यशवंत को मिल गया खुश रहने का फार्मूला

Yashwant Singh : मुझे खुश रहने का फार्मूला मिल गया है… बहुत दिनों से परेशान था.. हर रोज सुबह जब सोकर उठता था तो यही लगता था कि जाने क्यों, आज कोई चमत्कार होगा.. पर आज सच में चमत्कार हो गया.. बड़ा छोटा फार्मूला है खुश रहने का… जब आप बतौर मनुष्य जीवन जीते जीते दुखी डिप्रेस्ड परेशान हों तो अपने घर या पार्क या खेत या छत या मोहल्ले में कुत्ते की तरह चलें, भोंके… यानि मनुष्य होना दुखी करे तो गैर-मनुष्य का चाल, चलन, चेहरा अपनाएं… जब आप अपने रुटीन से दुखी परेशान हों तो अपने को डिक्लास कर लें..

जैसे आप सब फेसबुकिये परेशानी की हालत में होने पर फेसबुक, कलम, कीबोर्ड, किताब सब फेंककर मनरेगा के मजदूर बन जाएं… किसी बिल्डर के प्रोजेक्ट के एक अदने से मजदूर बन जाएं… किसी खेत स्वामी के मजदूर बन जाएं और अनाम रहें, ना बोलें… दिन भर काम करें और रात में वैसे ही सोएं जैसे बाकी मजदूर सोते हैं… सड़क किनारे या मकान किनारे छोटा सा बरसाती तंबू गाड़कर … देखना, आनंद न आए, खुशी न आए तो पैसा वापस…

या फिर गंदे कपड़े लत्ते पहनकर दाढ़ी वगैरह बढ़ाकर किसी मंदिर गुरुद्वारा चौराहा के सामने भिखमंगों की टोली में बैठ जाएं… कुछ ना कहें, कुछ ना बोलें… लात पड़े सह लें… गाली मिले ओढ लें… आप अहंकार शून्य होकर जीने लगिए… देखिएगा… लौटकर जब आप अपनी दुनिया में आएंगे तो पता चलेगा कि आप कितना कुछ बदल चुके हैं..

हम बुद्धिजीवी मिडिल क्लास लोग मनुष्य बिलकुल नहीं हैं.. हम किसिम किसिम के चिरकुट आग्रहों को ओढे बिछाए हुए पुतले हैं जिनने मनुष्य की ओरीजनल संवेदनशीलता को किल कर रखा है… मैंने खुश रहने के जो दो फार्मूले बताए हैं, वह विपश्यना और ध्यान जैसे पारंपरिक तरीकों से बिलकुल हटकर हैं… विपश्यना, ध्यान आदि आपको आपके खोल में रखकर मुक्ति, शांति की बात सिखाते हैं…. और यह इसलिए उतना सफल प्रभावी नहीं क्योंकि यह आपके आग्रहों दुराग्रहों को नहीं बदल पाते… मैंने जो तरीके बताए हैं, वो थोड़े साहस की तो जरूर मांग करते हैं लेकिन हैं पूरे चौबीस कैरट वाले… शोध अभी जारी है… प्रयोग अभी जारी है…

कुत्ता न सही, बैल बन चला… बांअ… 🙂

वैसे, आज सपने में मैं स्त्री बनकर पूरी रात गारी (गीत) गाता रहा… और, हद तो तब हो गई जब सुबह उठकर यही गारी जोर-जोर से गाने लगा… पत्नी, बच्चा लोग सब आंख फाड़े देखने लगे कि इसे अब ये नया क्या हो गया… उन्हें सिंपटम ठीक नहीं लगे रहे मेरे… खैर, आप लोग भी सुनिए गारी और इसे गाइए, दोहराइए….

सुन्नर सुन्नर बाबाजी के
करिया करिया दढ़िया जी…
उनपे कूदल मोटकी बिलरिया
दढिया धय के झूलल जी…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं…

पंकज कुमार झा जय हो

Ankit Sharma क्या बात क्या बात….
 
Nasim Ansari कुछ लोगो को अंजाने मे ये फोर्मुला अपनाते हुये भी देखा है मैने
 
Ashutosh Sharma आपके इन सुझावों की इस समय सर्वाधिक आवश्यकता मुझे है। कुछ और भी ऐसे ही सरल किन्तु उपयोगी नुस्खे बताइए। एक लम्बे समय से बड़ी अजीब कैफियत में जीवन गुज़ार रहा हूँ। इसको अवसाद कहते हैं या पागलपन, पता नही.ं
 
Daya Sagar सकारात्मक सोच काफी मुश्किलें दूर कर देती है
 
Palash Biswas तथास्तु वत्स।अखंड हर्षवद्धन बनो।यह उत्तर आधुनिक बंदोबस्त के माफिक है।
 
राकेश कुमार सिंह हम किसिम किसिम के चिरकुट आग्रहों को ओढे बिछाए हुए पुतले हैं जिनने मनुष्य की ओरीजनल संवेदनशीलता को किल कर रखा है…
 
Shyamnandan Kumar …हम बुद्धिजीवी मिडिल क्लास लोग मनुष्य बिलकुल नहीं हैं.. हम किसिम किसिम के चिरकुट आग्रहों को ओढे बिछाए हुए पुतले हैं जिनने मनुष्य की ओरीजनल संवेदनशीलता को किल कर रखा है…Bahut sahi hai… Aapka formula adventurous hai, jo middle claas ke logon ko nahi bhaayegi…kyonki unka khol itna kada hai ki kachhua ya gainda bhi sharmaaye… Baharhaal aapki pryogdharmita ko salaam
 
Rakesh Srivastava जस्‍ट सलाम बॉस .. जस्‍ट सलाम मजा आ गया .. सच बताऊं, बस यही जीवन सिद्धांत बनाया है .. अपने को डिक्लास कर लें.. … विपश्यना, ध्यान आदि आपको आपके खोल में रखकर मुक्ति, शांति की बात सिखाते हैं….
 
Tara Shanker मनुष्य होना दुखी करे तो गैर-मनुष्य का चाल, चलन, चेहरा अपनाएं…..bahut sundar!
 
Om Sharma nice
 
Vinod Musan Main in farmolon ko apna chuka hun…ye wakihi kargar hain…
 
Arun Pandey कपड़े के अंदर हर इंसान नंगा है…बस इसी नंगेपन को जो ढकेगा..ससुरा परेशान रहेगा
 
Mohammad Khan wah…sundar…. keep it continue
 
Gulab Singh सपना देखना मनुष्य का स्थाई स्वभाव है। और जैनेटिकल तौर पर मनुष्य के रग-रग में बदलाव लाना भी सपने के समान ही होता।
 
Swami Nandan दिल्ली के भावी सीएम को एक मुफ्त सलाह इसे दिल पर नहीं लेकर दिमाग से सोचियेगा । अरविन्द केजरीवाल जी आप मुख्यमंत्री की शपथ लेनेवाले हैं तो विभाग भी होगा और विभागों के सचिव भी आपको एक अदद मीडिया सलाहकार की भी जरुरत होगी , हम जानते हैं आपके पास पत्रकारों की पूरी फौज है लेकिन कोई फक्कड़ और ईमानदार चाहिए तो हम भड़ासियों की और से पेश है एक खालिस 24 कैरेट फक्कड़ जो अपनी आप की भी नहीं सुनता यशवंत नाना पाटेकर टाइप ।
 
Chandan Srivastava वाह वाह, एक नए ओशो का उद्भव देख रहे हैं हम. आपकी एक एक बात से अक्षरशः सहमत. बस साहस जुटाना ही मुश्किल उसके बाद सब कुछ आसान.
 
Pradeep Sharma जय हो दादा जय हो…)))
 
Soban Singh Bisht ओशो ने भी यह राह सुझाई थी…अनुभव अद्भुत रहेगा।
 
Ashish Sagar Dixit फ़कीर बन जाने से आत्म को सुख मिलता है और टन को दुःख
 
Riyaz Hashmi याद है ना, 'कुत्ता हूं मैं' हेडिंग लगाया था और अब शोध। वाह… वाह…. आप तो दार्शनिक हो गए हो दादा। -)
 
کشفی کشفی very nice sir
 
Vidrohi Gauraw Solanki Yashwant ji aapne jiya ki nhi is typ ki jindgi ko? Maine to jiya hai kuch din… mja aa gya tha… i miss that days..
 
सुनीता भास्कर खूब
 
Rita Das duniya ke mazdooor ek ho…..main media mazdoooooor hooon….
 
Acharya Sushil Gangwar nice bro
 
राय संजय JAI HO BABA JI KI …
 
Arif Beg Aarifi gajjab ka idea hai,i ll defenatly try it
 
Pankaj Sharma आप अहंकार शून्य होकर जीने लगिए… देखिएगा… लौटकर जब आप अपनी दुनिया में आएंगे तो पता चलेगा कि आप कितना कुछ बदल चुके हैं.. हम बुद्धिजीवी मिडिल क्लास लोग मनुष्य बिलकुल नहीं हैं.. हम किसिम किसिम के चिरकुट आग्रहों को ओढे बिछाए हुए पुतले हैं जिनने मनुष्य की ओरीजनल संवेदनशीलता को किल कर रखा है…उफ्फ…क्या दर्शन है
 
Ram Dayal Rajpurohit जय हो गुरु गुरु ज्ञान की
 
Deepak Shweta Singh Wah Subah Sauchane se Har samasya hal ho jat hai Bhaisaheb
 
Jyotishi Sidharth Jagannath Joshi सीधी सादी भाषा में इसे डिस्‍ट्रक्‍शन कहते हैं। मेंटल डिस्‍ट्रक्‍शन। जब दिमाग अटक जाता है तो उसे झटके से दूसरे रास्‍ते पर ले जाकर आगे बढ़ने का रास्‍ता खोला जाता है। अनुलोम विलोम प्राणायाम कीजिए। अधिक सहज और सजग है।
 
Ashok K Sharma Should not be taken lightly, truly worth implementation, I do agree..
 
Prem Prakash Yashwant Singh जी….वाह भाई…प्रयोग करके देखेंगे..देखा भी है…पढ़ के मज़ा आया…ज़ारी रखें..
 
Sharvan Saini theek kha par kerega kon padhne matra se hi bhut santi mile h
 
Deepak Parashar Aapka anubhav theek hai

Ziaur Rahman Bhai ap kab se station par baith rahe han ?

Manoj Dixit यह हिप्पी पहले कर चुके हैं और बहुत लोग ऐसा करते हैं अमेरिका में

डॉ. अजीत जय हो बाबा भडासानंद महाराज की…..

Qazi Suhaib Khalid loooool

Syed Mazhar Husain Very Nice


भड़ास तक अपनी बात bhadas4media@gmail.com पर मेल करके पहुंचा सकते हैं.

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