मैगजीन ‘वी द पावर’ के नाम पर हो रहा प्लाट बिकवाने और ठगी का धंधा

एक राशिद नसीम हैं जो 'वी द पावर' के चेयरमैन हैं. इन्होंने अपने लाभ के लिए मैगजीन की शुरुआत की. इसके सम्पादक संजय श्रीवास्तव हैं जो राशिद के लिए जमीन बिकवाने और नेताओं को मैनेज करवाने और उसके काले कारनामों पर पट्टी डालने का काम करते हैं. संजय श्रीवास्तव के गुरू प्रभात रंजन दीन रहे हैं. संजय ने प्रभात रंजन से पत्रकारिता सीखी है लेकिन जब संजय कैनविज टाइम्स में थे तो अपने गुरू और उस संस्थान में नौकरी देने वाले प्रभात रंजन दीन को ही हटाने के लिए लाबिंग कर दिये. कैनविज के चेयरमैन को जब जाकर हकीकत पता चली तो उन्होंने संजय को नौकरी से निकाला.
 
फिर संजय श्री टाइम्स में गया तो वहां भी श्री टाइम्स के सम्पादक को हटाने के लिए लाबिंग कर दिया था. लेकिन वहां भी संजय की हकीकत सामने आ गई. उसने श्री टाइम्स में अपने रेफरेंस से छपवाए होमगार्ड विभाग के साठ हजार रूपये के विज्ञापन का कोई लेखा जोखा नहीं दिया. ये बात जब सामने आई तो कम्पनी ने उसे वित्तीय हेराफेरी के आरोप में बाहर कर दिया. फिर संजय श्रीवास्तव ने अपनी हकीकत छुपाते हुए मैगजीन लांच करवा दिया. जहां संजय को श्री टाइम्स में केवल 18000 रूपये मिलते थे वहां वह चालीस हजार रूपये लेकर सम्पादक बन बैठा. 
 
मजे की बात ये है कि यहां जैसे राशिद नसीम जमीन के कारोबार में लोगों को ठग रहे हैं ठीक वैसे संजय भी इस इंतजार में हैं कि इस बार जैसे ही मामला उल्टा हुआ वो मैगजीन की अपनी दुकान खोल लेंगे. इसके लिए संजय किसी पॉलिटिकल आदमी से विज्ञापन भी नहीं लेता ताकि अपनी मैगजीन की दुकान में ले सके. संजय ने अपनी पत्नी के नाम से टाइटिल भी रजिस्टर्ड करवा लिया है. मजे की बात है कि अभी तक ये बात 'वी द पावर' के चेयरमैन राशिद नसीम को पता नहीं है. 
 
संजय श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी के नाम से जो टाइटिल रजिस्टर्ड करवाया है. उसकी डिटेल निम्न है-
WE THE NEXT-UPHIN44360, DIVYA SHRIVASTAV, 549/263, CHITRANS BHAWAN, BADA BARHA, ALAMBAGH, NEAR SHIV MANDIR, DIST- LUCKNOW, U.P. 16/9/2013 UP HIN F
 

बहरहाल 'वी द पावर' पत्रिका की कार्यशैली के बारे में बता दें कि यहां से जुड़ने वाले पत्रकारों या जिला संवाददाताओं से संजय श्रीवास्तव खबर बाद में पहले कम्पनी का कितना प्लाट बिकवा सकते हो, ये पूछते हैं. यहां बेहतर लिखने वालों से कोई मतलब नहीं है, अगर वो प्लाट बिकवा सकता है तो सबसे अच्छा रिपोर्टर है.
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित


उपरोक्त खबर पर संजय श्रीवास्तव का पक्ष पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

भड़ास पर छपी खबर पर मुझे कुछ कहना है… कुमार सुशांत की ब्लैकमेलिंग का शिकार मैं बना…

 

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