यशवंत की चार चिरकुट कविताएं और फेसबुकियों की प्रतिक्रिया

Yashwant Singh : 'मेरी पचास चिरकुट कविताएं' नाम से एक संकलन है, जिसे कोई प्रकाशक छापने को तैयार नहीं. सोच रहा हूं आप लोग जैसे सुधी खलिहरों को जबरन पढ़ाऊं.. तो लीजिए उसमें से दो…..


1-
तू लगावे ला जब लिपिस्टिक
प्रभु हिल्ले मोर मनवा किंचित

(दो गे में अज्ञेयी कालजयी कवित्व संवाद)

2-
पहिले छोड़ दा तू प्यार क भरम
तब्बे खाइब तोर चनाजोर गरम

(मेला में एक महिलावादी मादा का पुरुषवादी नर से संवाद)

अगर सुपाच्य हों तो बाकी 48 भी पढ़वा दूं, मेरे द्वारा सिंचित और 'मेरी पचास चिरकुट कविताएं' में संचित 🙂


Yashwant Singh : 'मेरी पचास चिरकुट कविताएं' शीर्षक की दो कविताओं के फेसबुक पर जबरन मेरे द्वारा लीक कर दिए जाने के बाद कविताओं को लेकर जनता में देखे जा रहे खासे क्रेज से भयभीत कुछ प्रकाशकों ने खद ब खुद संपर्क स्थापित किया है… वहीं, खलिहरों के भारी मांग पर दो और ठेल रहा हूं… लगता है जमाना अपाच्य के सुपाच्य होने का है… इतने बिगड़े टेस्ट के लिए हम आप सभी के आभारी हैं….

3-
थमले रहा गुरु त सूकल संसार
भले ना हो पाकेट में पइसा चार

(एक चंदाजीवी कामरेड को वेतनभोगी पूंजीवादी की तरफ से समझाइस)

4-
चुनाव टैम में नेतवन सार चलत हैं
ई दौड़त कांखत भचकत भांजत हैं

(संसद के लिए सड़क पर सरगमा रहे जीवों पर दर्शक दीर्घा से कोरस)


भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आईं कुछ प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं…

अरशद जमाल बिलकुल पढ़ना चाहेंगे..

Muhammad Naved Ashrafi यशवंत भाई, कोई "चिरकुट पब्लिकेशन" ढूंढिये। अगर नहीं मिलता है तो भड़ास की तरह पब्लिकेशन भी शुरु कर दीजिए। हम जैसे चिरकुटों को भी छापने-छपाने का अधिकार मिल जाएगा

Ashwani Kumar Choudhary ie to sachh-much…chirkut vaaa

Guddu Yadav ई कहाँ मिली

Sunil Mishra चिरकुटई के वो भी पूरे पचास पायदान,, उस पर भी छपास,, कुछ जियादा ही जुल्म नही है उस्ताद ..

Sanjay Maurya hilela aara district
 
Shahid Ali Khan Bechaini se agli panktiyon ka intizaar hai
 
Ashwani Kumar Srivastva pachas chirkut kavitaye .kaun nahi padna chaega free me .plz jaldi tag kare
 
NA Nauyeen Jabrdst hai aur supachchya v…baki k v likh dijye plz
 
Harish Singh Jarur bhay
 
Shandilya Saurabh शराब-शराबी सिरीज की कविताओं से अच्छी होगी पार्थ;रिस्क लिया जा सकता है /;)
 
Santosh Singh वाह…मजा आ गईल
 
सौरभ भारत Like
Janardan Yadav aaane dejiyee mazzaa aa rahaha haian .
 
Vikas Mishra दो कविताएं और लिख लीजिए..सीधे यशवंत बावनी नाम से प्रकाशित करवा लिया जाएगा। कवर पर ही लिखा रहेगा, दो पैग लेने से पहले पढ़ना कानून अपराध है।
 
Smita Mishra अद्भुत और मौलिक कविताएँ
 
Sanjeev Singh yuva dil insan ka kavita likhane ka anjad samsamik hai …kavita me shaundray hai. jivantata hai…har kavita ki har pangtee padhane ka man karta hai ….
 
Ankit Agrawal bhaiya, jinkone vajpaye ki meri ikyawan (chirkut) kavitayien ya sibbal ka kavya-sankalan prakashit kiya tha unke paas le jaiye apni kavitao ko.
 
Alok Ratn Upadhyay Vikas Mishra यशवंत पचासा भी बुरा नहीं है ….
 
Shashwat Swatantra Badii Sundar rachnaayei.n
 
Ashutosh Na Real aap jari rakhiye, number dene ko to hum baithe hi hain
 
Braj Bhushan Dubey वाह यशवन्‍त जी। गजब। शेष कविताओं को भी जरूर साझा करिये।
 
Sarvesh Yadav रविवार का खलिहर नमस्कार भाई अगर चिरकुट कविताये है तो हमीं लोगो के लिए है हम न पढ़ेंगे तो कौन पढ़ेगा सो यही प्रकाशित कर दीजिये।
 
Aamir Khan Waha waha waha nihayti chirkut pane ki kavita hai superb
 
Manish Tiwari चिरकुट कविता सब पढे़, तबै वो चिरकुट होय , जे ना चिरकुट पढ सका , कईसे वो चिरकुटिया होय ।
 
Avanindrsingh Aman Hum padhab bhaiya..
 
Yashwant Singh ऐ भाई आप लोग इतना चढ़ाइए मत नहीं तो दो ठो अउर ठेल देंगे अब्बे…
 
Swapnil Kumar hahahaha……. niman ba…. 48 go auri jaldi theliye
 
Guddu Yadav ठेल दा
 
Dhananjay Singh फगुआ चढ़े लगल /ठेलत रहा भईया
 
Arun Sathi पाचक खाय के पाच लेब…कौनो बात नइखे……बाकि…..चिंटुआ के दीदी वाला भी post करा ….
 
Arif Beg Aarifi padhenge bhai,kya sabhi kavitao me bhojpuri tadka h
 
Anand Rai ओक्काई !
 
Devendra Kumar verry nice
 
Priyabrata Chaudhary oh superb..
 
Prathak Batohi तोहार कवितिया नीक लागत बा
 
Sudhanshu Kumar भोजपुरी एल्बम बनानेवाले इसे हिट करवा देंगे l
 
अमित सिंह Lage raha Babu
 
Shanti Swarup Gaur original
 
Chandra Shekhar Shaastri तेरा नाम क्या है? धरतीधकेल। बाप का नाम -खुरपा पाड़। बाबा काभी बताउ? ना बस इससै इ भरपाई हो ली…होली अभी दूर है बाबा यशवंतानंद जी महाराज।
 
Swapnil Kumar hahaha……. bahut khub…. 46 baki
 
Anand Rai बचाओ बचाओ !
 
Arvind Kumar Singh बेशक ये कविताएं उतनी बोझिल नहीं जितना समझ रहे हो भाई…जेल जाने मन के साथ इसको भी पढ़ने का इरादा है
 
Hari Jaipur Lekhak ko apni kavita ka moolyankan nahi karna chaahiye

Disha Vidyarthi Jha Aagaz ye hai toh anjam kaisa hoga…!! Isiliye i baki 48 sanchit kavitaon se na rakhe vanchit..

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