यूपी में मंत्री ने करा दिया पुलिस-प्रशासन पर हमला!

एक मंत्री का समर्थक था लूट का आरोपित। सीधे तौर पर तो मंत्री प्रशासन पर कार्रवाई नहीं कर पाये, लेकिन मंत्री ने अपने समर्थकों को इशारा कर दिया। अभी जिले के आला अफसर मौके पर अपराधियों से पूछताछ में जुटे थे, कि अचानक मंत्री के समर्थकों ने अपने साथियों को छुड़ाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने को थाने पर ही हमला करा दिया। अपराधियों को जेल बंद करने की कार्रवाई के दौरान करीब साढ़े तीन सौ समर्थकों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी और जिलाधिकारी की कार को पुल से फेंक कर गोमती नदी के हवाले कर दिया। अब यह कथित मंत्री इस मामले से अपना नाम हटाने की जुगत में है और बेबस प्रशासन मंत्री का नाम इस मामले से गोल करने की कवायद में है। प्रदेश पुलिस भी इस मामले में माझी का नाम बचाने में जुटी है।

यह वाकया है राजधानी से सटे जिले सुल्‍तानपुर का और जिस मंत्री का नाम इस मामले में उछल रहा है, वह है संखलाल माझी। प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में मांझी का ओहदा है स्‍वास्‍थ्‍य-परिवार कल्‍याण विभाग में राज्‍य मंत्री का। आजमगढ़ मार्ग से सटे जिले अंबेदकरनगर में संखलाल मांझी का विधानसभा क्षेत्र आता है। प्रदेश सरकार में मुस्लिम राजनीति की शिया धारा के मजबूत खंभा की पहचाने वाले और पूर्व पुलिस अफसर रहे अहमद हसन के दाहिना हाथ माने जाते हैं संखलाल मांझी। लेकिन सुल्‍तानपुर के इस हादसे में सपाई कार्यकर्ताओं की करतूत ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर एक बड़ा बट्टा लगा दिया है। जाहिर है कि ऊपरी दबावों के चलते सुल्‍तानपुर जिला का प्रशासन मामले की लीपापोती में लगा दीखता है।

शुरुआत हुई एक युवा उद्यमी पीयूष सिंह की लूट से। दिल्‍ली निवासी इस युवा व्‍यवसायी ने अपने सुल्‍तानपुर के कादीपुर स्थित पैतृक गांव में एक बड़ी पोल्‍ट्री यूनिट स्‍थापित करने का इरादा किया था। काम शुरू हो चुका था। यहां कारीगरों को तत्‍काल भुगतान होना था तो पीयूष सिंह दिल्‍ली से रकम लेकर ट्रेन से सुल्‍तानपुर पहुंचा। 25 मई के भोर वक्‍त था करीब करीब ढाई बजे। निजी कार पर बैठ कर पीयूष कादीपुर की ओर बढ़ा। दस किलोमीटर के आगे ही कुछ बदमाशों ने कार पर कीलें फेंक कर उसे पंक्‍चर करा दिया और पीयूष, उसके चाचा व उसके ड्राइवर की पिटाई कर उससे साढ़े दस लाख की नकदी और लैपटाप व एक मोबाइल लूट कर फरार हो गये। बाद में किसी तरह यह लोग पास के गोसाईंगंज थाने पर पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज करायी।

सर्विलांस की मदद से सुल्‍तानपुर पुलिस करीब बीस दिन बाद लुटेरों तक पहुंच पायी और 16 जून की शाम साढ़े आठ बजे इनमें से दो लुटेरों को पुलिस ने दबोच लिया। लुटेरों के पास से साढ़े तीन लाख रुपये की नकदी, लैपटॉप और मोबाइल भी बरामद हो गया। बाकी लोगों की तलाशी में दबिश डालने के लिए कई टीमें बनायी गयीं और गोसाईंगंज थाना की पुलिस ने पकड़े गये संतोष और बब्‍लू मांझी नामक लुटेरों की फर्द तैयार शुरू कर दी। पीयूष सिंह ने लुटेरों की शिनाख्‍त भी कर दी।

बताते हैं कि इन लुटेरों का गांव कादीपुर मार्ग स्थित तातियानगर जमुनिहा है और उनकी करीबी जान-पहचान संखलाल मांझी से है। यह गांव केवट-बहुल है और लूट व हत्‍या जैसी वारदातों में कई अपराधी यहीं से हैं। यह अपराधी राजनीतिक आश्रय पाये हैं। कुछ ही पहले यहां अपराधियों की पकड़ के लिए फैजाबाद के डीजीआई ने खुद कमर कसी थी, लेकिन बलवाइयों ने उन्‍हें घर पर बुरी तरह पीट दिया था। बहरहाल, इस ताजा पकड़-धकड़ की खबर मिलने पर करीब साढ़े तीन सौ लोगों ने गोसाईंगंज थाने को घेर लिया। तनाव देखकर जिलाधिकारी रमाकांत कुमार और पुलिस अधीक्षक अलंकृता सिंह दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। भड़के लोगों को समझाने की कोशिश निरर्थक हो गयी और अचानक ही मौजूद लोगों ने बलवा शुरू कर दिया।

पुलिस पर भीड़ से गोलियां चलने शुरू हो गयीं। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और हवाई फायरिंग कर दी। भाग कर छितर-बितर भीड़ ने जिलाधिकारी की कार को पुल से धकेल कर गोमती नदी के हवाले कर दिया। इस हादसे में जिले के एएसपी, सीओ सिटी और एसओ समेत 22 पुलिसकर्मियों को चोटें आयीं हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। हंगामा संभालने के बाद पुलिस ने चिंहित चारों गांवों के बलवाइयों पर जानलेवा हमला समेत अनेक धाराओं पर सामूहिक मुकदमा भी दर्ज करा दिया और पकड़-धकड़ की कार्रवाई शुरू हो गयी। पड़ोसी जिलों की पुलिस को बुलाकर इलाके में फ्लैग मार्च और सघन छानबीन-तलाशी की जा रही है। पुलिस ने लूट में शामिल सुल्‍तानपुर के रामनरेश, परसुराम, बबलू निषाद तथा सीएसएम नगर के नदीम उर्फ निजामुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया।

45 नामजद और 300 अन्‍य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट के बाद अब तक 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन इसी बीच पुलिस को पता चल गया कि इस बलवे में राज्‍यमंत्री संखलाल मांझी का इशारा था। स्‍थानीय पत्रकार मनुराम पांडेय बताते हैं कि बलवे के समय मांझी सर्किट हाउस में टिके थे। एक अन्‍य सूत्रों के अनुसार लुटेरों को छुड़ाने के लिए उसके समर्थक जब मांझी के पास पहुंचे तो मांझी ने खुद तो आधिकारिक तौर पर कोई कार्रवाई करने की बात की, लेकिन लोगों को सलाह दी कि वे लोग थाने पर हंगामा करें जिससे मजबूर होकर पुलिस इन लोगों को छोड़ दे। बताते हैं कि मांझी की इस सलाह को मानकर ही यह उपद्रवी गोसाईगंज थाने पर हंगामा करने पहुंचे थे।

बहरहाल, पुलिस ने बलवाइयों पर सामूहिक मुकदमा दर्ज कर दिया है, लेकिन अलंकृता सिंह ने मांझी की संलिप्‍तता का आरोप वे खारिज करती हैं। लेकिन पुलिस महकमे में मांझी की करतूत की बात साफ तौर कही जा रही है। यह दीगर बात है कि संखलाल मांझी इस मामले में अपना हाथ नहीं बता रहे हैं, मगर सूत्र बताते हैं कि प्रदेश प्रशासन ने मामला में मांझी का नाम न कुबूल करने के निर्देश दिये हैं। लेकिन इस हालत ने प्रदेश के निजाम के रवैये का खुलासा तो कर ही दिया है। साथ ही यह भी कि प्रदेश में उद्योग लगाने की ख्‍वाहिशमंदों का स्‍वागत किस तरह होगा।

लेखक कुमार सौवीर सीनियर जर्नलिस्‍ट हैं. वे कई अखबारों तथा चैनलों में वरिष्‍ठ पदों पर काम कर चुके हैं. इन दिनों स्‍वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं.

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