यूपी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी : नितिन गडकरी

: सपा-बसपा से कोई लेना-देना नहीं : मोदी पीएम पद के दावेदार, पर मैं नहीं : नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी मानते हैं कि हालांकि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में चतुष्कोणीय टक्कर हो रही है, और उनकी पार्टी के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की ठोस सम्भवनाएं हैं। न्यूज24 के खास कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ में प्रधान सम्पादक अनुराधा प्रसाद के सवालों की बौछार का सामना करते हुए गडकरी ने दावा किया कि भले ही उत्तर प्रदेश में भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा के बीच मुख्य संघर्ष है, पर उनकी पार्टी के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की प्रबल संभावनाएं हैं।

‘इस विश्वास की वजह… ?’ अपनी उंगुलियों में हिसाब-किताब करते हुए गडकरी कहते हैं, “सपा तथा कांग्रेस मुसलमानों को आरक्षण का लाभ दिलवाने की होड़ में लगी हैं उत्तर प्रदेश में। ये दोनों तुष्टीकरण की सियासत कर रही हैं। इनकी इसी राजनीति के चलते प्रदेश में हमारे हक में वातावरण बन रहा है। हम मानते हैं कि हमें 28 प्रतिशत मत तो मिल ही जाएंगे। अगर इतने मिले तो सीटों में इनकी संख्या हो जाएगी दो सौ के आसपास।''

उत्तराखंड और पंजाब में भाजपा की पतली हालत को लेकर आ रही तमाम नकारात्मक खबरों को खारिज करते हुए भाजपा अध्यक्ष को उपयुक्त दोनों प्रदेशों में भी अपनी विजय को लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं है। ‘आप उत्तर प्रदेश में जीत को लेकर इतने आश्वस्त हैं तो क्या आपने वहां पर अपने नए मुख्यमंत्री के नाम को भी तय कर लिया है…?’ इस सवाल का सीधा उत्तर देने की बजाय वे बताने लगे, “हमारे यहां नव निर्वाचित विधायक अपने नेता का चयन करेंगे। हमारी पार्टी कांग्रेस की तरह से मां-पुत्र या सपा की तरह से पिता-पुत्र की पार्टी नहीं है। हम बसपा की तरह से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी भी नहीं हैं। हमारे यहां लोकतांत्रिक तरीके से फैसले होते हैं।”

‘क्या आप उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड में सरकार का गठन करने के लिए बसपा से हाथ मिला सकते हैं?’ नितिन गडकरी ने साफ किया कि भाजपा का सपा या बसपा का चुनावों से पहले या बाद में हाथ मिलाने का कोई सवाल ही नहीं है। “ये दोनो पार्टियां दिल्ली में कांग्रेस से सहयोग करती हैं यूपीए की सरकार को बचाने के लिए। उन्हें बदले में यूपीए सरकार सीबीआई कार्रवाई से बचाती है। ये दिल्ली में दोस्ती करती हैं, और उत्तर प्रदेश में नूरा कुश्ती।”

‘आपकी पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज की पांच राज्यों में हो रहे चुनावों में प्रचार से दूरी की वजह?’ नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि सुषमा जी इन दिनों अस्वस्थ हैं। उनका इलाज चल रहा है। वो स्वस्थ होते ही चुनावी रणभूमि में कूद पड़ेगी।

‘कहा जा रहा है कि बाबू सिंह कुशवाहा प्रकरण को लेकर आपकी पार्टी में शीर्ष नेताओं में तीखे मतभेद उभर कर सामने आए। आडवाणी जी और सुषमा स्वराज कतई नहीं चाहते थे कि तमाम आरोपों से घिरे कुशवाहा को भाजपा में शामिल किया जाए…’ कुछ बचाव की मुद्रा में आते हुए गडकरी ने कहा, “अब चूंकि कुशवाहा ने खुद कह दिया है कि वे जब तक सभी आरोपों से अपने को मुक्त नहीं कर लेते तब तक भाजपा में उनकी सदस्यता को स्थगित रखा जाए। इस रोशनी में अब इस प्रकरण का पटाक्षेप करना ही ठीक रहेगा। हालांकि उनको पार्टी में शामिल करने का फैसला पार्टी के नेताओं ने मिल कर लिया था। पर जो भी हुआ उसकी मैं जिम्मेदारी लेता हूं।“

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए भाजपा अध्यक्ष ने माना, ''इसमें कोई शक नहीं है कि आगामी पांच विधान सभा चुनावों को साल 2014 में होने वाले लोक सभा के चुनावों के सेमी-फाइनल के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी में आडवाणी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी, नरेन्द्र मोदी के रूप में प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार हैं। पर वे इस पद के दावेदार नहीं हैं।”

आप नितिन गडकरी के साथ आमने-सामने शनिवार (28 जनवरी) तथा रविवार (29 जनवरी) को रात साढ़े आठ बजे न्यूज 24 चैनल पर देख सकते हैं. ((प्रेस विज्ञप्ति))

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