‘यूएनआई’ के संयुक्त संपादक समेत दो पत्रकारों व क्लर्क को एससी/एसटी एक्ट में जेल

आदरणीय यशवंत जी, यह समाचार 'न्‍यूज एजेंसी यूएनआई' से संबंधित है। संभवतया यह देश का पहला मामाला होगा जब एससी/एसटी एक्ट के तहत देश के चोटी के पत्रकारों को हिरासत में लेने का आदेश दिल्‍ली की पटियाला हाउस अदालत ने दिया। 
 
आप जानते हैं कि मीडिया में दलित वर्ग की मौजूदगी नगण्‍य है। फिर उसमें किसी का हिम्‍मत करके केस दायर करना और फिर उसमें निर्णय भी दलित के अनुरूप आना दुर्लभतम मामला है। 
 
आपकी प्रतिष्ठित वेबसाइट पर यह समाचार प्रकाशित होने से देश की मीडिया को यह संदेश मिल सकेगा कि दलित उत्‍पीड़न अब पूरी तरह बंद किया जाए।
 
इनमें से हिरासत में लिये गये संयुक्‍त संपादक नीरज वाजपेई इस समय न्‍यायमूर्ति मार्कण्‍डेय काटजू की अध्यक्षता वाली 'प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया' के सम्‍मानित सदस्‍य भी हैं। 
 
इस संबंध में नवोदय टाइम्स ने खबर प्रकाशित की है लेकिन अखबार ने संवाद समिति का नाम छापने से परहेज किया है। यह आपके विवेक पर है कि आप एजेंसी का नाम देंगे अथवा नहीं, क्योंकि यह मामला दो पार्टियों के बीच है न कि संस्‍थान और व्‍यक्ति के मध्‍य। नवोदय टाइम्स में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशाट दिया जा रहा है.
मामले में शामिल एक अन्‍य अभियुक्‍त पत्रकार स्‍वयं को पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्‍ण आडवाणी का दायां हाथ समझते हैं और उन्‍हें प्रधानमंत्री बनवाने के लिए पत्रकारिता धर्म का इस्तेमाल करने में एड़ी चोटी का जोर लगाये हुये हैं। इसलिए भी यह मामला बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाता है क्‍योंकि राजनीति के शिखर पुरूषों के पत्रकार चेलों से पंगा लेना बहुत साहस का काम है और इसकी प्रशंसा की जानी चाहिये। 
 
खबर की सत्‍यता के लिए 'पटियाला हाउस कोर्ट की वेबसाइट पर जाकर चेक किया जा सकता है या फिर आपके यूएनआई में जो सोर्स हों उनसे भी पता किया जा सकता है।
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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