मौत को गले लगाने का दर्दनाक रास्ता क्यों चुना अमर उजाला के पत्रकार विनीत पारिक ने?

Jitendra Dixit : सुबह पहली खबर से हिल गया। बहुत बुरा हुआ। साथी विनीत पारिक ने मौत को गले लगा लिया। विनीत प्रतिभावान पत्रकार थे। पिछले साल प्रोन्नत होकर सीनियर रिपोर्टर बने थे। कल जब आफिस से निकला तो वह कारिडोर में मिले। हमेशा की तरह मुस्कराकर चरण स्पर्श किया। बोला- सर कोई काम हुआ करे तो बता दिया करें। जब भी वह मिलते थे, यह जरूर कहते थे। रात में दफ्तर में काम किया। किसी तरह का कोई तनाव नहीं। हंस-बोल रहे थे।

दफ्तर से जाने के बाद रात में कुछ ऐसा हुआ जिससे उसने मौत को गले लगाने का दर्दनाक रास्ता चुना। भोर में ट्रेन के आगे कूद पड़ा। दफ्तर के खुशहाल माहौल में कभी अंदाजा ही नहीं हुआ कि उसके अंदर कुछ ऐसा अवसाद चल रहा है जो उसकी जीवनलीला ही खत्म करने वाला है। परिवार गाजियाबाद में रहता है। करियर की शुरूआत अमर उजाला से ही की। मुजफ्फरनगर में रिपोर्टर के रूप में रहा। पिछले साल तबादले पर मेरठ आया। प्रमोशन हुआ। स्वभाव से कुछ अंतर्मुखी था। दफ्तर के सभी लोग उसकी जुदाई से दुखी हैं।

जीवन में सब कुछ अपनी योजना से नहीं होता। यदि वह निहायत निजी परेशानी किसी साथी या वरिष्ठ अधिकारी से शेयर कर लेता तो शायद वह अवसाद पर विजयी होता। दुर्भाग्य से वह निजता में अंदर ही अंदर घुटता रहा। कभी किसी इसका अहसास ही नहीं हुआ।

Rajeev Pratap Saini oh shitt
 
Jugul Kishore PARMATA SHANTI DEN
 
Shashank Bhardawaj is tarah ka kadam nahi uthana chahiye..jindagi mai bahut se chize thik ki ja sakti hain…
 
Qamar Intakhab afsos ….
 
शिवानन्द द्विवेदी सहर oh.
 
Harsh Kumar वास्तव में आज दिन की शुरूआत इस बुरी खबर से हुई। आफिस के साथी संजीव ने दफ्तर पहुंचते ही इस बारे में बताया तो हिल गया। ज्यादा परिचय नहीं था लेकिन इतना जरूर जानता था कि विनीत बहुत ही मैच्योर व्यक्तित्व वाला लड़का था। मुजफ्फरनगर में मैं जब जागरण में इंचार्ज था तो वह उजाला में रेलवे की बीट देखा करता था। कभी किसी विवाद में उसका नाम नहीं सुना। संस्थान के प्रति वफादार लेकिन अंतर्मुखी किस्म का लड़का था। सबसे दुख की बात ये है कि मां-बाप को इकलौता बेटा था। मैं उनकी पीड़ा सोच-सोचकर दुखी हूं।
 
Sanjay Sharma sad news…
 
Deepak Sharma bhaut dukh hua morning mai news mile thi
 
Navneet Tiwari bahut hi dukhad …
 
Vikas Baliyan Bahut Dukhad,,, Afsosh ye bhi k Jo Samaaj ko Disha deney waaley hai,, agar wo bhi is parkar ka kadamutha saktey hai tab,,,, Sab Be-Maani hai,,, ye tatkaleen fainsla bhaley raha hoga magar,, Railway track tak aaney me samey laga bhi hoga tab bhi antarman k Duand me iss parkar ka kadam utha leney sey pehley thoda samey aur bhi mila hoga,,,, Ufffff,,, kya kaha ja saktaa hai
 
Savita Verma Gazal dukh hota h jb aisi dukhad durghatna hoti h…
 
संतोष त्रिवेदी दुखद।
 
Naresh Sharma अत्यंत दुखद खबर है।
 
Deepak Kumar bhaut bura huva
 
Ritesh Shrivastav प्रतिभावान पत्रकार सीनियर रिपोर्टर विनीत पारिक की मौत दुखद
 
Danda Lakhnavi दुखद खबर ! किसी मित्र के साथ मनोंभावनाओं का साँझा करने से अवसाद का वेग शिथिल हो जाता है ….
 
Sanjay Garg Dardnaak dukhat ant.muzaffarnagar kutchery ki beat per meri Atmiyata hui to family member ki tarh treat karta tha. Phone per sabse pahle mere beta ki education ki baat karta tha.Aat sad news k baad vishvaas nahi ho raha ki honhar Vinit aab sada k liye Chala gaya.Om shanti
 
Deepak Kumar oh so sad sir
 
Sanjeev Gupta So sad sir
 
Sultanpuri Neeraj Tiwari दु:खद घटना ।
 
Om Prakash Arora Bhut-2 dukh hua Dixit ji…..Bhagwan ko bhi achhe logo ki zyada zarurat hoti h….!!
 
Jitendra Sharma bhut bura hua
 
Shambhunath Shukla अत्यंत दुखदायी खबर।
 
Pawan Pandey अत्यंत दु:खद घटना
 
Vishal Jain so sad
 
Ashwinikumar Singh par unhone esa kiya kyon
 
Praveen Vashishta dukhad khabar sir, RIP. bhagwan unke parijano ko ye dukh sahane ki shakti den
 
Dilshad Malik i am said sir–maine vinit ko kafi jana hai–mzn main jab vo tha hum kafi bar mile the
 
Sunil Saini विनीत के साथ काम किया था। काफी खुशमिजाज और जिंदादिल साथी रहा। सुबह उसकी मौत की खबर सुनी तो सहसा यकीन ही नहीं हुआ। कनफमॆ हुआ तो जबरदसत झटका लगा। इसके साथ ही विवेक की याद भी जेहन में जिंदा हो उठी। ठीक विनीत की ही तरह वह भी एक हादसे का शिकार होकर एकझटके में सबको रूलाकर आंखों से ओझल हो गया था। विवेक और विनीत दोनों साथी हमेशा दिलों में जीवित रहेंगे। हंसते और खिलखिलाते हुए।
 
Suchitra Singh kuch pata chala kya karan tha….
 
Manoj Tripathi Dukhad!!!!
 
Rishiraj Rahi bahut hi dukhad …
 
Sharad Kumar Goel bahut hi dukhad …
 
Prem Bhatt Very sad
 
Anil Singh dukhad
 
Shyama Charan Panwar Bada dukhad samachar hai. Vinet bhai bade hi milansar saathi the. Aksar saath saath rahate the. Aise parthibavan saathi ke is kathor kadam uttane ke piche kya karan rahe honge khoj avm chintan ka vishay hai.
Shyam Panwar, Muzaffarnagar 9258708671
 
Ranvijay Kumar Ojha बहुत ही तकलीफदेह…। हममें से बहुतेरे दैनंदिन तनावों से जूझते रहते हैं लेकिन इस तरह हारना कोई हल नहीं है दोस्त। ईश्वर आपकी आत्मा को असीम शांति दे।
 
Vinod Parashar बहुत ही तकलीफदेह…। हममें से बहुतेरे दैनंदिन तनावों से जूझते रहते हैं लेकिन इस तरह हारना कोई हल नहीं है दोस्त। ईश्वर आत्मा को असीम शांति दे।
 
Kunal Deo shradhanjali…

जीतेंद्र दीक्षित के फेसबुक वॉल से.


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