मुर्गे-बकरे काटने वालों, होटल चलाने वालों को समाजसेवक बताकर सम्‍मानित किया अमर उजाला ने

अमर उजाला समाचार पत्र के लोकल पुल आऊट माई सिटी की पहली वर्षगांठ पर रविवार को कुरुक्षेत्र के केसल मॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया और जिले के कई लोगों को समाजसेवा के नाम पर सम्मानित किया गया। उसे भी जिनका समाजसेवा के क्षेत्र में रत्‍तीभर भी योगदान नहीं रहा। कहने को तो अमर उजाला बोर्डों पर बड़ा-बड़ा 'जोश सच का' लिखता है और समाज को सही दिशा दिखाने की बात करता है, लेकिन कल कुरुक्षेत्र के कार्यक्रम में अमर उजाला की कथनी और करनी में साफ अंतर नजर आया।

अमर उजाला के कुरुक्षेत्र प्रभारी राजेश शांडिल्य ने लोगों के सामने चापलूसी की सारी हदें पार कर दीं और ऐसे लोगों को सम्मानित करवा दिया, जिन्होंने कुरुक्षेत्र का नाम डूबो रखा है। जैसे एक होटल मालिक को समानित किया गया और उसके नाम के आगे समाजसेवी लिख दिया गया। अखबार का काम समाजसेवी लिखना नहीं सच्‍चाई लिखना होता है। धर्मनगरी में रोजाना  हरियाणा सरकार द्वारा घोषित ड्राई एरिये में सैंकड़ों मुर्गे-बकरे काटकर बेचने वाले को अमर उजाला द्वारा समाजसेवी के नाम पर सम्मानित किया गया। यही नहीं कई अन्य लोगों को भी समाजसेवा के नाम पर सम्मानित किया गया, जबकि अगर उनसे पूछा जाए कि उन द्वारा समाज के लिए क्या सेवा की गई है या ऐसा क्या कार्य किया गया है तो वह बता भी नहीं पाएंगे। लेकिन जब अंधा रेवडिय़ां बांट रहा होता है तो वह अपनो को ही देता है। ऐसा ही कल के कार्यक्रम में हुआ।

जिला प्रभारी की पत्नी ने जिस स्कूल में नौकरी की, उस स्कूल के प्रिंसिपल को सम्मानित किया गया। यही नहीं आज जिस कॉलेज में वह नौकरी कर रही हैं, उस कॉलेज की संचालिका को जागरुक किसान महिला कह कर सम्मानित किया गया। सम्मानित करने वालों की लिस्ट तो बहुत लंबी है, लेकिन एक ऐसे व्यक्ति को भी सम्मानित किया गया जो कि आज कल अखबारों की सुर्खियों में है, क्योंकि ये व्यक्ति छपास रोग से पीडि़त है और जब तब अखबार में रोजाना इसका नाम न छपे तो यह छपास रोग से तड़पता रहता है। कहने को तो यह व्यक्ति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रोफेसर है, लेकिन जोड़-तोड़ के माहिर क्योंकि नौकरी में तो चौटाला सरकार में लगे और कोर्डिनेटर हुडडा साहब की सरकार में बने तो ऐसे विवादित व्यक्तियों को सम्मानित करके अखबार अपनी भद पिटवा रहा है। न कि समाज को सही दिशा दे रहा है।

लोगों में यह भी चर्चा थी कि मंच से जो विजेता टीमें बताई गईं उनकी प्रतियोगिता कब और कहां हुई थी, किसी को नहीं पता? अमर उजाला के ही स्थानीय लोग चर्चा कर रहे थे। कहने को तो करीब दो दर्जन लोगों को सम्मानित किया गया, लेकिन कुरुक्षेत्र का नाम आज जिस कारण विश्व मानचित्र पर है या समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य जिन्होंने किए हैं, समाज की समस्याएं जिन्होंने उठाई हैं, समाज में बुराइयां जिन्होंने रोकी हैं ऐसे किसी भी व्यक्ति को सम्मानित नहीं किया गया, जो कि अपने आप में एक यक्ष प्रश्र है। जिला ब्‍यूरो प्रमुख जो कि सीधी लाइन नहीं लिख सकते और अपना लिखा थोड़ी देर में खुद नहीं पढ़ सकते ऐसे व्यक्ति की देखरेख में अगर समाचार पत्र चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब अमर उजाला की जगह, अमर अंधेरा हो जाएगा।

अनिल गोयल

anillgoel@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *