एक है ओवैसी, उसने कहा था कि कुछ समय के लिए पुलिस हटा लो फिर दिखाता हूँ औकात. उसका जबाब सुब्रमन्यम स्वामी ने दिया था की आरोप तो यही है कि गुजरात में हटा तो ली गयी थी पुलिस कुछ समय के लिए. दूसरी बात का जबाब खुद मोदी जी ने बोल कर नहीं बल्कि कर के दिया था. ओवैसी ने कहा था मोदी कभी हैदराबाद आ कर देखे तो दिखाता हूँ. मोदी जी न केवल गए हैदराबाद बल्कि लाखों लोग इकट्ठा भी हुए, वो भी टिकट लेकर. लेकिन सभा से कुछ समय पहले और उसके कुछ समय बाद तक भी सांसद होते हुए भी पता नहीं था कि आखिर छुपे हुए कहाँ थे ओवैसी जी.
अब एक नया नमूना आये हैं सराहनपुर से, कांग्रेस के उम्मीदवार हैं मसूद साहब जो सीधे भद्दी-भद्दी गालियों के साथ मोदी जी की बोटी-बोटी काट देने की बात कर रहे हैं. शायद संयोग ही हो कि मोदी जी की ह्त्या की एक साज़िश का भी साथ ही खुलासा हुआ है. समय चुकि चुनाव का है तो सीधे 'वोट' से ही इन बातों का जबाब दिया जाय तो बेहतर.
डिस्क्लेमर : जिस तरह हिन्दू परिवार में जन्म लिए किसी कांग्रेसी या वामपंथी द्वारा कहे गए शब्द हिन्दुओं का प्रतिनिधि शब्द नहीं हुआ करता उसी तरह ऊपर कही गयी बातों को अपराधियों की बात मानें न कि उसे सम्प्रदाय से जोड़कर इसे देखें. जैसे कपिल सिब्बल, दिग्विजय सिंह आदि के हिन्दू परिवार में पैदा होने के कारण हम शर्मिन्दा हैं, वैसे ही मेरे मुस्लिम बंधू भी शर्मिंदा होंगे इन उजअड्डों के उनके मज़हब में पैदा हो जाने से, ऐसा मुझे विश्वास है.
भारतीय जनता पार्टी से जुड़े पत्रकार पंकज कुमार झा के फेसबुक वॉल से.





