यशवंत मामले में मुलायम करें हस्तक्षेप

जिस दिन उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम सामने आए और समाजवादी पार्टी सर्वाधिक सीटें जीतकर आई तो यह तस्वीर साफ हो गई थी कि सपा की सरकार यूपी में बनेगी। उसी दिन मीडिया में जब अखिलेश यादव का पहला बयान आया तो उन्होंने खुशी में झूमते हुए कहा था कि अब यूपी में गुंडाराज खत्म होगा, हमारे कार्यकर्ता हो या कोई ओर कानून से खेलने वालों को नहीं बख्शा जाएगा। जब अखिलेश ये बयान दे रहे थे तब यह तय नहीं हुआ था कि वे यूपी के सीमए होंगे।

इस बयान से यूपी ही नहीं देशभर में ये बयान सुनने वाली जनता को खुशी हुई ये युवा अखिलेश जोरदार काम करेगा, लेकिन भड़ास के संपादक यशवंत सिंह की पुलिस ने गुंडागर्दी के साथ जो गिरफ्तारी की उसने अखिलेश यादव के प्रति मन में जो भाव उत्पन्न थे वे खत्म कर दिए। गुंडाराज खत्म करने की बात करने वाला एक सपा नेता आज सीएम बन गया और गुंडागर्दी होने की बजाय बढ़ गई है। यूपी में आज पत्रकारों की सुरक्षा खतरें में है। यशवंत सिंह सारे पत्रकारों के भगवान है और भगवान कभी ऐसे-वैसे काम नहीं कर सकते है।

यशवंत के साथ जो कुछ यूपी पुलिस ने किया उसके लिए अखिलेश जी को सख्त कदम उठाकर इस मामले की जांच करानी होगी। दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने जो बर्ताव यशवंत के साथ किया उसके लिए उनको सजा देनी होगी और वे सार्वजनिक रूप से यशवंतजी व पत्रकारों से माफी मांगे। एक पत्रकार को गिरफ्तारी से लेकर अब तक आंतकवादी की तरह उसके साथ बर्ताव करने के पीछे कौन लोग है, कौन सा लाभ है, कौन सा सौदा हुआ है इसका भी अखिलेश सरकार खुलासा करे। इस मामले में सपा के राष्ट्रीय नेता और भावी प्रधानमंत्री का सपना देख रहे मुलायम सिंह को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

लेखक अविनाश पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.


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