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महराजगंज

यूपी में कीट जनित और संक्रामक रोगों की रोकथाम के दावों की पोल खुली

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार द्वारा निरंतर नयी योजनाओं की घोषणा की जा रही हैं. ऐसा पहले की सरकारें भी करती रही हैं और आगे की सरकारें भी करती रहेंगी. इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब ये सरकारें इन योजनाओं के अमल के प्रति वास्तव में गंभीर होंगी. अब इसे सरकार की कार्यप्रणाली की कमी कहा जाए, सरकार और  प्रशासनिक अमले में सामंजस्य की कमी या सरकारी तंत्र का भ्रष्टाचार किन्तु इसका खामियाजा तो प्रदेश की बेचारी जनता को ही उठाना पड़ता है.

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार द्वारा निरंतर नयी योजनाओं की घोषणा की जा रही हैं. ऐसा पहले की सरकारें भी करती रही हैं और आगे की सरकारें भी करती रहेंगी. इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब ये सरकारें इन योजनाओं के अमल के प्रति वास्तव में गंभीर होंगी. अब इसे सरकार की कार्यप्रणाली की कमी कहा जाए, सरकार और  प्रशासनिक अमले में सामंजस्य की कमी या सरकारी तंत्र का भ्रष्टाचार किन्तु इसका खामियाजा तो प्रदेश की बेचारी जनता को ही उठाना पड़ता है.

उत्तर प्रदेश में कीट जनित रोगों और अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए की जाने वाली फागिंग की सरकारी योजना के क्रियान्वयन के प्रति राज्य सरकार के असंवेदनशील रवैया का एक मामला सूचना के अधिकार के तहत प्रकाश में आया है. प्रदेश की राजधानी के सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर संजय शर्मा ने बीते मई माह में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय से प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 में फागिंग पर किये गए खर्चे की जनपदवार सूचना मांगी थी.

मुख्य सचिव कार्यालय ने शर्मा का सूचना का आवेदन प्रदेश शासन के नगर विकास विभाग को अंतरित किया. पुनः नगर विकास विभाग के अनु सचिव और जन सूचना अधिकारी रवींद्र नाथ सिंह ने संजय का सूचना का आवेदन उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय के निदेशक को अंतरित किया. स्थानीय निकाय निदेशालय के सहायक निदेशक  और जन सूचना अधिकारी  सुखेन्द्र कुमार ने पत्र के माध्यम से संजय को सूचित किया है कि प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 में फागिंग पर किये गए खर्चे की सूचना उपलब्ध नहीं है.

स्थानीय निकाय निदेशालय के इस विस्मयकारी और असंवेदनशील जवाब से स्तब्ध संजय ने कहा कि हमारी सरकारों को इन मूलभूत योजनाओं को गंभीरता से लागू करना चाहिए. संजय के अनुसार राजधानी के पॉश इलाकों के अभिजात्य नागरिकों तक इन रोगों का दस्तक दे देना सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है और  यदि हमारी सरकार अब भी नहीं जागी तो वह दिन दूर नहीं है जब डेंगू जैसी बीमारियाँ मुख्य मंत्री आवास और राजभवन तक जा पहुचेंगी. संजय इस सम्बन्ध में सूबे के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नयी योजनाओं की घोषणाओं के साथ साथ पूर्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा कर  प्रशासनिक अमले के पेंच कसने का अनुरोध करने जा रहे हैं.
 

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