मेरी और पत्रकार राजेंद्र सिसोदिया की किस मामले में है पेशी?

एसीजे (जेडी) द्वितीय की अदालत में मेरी पेशी होगी। इस आशय का समन (पेशी वारंट) लेकर एक पुलिस कर्मी आज सुबह देशधर्म कार्यालय में आया था, जिसमें 8 मई 2013 को एसीजे (जेडी) द्वितीय की अदालत में पेश होने का उल्लेख है। सवाल उठता है कि किस मामले में है पेशी? ऐसा क्या अपराध किया?

वाद संख्या 307/2012 धारा 504/506 में वादी राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट ने 5 लोगों को अभियुक्त बनाया है, इनमें मैं (देवेश अवस्थी पुत्र स्व. रामशरण अवस्थी निवासी लालपुरा इटावा) व पत्रकार राजेन्द्र सिसोदिया पुत्र गंगाराम निवासी गाड़ीपुरा इटावा शामिल हैं। तीन अन्य हैं शिवमंगल यादव, बृजमोहन और अनिल कुमार। इस तरह हम पांचों की पेशी है। मामला क्या है? हम किसी को कुछ पता नहीं। किन्तु यह सर्वविदित है कि वादी राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट चर्चित मंजूकांड मुकदमा नं. 702/11 का नामजद आरोपी हैं, जिसमें मैं (देवेश शास्त्री), शिवमंगल यादव व अनिल कुमार गवाह हैं।

मंजूकांड मुकदमा नं. 702/11 के वादी व गवाहों तथा उनके मिलने जुलने वालों को फर्जी मुकदमों में फंसाने की कवायद में लगे वकील साहब (राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट) द्वारा फिलहाल यह चौथा मुकदमा है, जिसमें मेरी पेशी होनी है, वकील साहब ने मुहल्ले में अफवाह उड़ानी तेज कर दी है कि 8 तारीख को सलाखों के अंदर कर दिया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि 04.08.2011 को राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट के अनुज धर्मेंन्द्र कुमार वर्मा की दूसरी पत्नी श्रीमती मंजू को मौत के घाट उतारकर शव को गायब कर दिया गया। मृतका के पिता श्री बंशीलाल पुत्र इनेमल निवासी इंदौर (मध्य प्रदेश) ने इटावा कोतवाली में श्री रामबाबू वर्मा (ससुर), श्री रमाकांत वर्मा, श्री राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट (जेठ), श्री धर्मेन्द्र कुमार वर्मा (पति), बसंत व कैंका वर्मा (सौतेले पुत्र) के खिलाफ अभियोग मु. नं. 702/2011 धारा 364 में पंजीकृत कराया।
यहीं से शुरू हुआ तथाकथित वकील राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट का गोरखधंधा –

1- अनुच्छेद 156 (3) के तहत मुकदमा नं 702/2011 के कुछ गवाहों व उनके साथियों के खिलाफ अपनी भाभी श्रीमती लता वर्मा पत्नी रमाकान्त के माध्यम से डकैती का फर्जी मुकदमा नं 13/2012 धारा 395, 397 में दर्ज कराया, जो कई दौर की विवेचना में फर्जी पाया गया।

2- अनुच्छेद 156 (3) के तहत मुकदमा नं 702/2011 के वादी श्री बंशीलाल पुत्र इनेमल निवासी इंदौर (मध्य प्रदेश) व उनके परिजनों को नवजात मृत-शिशु की हत्या के फर्जी मुकदमा नं 332/2012 में उलझाने का प्रयास किया, जो विवेचना में फर्जी पाया गया।

3- यह कि वर्ष 2012 की होली पर मेरे घर में श्री राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट की ओर से ईंट पत्थर फेंके गये तथा मुकदमा नं. 702/11 के अन्य गवाहों के यहां उक्त वकील के परिजनों ने जाकर मारपीट की, जब हम लोगों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र दिये तो उक्त वकील ने प्रशासन को गुमराह करते हुए हम सभी पीड़ितों को शांतिभंग की आशंका की धारा 107/116 में पाबंद करवा दिया।

4- राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट ने हार्टपेसेंट अपनी वृद्धा मां की उपचार के दौरान हुई मौत पर फर्जी कहानी गढ़कर अनुच्छेद 156 (3) के तहत मुकदमा नं 702/2011 के मुख्य गवाह मुझ (देवेश शास्त्री) तथा 6 अन्य के खिलाफ मुकदमा नं 587/2012 धारा 141, 304 के तहत दर्ज कराया, जिसकी विवेचना लगभग 6 महीने से जल रही है। उक्त वकील विवेचना पूरी होने से पहले ही दरख्वास्त देकर लगातार जांच हस्तांतरित करवाता चला आ रहा है।

5- वाद संख्या 307/2012 धारा 504/506 में वादी राजेश कुमार वर्मा एडवोकेट ने 5 लोगों को अभियुक्त बनाया है, जिसमें 8 मई 2013 को एसीजे (जेडी) द्वितीय की अदालत में हम पांचों की पेशी होनी है।

!!सत्यमेव जयते!!

देवेश शास्त्री

साहित्यकार/पत्रकार

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