मुलायम की प्राब्लम उम्र है या सीबीआई?

Mukesh Kumar : कोई बताए कि मुलायम सिंह को क्या हो गया है। उम्र उन पर हावी हो गई है, उनकी इंद्रियाँ शिथिल पड़ गई हैं या सरकार द्वारा लगाई गई सीबीआई से वे परेशान हैं। अखिलेश सरकार की नाकामी से निराश हैं या फिर प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा के चलते उनका मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है। एक दिन सरकार गिराने की बात करते हैं और अगले दिन चलाने की। उनको सत्यवादी बता देते हैं जिनका पूरा कारोबार ही असत्य पर टिका हुआ है।

बेटा अलग परेशान है। पिताश्री ने पुत्र को स्वयं सत्ता में बैठाया और अब उसे ही नकारा साबित करने पर आमादा हैं। सब जानते हैं कि अखिलेश मुलायम की खड़ाऊँ रखकर शासन चला रहे हैं और चला क्या रहे हैं उनसे चलावाया जा रहा है। उनके सत्ता-रथ के कई-कई सारथी हैं। सब अपनी-अपनी दिशा में ले जाना चाहते हैं। नतीजा ये हुआ है कि रथ वहीं खड़ा हो गया है। मीडिया के लिए तो वरदान हैं मसाजवादी मुलायम। मध्यावधि चुनाव का खेल खेलने के लिए अवसर जुटाते रहते हैं।

मुलायम का मतलब चाहे जो हो, चैनलों की चटपटी चर्चा सरकार के पतन से तीसरे मोर्चे के गठन तक हिलोरें मारने लगती है। ऐसे में अमर सिंह की कमी खलती है। वे होते तो जाने कितनी बातें होतीं, कितनी परोक्ष और सीधी चेतावनियाँ होतीं। फिल्मी डायलॉग होते और जाने कितनी भेंट-मुलाकात वे अब तक कर चुके होते। वे होते मसाजवाद के नए नए रूप देखने को मिलते। लेकिन क्या करें भारतीय राजनीति का दुर्भाग्य और मनमोहन सिंह का सौभाग्य। वे 2014 तक देश के सिर पर सवार रहेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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