मेरी खबर के कारण जागरण वालों ने यशवंत और अनिल पर अत्याचार किया : बीना शुक्ला

बीना शुक्‍ला जागरण, कानपुर की कर्मचारी हैं. इनके साथ ही जागरण प्रबंधन ने अनुचित व्‍यवहार किया था. बीना शुक्‍ला के साथ जागरण में घटे घटनाक्रम की खबर को भड़ास ने प्रकाशित किया था. इसी खबर के लिए भड़ास की तरफ डीजीएम नितिन (नितेंद्र) श्रीवास्‍तव का पक्ष लेने के लिए फोन किया गया था. बाद में जागरण प्रबंधन ने इसी फोन कॉल को रंगदारी मांगने का फोन बताकर नोएडा में मामला दर्ज कराया, वह भी चार दिनों बाद, जबकि अगर रंगदारी मांगी गई थी तो उसी समय मामला दर्ज कराया जाना चाहिए था, लेकिन मामले में सच्‍चाई नहीं थी, इसलिए कहानी गढ़कर चार दिन बाद रंगदारी का मामला यशवंत सिंह एवं अनिल सिंह पर दर्ज कराया गया.

जबकि सच यह है कि नितेंद्र श्रीवास्‍तव को ना तो इसके पहले कभी भड़ास की तरफ से फोन किया गया था और ना ही कभी उसके बाद किया गया. परन्‍तु भड़ास पर प्रकाशित पत्रकारों की छंटनी की खबरों से बौखलाए जागरण जैसे बड़े संस्‍थान ने सारी नैतिकता और मर्यादाओं को ताख पर रखते हुए फर्जी मामला दर्ज करा दिया. यशवंत और अनिल को ज्‍यादा से ज्‍यादा समय तक जमानत नहीं मिलने देने के लिए हर संभव उपाय किए गए. इसकी जानकारी जब देर सबेर बीना शुक्‍ला को मिली तो उन्‍होंने भड़ास को पत्र भेजा, जिसे हू-ब-हू प्रकाशित किया जा रहा है….. 


यशवंत जी, नमस्ते.. आपके और अनिल जी के साथ हुए दुर्व्यवहार और जेल भेजे जाने के संबंध में मैंने जाना. मुझे बहुत अफसोस है कि मेरी न्यूज (जागरण, कानपुर में यूनिट हेड, सीजीएम एवं आईटी हेड पर महिलाकर्मी ने लगाया यौन शोषण का आरोप) भड़ास साइट पर देने के बाद आपके और आपके साथी अनिल जी के साथ काफी दुर्व्यवहार एवं अत्याचार किया गया। आप लोगों पर मुकदमा लादा गया और जेल भिजवाया गया। जमानत न होने देने का अधिकतम प्रयास जागरण वालों ने किया। यह गलत और निंदनीय है।

कहने को तो जागरण नं. 1 अखबार है, लेकिन उसकी हरकतें बहुत ही घटिया किस्म की है। मैंने भड़ास साइट पर पूरा विवरण पढ़ा तब मुझे काफी दुख हुआ। क्या नं. 1 अखबार वाले खुलेआम गुण्डागर्दी करते रहेंगे प्रशासन आंखें बंद कर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा। जागरण जैसे संस्थान में गलत लोगों का साथ दिया जाता है। प्रबंधक महोदय को उच्चाधिकारी जितना दिखाते एवं बताते हैं वही दिखाई देता है। प्रोडक्शन हेड प्रदीप अवस्थी बहुत ही बदतमीज एवं घटिया व्यक्ति है। मेरे साथ कई बार बदतमीजी एवं छेड़खानी की, मुझे बदनाम किया। मैंने डीजीएम नितिन श्रीवास्तव जी से कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टा मुझे ही हमेश गलत ठहराते हैं और मेरे बारे में अपशब्द कहते हैं एवं बदनाम करते हैं। एक डीजीएम को यह सब शोभा नहीं देता, वो हमेशा गलत लोगों का साथ देते हैं, डायरेक्टर एवं प्रबन्धक महोदय को गलत जानकारी देते हैं। वहां छोटे कर्मचारी को कीड़ा-मकौड़ा समझा जाता है। आपको जो भी जानकारी मेरे केस में करनी है वी सीओ स्वरूप नगर, कानपुर से की जा सकती है। वे ही जांच कर रहे हैं। महिला आयोग से 30 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी गयी है। अभी तक क्या कार्रवाई हुई है वहीं से पता चलेगा।

आपने जून में जो भी न्यूज साइट पर दी थी उसमें यह था कि मेरे साथ संस्थान में यौन शोषण हुआ, जबकि 30.5.12 को मैंने चेयरमैन से उच्चाधिकारियों की शिकायत की थी, इसलिये लगभग 2 घंटे तक मुझे कमरे में बंद करके सादे कागज पर हस्ताक्षर का दबाव देते रहे। मैं वहां से किसी तरह अपनी जान बचा कर भागी नहीं तो कोई भी दुर्घटना मेरे साथ घट सकती थी। फिर मुझपर झूठे आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया गया। फिर घरेलू जांच के नाम पर 5 महीने तक मुझे मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। कोई आरोप साबित न होने पर अपनी गलती छुपाने के लिये मेरा ट्रांसफर उन्नाव कर दिया गया। घरेलू जांच खत्म होने एवं बहाल होने के बाद भी जून 2012 से नवंबर 2012 का मेरा 6 महीने का वेतन एवं 6 महीने का फंड भी नहीं जमा किया गया। मैंने जब अपना बकाया वेतन मांगा तो मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया। 11 महीने से मैं आर्थिक कष्ट से गुजर रही हूं कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है।

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