मृदुला गर्ग को इतने बुढ़ापे में (जब वो पिचहत्तर साल की हो गयी) साहित्य अकेडमी पुरस्कार मिलने के मायने

Vimal Kumar : मृदुला गर्ग को साहित्य अकेडमी पुरस्कार मिला. वो हिन्दी की तीसरी लेखिका हैं जिन्हें ये पुरस्कार मिला. इस नाते तो ये अच्छा है कि लेखिकाओं को ये सम्मान मिला. पर ये सवाल है कि इतने बुढ़ापे में जब वो ७५ साल की हो गयीं. उन्हें व्यास सम्मान और वाग्देवी सम्मान मिला चुका है. अब तो उनका लेखन भी उतार पर है लेकिन मृदुला जी अच्छी महिला हैं.

उनकी एक कहानी मुझे पसंद है जिसमें एक बूढी औरत अपने पुराने प्रेमी से बुढ़ापे में मिलती है और उसके प्रेम का अहसास करती है. आउटलुक में मैंने उस पर लिखा था. मृदुला जी का अधिक साहित्य नहीं पढ़ा पर वो बिना किसी संगठन और गुट के चुपचाप लिखती रहीं. वे तीनों बहनें लेखन में रहीं. तब इतनी लेखिकाएं हिन्दी में नहीं थी. बहरहाल बधाई उनको पर मन्नू भंडारी को ये सम्मान नहीं मिलने का दुःख तो जरूर है.

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विमल कुमार के फेसबुक वॉल से.

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