का राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन विगत कई वर्षों से ठेके न उठाये जाने के बाद खनन पर रोक लगा दी गयी है। खनन माफिया इतने दबंग हैं कि खुलेआम खनन करते हैं और ट्रैक्टरों के द्वारा खनन कर बालू बाजार ले जाते हैं और दो हज़ार से लेकर तीन हज़ार रुपए कीमत पर एक ट्रैक्टर बालू बेच कर लाखों रुपए का प्रतिमाह बंदरबांट करने में लगे हुए हैं। पुलिस व जिला प्रशासन खनन माफियाओं के हाथों की कठपुतली बना हुआ है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टरों से बालू का अवैध खनन कर बेचने को ले जाते हुए खुलेआम देखा जा सकता है, जबकि ट्रैक्टर भी अवैध हैं, क्योंकि ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए रजिस्‍टर्ड किए गए हैं न कि व्यवसाय करने के लिए।

अवैध खनन माफियाओं से पुलिस को भी मोटी कमाई होती है। बताया जाता है कि पुलिस को प्रति ट्रैक्‍टर चार से पांच सौ रुपये तक मिलता है। इसके बाद ही खनन का इजाजत दी जाती है। इससे जाहिर होता है कि पुलिस-प्रशासन और खनन माफिया का मजबूत गठजोड़ है। कहने को तो यह यूपी के नए नवेले और युवा सीएम का गृह जनपद है, लेकिन लूट मायाराज वाली ही मची हुई है। रसूखदार खनन माफियाओं को पूर्व में सत्‍ताधारी नेताओं की परिक्रमा करते हुए खुलेआम देखा जाता था। अब भी तस्‍वीर बदल गई है पर तकदीर वैसी ही है। अगर इन पर रोक नहीं लगा तो एमपी जैसा घटना यहां भी घटित हो सकता है।

इटावा से विकास मिश्रा की रिपोर्ट.

 

 
 

 

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