यशस्वी यादव को अफगानिस्तान भेजा जाए डेपुटेशन पर

Kartikeya Mishra : शाबास यशस्वी यादव.. आपके शानदार नेतृत्व में कानपुर पुलिस ने दिखा दिया कि उत्तर प्रदेश पुलिस में पौरुष की कोई कमी नहीं| मुज़फ्फरनगर दंगे चूँकि खूंखार और दुर्दांत डॉक्टरों ने नहीं कराये थे, इसलिए पुलिस ने समय से कार्रवाई नहीं की| अब भी समय है कि हमारी दरियादिली को हमारी कायरता और अकार्यकुशलता समझने वाले चेत जाएँ.. बाई द वे.. सुना है कि अमेरिका इस साल के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौटने वाला है| भेजा जाय यादव जी को डेपुटेशन पर..

http://bhadas4media.com/article-comment/18180-2014-03-03-12-15-10.html

धन्यवाद Yashwant Singh

सीआईएसएफ में Deputy Superintendent of Police के पद पर कार्यरत कार्तिकेय मिश्रा के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आईं कई टिप्पणियों में से तीन पठनीय टिप्पणियां इस प्रकार हैं…

Rajiv Mishra : Professor tak ko in jahilo aur kasayiyo ne nahi baksha. In Ka mukhiya kumbhkarn ki nid so raha hai. Krurta aur barbarta ki parakashtha hai.

Ashutosh Singh : batia to aap ki sahi h…….pr dhayan dijiyega khi akhileswa aap k upar makoka n laga de..sir

Prashant Tripathi : नूतन ठाकुर जो खुद आईपीएस की पत्नी हैं और जनहित के मुद्दों पर याचिकाएं दायर करती रहती हैं, उन्होंने मेडिकल कॉलेज की स्थिति का जायजा लेने के बाद एसएसपी यशस्वी यादव की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के विरुद्ध मानवाधिकार अध्यक्ष को लिखा है. इसके बावजूद दैनिक हिंदुस्तान जैसे अखबार विधायक द्वारा बना कर दी गई रिपोर्ट को ही प्रकाशित कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी सारी हदें पार कर चुकी है. नेता कुछ भी करने के लिए स्वतन्त्र हैं. एसएसपी यशस्वी यादव ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्ता का वरदहस्त उनके ऊपर हो तो उनके जैसे अफसर हिटलर और मुसोलिनी को भी पीछे छोड़ सकते हैं..

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