मोदी और मीडिया वालों की औकात

Vineet Kumar : साल 2002 यानी गुजरात नरसंहार की कवरेज किए जाने पर चैनलों के कैमरे तोड़े गए, उनके मीडियाकर्मियों को पीटा गया, धमकियां दी गई, चैनल ब्लैक आउट किए गए. नरेन्द्र मोदी ने खुद अपने भाषण में कहा कि ये टीवी नेटवर्क हम गुजरातियों को हत्यारा और बलात्कारी बताने की कोशिश में लगा है. लेकिन साल 2013 आते-आते यही चैनल उसी नरेन्द्र मोदी की मिनटों में नहीं घंटे में लाइव फुटेज काटकर आपके आगे परोस रहा है.

आपके मन में ये सवाल नहीं उठता कि पिछले 10-11 साल में ऐसा क्या हो गया और इसकी प्रक्रिया क्या रही कि जो बहस मोदी बनाम मीडिया होनी चाहिए थी उसे मीडिया ने कांग्रेस पर लाकर टिका दिया. वो मोदी की लात, धमकी नहीं झेल पाए और अब अपनी ये हार हमारे आगे बेबाक जुबान, बेखौफ अंदाज बोलकर धारदार होने की एक्टिंग भर कर रहे हैं? आपके मन में शंका नहीं होती कि जब ये करोड़ों रुपये के गोबरछत्ते लटकाए वैन वाले चैनल मोदी के आगे घुटने टेक दिए तो हमे किस हैसियत से बेखौफ होने की नसीहत दे रहे हैं. क्या इनकी अब इस इससे ज्यादा हैसियत नहीं रही या फिर छीन ली गई?

विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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