यूपी में मुख्यमंत्री की मीटिंग में ये क्या हो रहा है? देखें तस्वीर

यशवंत जी नमस्कार, काफी लम्बे समय बाद आपसे बात हो रही है, पत्रकारिता के लंबरदारों के विरूद्ध आपकी जंग सर्वथा उचित है. कोई भी व्यक्ति स्वयं में पूर्ण नहीं होता. बुराइयां सभी में होती है किन्तु किसी कि कुछ बुराइयों के कारण उसकी अधिसंख्य अच्छाइयों को नज़रंदाज़ करना नितांत मुर्खता है. चलिए अब ओखली में सर दिया ही है, तो क्या डर मूसलों का. आपके प्रकरण में जो कुछ हुआ उसमें लंबरदारों और बाबुशाही का एक गठजोड़ साथ-साथ काम करता  दिखा.

बाबूशाही १५ मार्च २०१२ के बाद से एकदम निरंकुश हो गई है. मुख्यमंत्री को गुमराह कर सिर्फ अपना उल्लू सीधा कर रही है. युवा मुख्यमंत्री को राजनैतिक विरोधियों से लड़ने की बजाय अपनी ऊर्जा अपने नाकारा अधिकारियों से काम निकलवाने में खर्च करनी पड़ रही है.
 
आज मुख्यमंत्री मण्डी परिषद जैसे अहम विभाग की समीक्षा कर रहे थे. मुख्य सचिव, कृषि उत्पादन आयुक्त जैसे बड़े-बड़े अफसर बैठक में थे किन्तु जरा देखिये इस फोटो में, क्या कहीं से भी लग रहा है कि मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में ये अधिकारी बैठे हैं. एक अधिकारी फ़ोन पर बतकही करने में मशगूल हैं. दूसरा किसी अधिकारी से बात कर रहा है. एक सज्जन फाइल निपटा रहे हैं और इन सबसे अलग मुख्यमंत्री बेचारगी से सबका मुंह ताक़ रहे हैं.
 
याद करिये मायावती की बैठकों को जहां अफसरों को फोन पर बात करना तो दूर बैठक में फ़ोन ले जाने तक की अनुमति नही थी. तो क्या निरंकुश नौकरशाही ऊर्जावान युवा मुख्यमंत्री की सज्जनता और सहृदयता का नाजायज फायदा उठा रहे हैं? शायद हाँ!

क्रान्ति किशोर मिश्र

ब्यूरो प्रमुख

सुदर्शन टीवी न्यूज़

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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