यूपीएसएसीसी के चुनाव को लेकर लखनऊ में घमासान, मेलबाजी भी शुरू

उत्‍तर प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति में चुनाव को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चल रहा है. राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का कायर्काल 10 जनवरी को ही समाप्त हो चुका है. कायर्काल खत्म होने से पहले ही समिति ने दरियादिली दिखाते हुए समय से चुनाव कराने की मंशा जताते हुए वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की अध्यक्षता में एक चुनाव समिति का गठन कर दिया था. इस समिति के अन्य अधिकारी सर्वेश कुमार सिंह, गोलेश स्वामी और अंबरीश कुमार थे. विधान सभा चुनावों के मद्देनजर संवाददाता समिति के पदाधिकारियों ने चुनाव मार्च में कराने का अनुरोध किया था, जिसे अजय कुमार की अध्यक्षता वाली समिति ने स्वीकार कर लिया था.

अजय कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ 2 अप्रैल को बैठक कर चुनाव का कायर्क्रम घोषित कर दिया. इसके तरह 22 अप्रैल को मतदान होना था. पर जानबूझ कर विवाद पैदा कर दिया गया, जिसके चलते चुनाव टल गया तथा अजय कुमार ने भी इस्‍तीफा दे दिया. इस मामले को लेकर एक बार विवाद फिर से गहरा गया है. पिछले दिनों कई पत्रकारों की बीच इस चुनाव एवं विवाद को लेकर मेलबाजी की गई. वरिष्‍ठ पत्रकार रामदत्‍त त्रिपाठी ने मेल भेजकर सभी पत्रकारों को अपनी बात रखने देने का सुझाव दिया. तो वीकएंड टाइम्‍स के संपादक संजय शर्मा ने भी नए नियम कानूनों की जानकारी न दिए जाने पर एतराज जताया है.


From: sanjay sharma <weekandtimes@gmail.com>
Date: 2012/5/12
Subject: Re: UPSACC election postponed
To: Ramdutt Tripathi <ramdutt.tripathi@gmail.com>
Cc: kishor nigam <kishornigam@gmail.com>,

किशोर जी..
               आज शाम एनेक्सी में हुए दुखद बाद विबाद के बाद देर रात आदरणीय रामदत्त जी ने आपको मेल लिखा जिसकी प्रति सभी साथियो को भी प्रेषित की गई है. सारा विबाद उन नियमो और कानून को लेकर है जो कुछ माह पूर्ब बनाये गए थे. कुछ लोगो का मानना है कि उन नियमो को सभी को नहीं बताया गया था ..उनमे एक में खुद हूँ.  इसके विपरीत कुछ साथियों का मानना था कि एनेक्सी में यह पत्र चिपका दिया गया था . साथ ही पत्रकारों को खुद सजग होना चहिये . हो सकता है उनका कहना सही हो पर मेरा मानना है कि संचार क्रांति के इस युग में सबके पास मोबाइल होता है और साथ ही बीएसएनएल मात्र तीस रुपए में तीन हजार एसएमएस करने की सुविधा देता है. अच्छा होता कि इस तरह के किसी भी नियम कि जानकारी सबको दे दी जाती. खैर जो बीत गया उस पर ज्यादा विबाद करने से कोई फायदा नहीं. और जो तर्क वितर्क आज हुए उन्हें भी बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता. मेरा अपना मानना यह है कि जब सभी साथी यह कहते रहे है कि यह कमेटी मात्र सभी लोगो के आपसे भरोसे के कारण बिना पंजीकर्त हुए और बिना संबिधान बनाए हुए चलती रही है तो आगे भी ऐसा ही चलते रहना चहिये. इसमें इस तरह के नियम कि चुनाव लड़ने के लिए तीन साल मान्यता पुरानी होना चहिये ठीक नहीं है.

यह कमेटी पत्रकारों की पत्रकारिता संबंधी सभी कार्यो को बेहतर बंनाने के लिए है. इसमें किसी भी प्रकार का आपसी बिबाद नहीं होना चहिये. मेरा सुझाब है कि आप सभी साथियों को बुला कर इस बात पर सबसे पहले मतदान करबा ले कि चुनाव इन नए नियमो के आधार पर होना चहिये या पुराने..सभी साथियों से यह भी अनुरोध है कि सभी अपने अपने स्तर से इस बात का प्रयास करे कि हम लोगो के बीच आपसी बिबाद पैदा ना हो.
पूरा भरोसा है कि आप ऐसा करेगे.
सादर
संजय शर्मा.
वीक एंड टाइम्स

On Fri, May 11, 2012 at 11:42 PM, Ramdutt Tripathi <ramdutt.tripathi@gmail.com> wrote:

    Dear Kishor Ji , Raj Kumar Ji  and Deepak Gidwani ,
     
    It is very unfortunate that some people have not allowed you to conduct the elections.
     
    You will agree that  no committee or society can function without certain rules.
     
    The present rules were discussed in the executive committee at least three to four times.
    
Then the committee invited suggestions from all members before the GBM was held.
     
    The first GBM was attended by more than 70 members.  And more time was granted for considereration before the second GBM passed the rules.
     
    Each clause of the rule was discussed one by one and passed in a democratic manner.
     
    This was done in August 2011. The final rules were widely circulated.
     
    According to committee office bearers no objection or specific proposal for amendment has come to them so far.
     
    However this is an opportunity to reconsider the rules and invite proposals for amendments.
     
    Through this email I request office bearers and executive members to give opportunity to all members to express  their views on the present  rules and  and invite specific proposals for amendments.
     
    I also request all correspondents , photo journalists and cameramen to actively participate in the process , so that elections for a new committee are held soon without any dispute.
     
    With warm regards,
     
    Ram Dutt Tripathi

    On 11 May 2012 17:02, kishor nigam <kishornigam@gmail.com> wrote:

        Dear All,

        The UPSACC election has been postponed due to certain unavoidable and unforeseen circumstances.
        The notice regarding the same is attached herewith.

        Warm regards.

        Kishor Nigam

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