मुरादाबाद में हिंदुस्‍तान के एक साल पूरे

व्यस्तता के कारण पिछले कई दिनों से मैं फेसबुक से दूर था। आज हिंदुस्तान मुरादाबाद के पहले स्थापना दिवस पर सुबह से मिल रहे बधाई संदेशों को देख कर लगा कि फेसबुकिया मित्र मंडली के साथ दिल की बात साझा की जाये। ठीक एक साल पहले हमने "जिगर मुरादाबादी" के शहर में हिंदुस्तान का आगाज करते हुए कहा था कि अख़बार केवल ख़बरों और चित्रों से नहीं बनता। यह हजारों-लाखों लोगों के संग-साथ, उनके सुख-दुःख में शामिल होने से बनता है।

लोगों की आवाज बने बिना कोई अख़बार सम्पूर्ण नहीं हो सकता। लोग उसे तवज्जो देते हैं जो उनकी तरक्की में हमसफ़र बने। हमने एक साल के दौरान नए आयाम स्थापित किये। अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए हर उस मुद्दे को उठाया जिसकी दरकार शहर को थी। हमने केवल समस्याओं की बात नहीं की बल्कि समाधान हो जाने तक उसका पीछा किया। जरुरत पड़ी तो हमारी टीम के सभी साथियों ने मैदान में उतर कर श्रमदान और रक्तदान भी किया। आपके और हमारे साझा प्रयास का ही नतीजा है कि उजाड़ पड़ा "कंपनी बाग" हरीभरी बगिया की शक्ल में तब्दील होता दिख रहा है।

अपने तमाम मित्रों-शुभचिंतकों, मार्गदर्शकों और सुधि पाठकों को तहे दिल से बधाई। खासतौर पर हिंदुस्तान परिवार के सभी वरिष्ठजनों का आभार जिनकी लीडरशिप में हम आगे बढे और सभी सहयोगियों को साधुवाद जो इस सफ़र में हमारे साथ रहे।

हिंदुस्‍तान, मुरादाबाद के संपादक मनीष मिश्रा के फेसबुक वॉल से साभार.

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